Parliament Proceeding Live लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर आज चेयर पर ओम बिरला की वापसी हो गई है. ओम बिरला आज कार्यवाही शुरू होने पर आसन पर आए. ओम बिरला के आसन पर आने, कार्यवाही शुरू होने के बाद विपक्षी सदस्य वेल में आ गए और हंगामा शुरू कर दिया. स्पीकर ने सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा.
स्पीकर ने कहा कि प्रश्नकाल को इतना महत्वपूर्ण मानता हूं, कि दो दिन चली चर्चा पर धन्यवाद भी नहीं दे रहा. आप प्रश्नकाल नहीं चलने देना चाहते? इस पर विपक्ष की ओर से किसी ने कहा कि हम चलाना चाहते हैं, सरकार चलने देना नहीं चाहती. स्पीकर बिरला ने इसके बाद कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.
स्पीकर ओम बिरला ने माइक बंद करने के आरोप पर कहा कि माइक का बटन स्पीकर के पास नहीं होता. जिसे बोलने की अनुमति होगी, उसका माइक ऑन होगा. मैंने हमेशा संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया. जिस तरह से विपक्ष की महिला सदस्य वेल में आईं और प्रधानमंत्री की चेयर का घेराव किया, कुछ भी अप्रत्याशित हो सकता था और इसीलिए मैंने नेता सदन से सदन में न आने का आग्रह किया. लोकतंत्र में हर किसी की आवाज सुनी जाती है. एक विद्वान सदस्य ने फ्रीडम ऑफ स्पीच पर बहुत विस्तार से बात रखी. यह सदन नियमों से चलता है. सदन की मर्यादा को बनाने, अच्छी परंपराएं बनाने का प्रयास हम सभी को करना चाहिए. विश्वास भरोसा बनाए रखने के लिए सामूहिक संकल्प भी देना चाहिए और विचार-विमर्श भी करना चाहिए. दो दिन की चर्चा में कई सदस्यों ने उपलब्धियों की भी बात की. यह मेरी नहीं, सदन की उपलब्धि है, सामूहिक उपलब्धि है.
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि आसन की निष्पक्षता पर भी बात हुई. मैंने निष्पक्ष तरीके से, नियमों के तहत सदन चलाने की कोशिश की. मैंने सदन की गरिमा बढ़ाने का प्रयास किया. सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर देने, निष्पक्ष तरीके से सदन की कार्यवाही का संचालन करने का प्रयास किया. कुछ माननीय सदस्यों ने नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका जाता है, पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता है. नेता सदन हों, विपक्ष के नेता हों या मंत्री, सभी को नियमों के तहत ही बोलना होता है. कुछ सदस्यों का कहना था कि विपक्ष के नेता किसी भी विषय पर बोल सकते हैं. स्पष्ट करना चाहता हूं कि कोई भी नियमों से ऊपर नहीं हैं. सदन नियमों से चलता है और ये नियम मैंने नहीं बनाए हैं. ये नियम मुझे विरासत में मिले हैं. सदन किसी एक व्यक्ति का नहीं है, सभी के लिए है और सभी के लिए नियम समान हैं. प्रधानमंत्री या मंत्री को भी वक्तव्य देना होता है, तो वे भी पहले नोटिस देते हैं. कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है. दस्तावेजों के लिए भी पूर्व अनुमति जरूरी है. सदन की प्रक्रिया लागू करना मेरा दायित्व है और सदन की मर्यादा बनाए रखने के लिए कठोर फैसले लेने पड़ते हैं.
स्वतंत्र भारत के इतिहास में तीसरी बार स्पीकर के खिलाफ अविश्वास के प्रस्ताव पर 12 घंटे चर्चा हुई. सबसे अधिक चर्चा रही, ताकि सभी सदस्यों के विचार, तर्क और चिंताएं सदन के सामने आ सकें. प्रतिपक्ष के सदस्यों ने विपक्ष की आवाज दबाने की बात कही. माननीय सदस्यों ने सदन की गरिमापूर्ण परंपराओं, नियमों और प्रक्रियाओं पर अपने विचार रखे. यह सदन भारत के 140 करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करता हैं. हमेशा प्रयास किया सदन में हर सदस्य नियमों के तहत अपने विचार व्यक्त करे. सभी को पर्याप्त अवसर भी देने का प्रयास मैंने किया. यह सदन समाज के हर व्यक्ति की आवाज बने, ऐसा प्रयास किया. सदन की कार्यवाही में सभी को हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया. मैंने चैंबर में बुलाकर आग्रहपूर्वक अपने क्षेत्र की आवाज सदन में रखें. लोकतंत्र में सहमति-असहमति की महान परंपरा हमेशा रही है.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश में गैस सिलेंडर की शॉर्टेज को लेकर प्रधानमंत्री पर हमला बोला है. राहुल गांधी ने कहा है कि मोदी जी देशवासियों को कह रहे हैं पैनिक मत कीजिए. और खुद ही पैनिक कर रहे है. वो पैनिक है एप्स्टीन फाइल को लेकर,,अडानी केस को लेकर.संसद में आ नही पा रहे. क्योंकि अपने आप पैनिक हैं.
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि इस पर रोक बहुत जरूरी है. रिसर्च से पता चलता है कि बहुत से बच्चे अश्लील कंटेंट देखते हैं. यह सामाजिक सुरक्षा के लिए भी जरूरी है. ऐसे कंटेंट के कारण बच्चे महिलाओं को वस्तु की तरह देखने लग जाते हैं. इस खतरे को कई देशों ने माना है. अमेरिका से ऑस्ट्रेलिया तक, अश्लील कंटेंट वाली साइट्स की जांच और भारी जुर्माने का प्रावधान है. सोशल मीडिया का उपयोग रचनात्मक कार्यों के लिए हो, समाज को नुकसान पहुंचाने के लिए न हो.
लोकसभा में आसन पर ओम बिरला की वापसी हो गई है. गुरुवार को जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, आसन पर ओम बिरला आए. सदन में हंगामा शुरू हो गया, इस पर ओम बिरला ने बोलना शुरू किया. ओम बिरला ने जब बोलना शुरू किया, सदन में सन्नाटा छा गया. हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्य भी शांत हो गए. ओम बिरला ने विपक्ष से प्रश्नकाल चलने देने की अपील की और कहा कि इसे इतना महत्वपूर्ण मानता हूं कि सदन में दो दिन हुई चर्चा पर धन्यवाद भी नहीं कह रहा. 12 बजे बोलूंगा. उन्होंने विपक्ष से पूछा कि क्या आप प्रश्नकाल नहीं चलने देना चाहते. विपक्षी सदस्यों ने कहा कि हम चाहते हैं, सरकार नहीं चाहती. ओम बिरला ने इसके बाद सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी.