खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में एक छोटा सा कोरल द्वीप है. यह ईरान के तेल उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र है। इस छोटे से द्वीप से ईरान का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल निर्यात होता है. यहां कोई तेल कुआं नहीं है, लेकिन बड़े-बड़े तेल टर्मिनल, पाइपलाइन, स्टोरेज टैंक और सुपरटैंकर लोड करने की सुविधाएं हैं.
द्वीप पर 30-34 मिलियन बैरल तेल स्टोर करने की क्षमता है. गहरे पानी के कारण यहां बड़े-बड़े तेल टैंकर आसानी से आ सकते हैं, जबकि ईरान के मुख्य भूमि के तट पर पानी कम गहरा है. खार्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है क्योंकि तेल से मिलने वाला पैसा बहुत जरूरी है. अमेरिका और इजरायल पहले ही यहां सैन्य ठिकानों पर हमले कर चुके हैं, लेकिन तेल सुविधाओं को बचाया गया था.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान युद्ध खत्म करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका से डील नहीं करता, तो खार्ग द्वीप को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वीप को बहुत आसानी से कब्जे में ले सकता है.

ट्रंप का मकसद ईरान पर दबाव बढ़ाना है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर रखा है, जिससे दुनिया के 20 प्रतिशत तेल-गैस का रास्ता प्रभावित हो रहा है. खार्ग द्वीप पर कब्जा या हमला करके ट्रंप ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करना चाहते हैं, ताकि वह बातचीत की शर्तों पर आए.
खार्ग द्वीप पर अमेरिका के विकल्प क्या हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका के पास तीन मुख्य रास्ते हैं - हवाई हमला (एयरबोर्न अटैक), समुद्री हमला (एम्फीबियस ऑपरेशन) या दोनों का मिश्रण. पेंटागन पहले ही पैराट्रूपर्स और मरीन्स को क्षेत्र में भेज रहा है.
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पूर्व सेंटकॉम कमांडर जनरल जोसेफ वोतेल के अनुसार, इतने छोटे द्वीप पर कब्जा करने के लिए 800 से 1000 मरीन्स काफी हो सकते हैं. लेकिन कब्जा करना और उसे बनाए रखना दो अलग बातें हैं. द्वीप ईरानी मुख्य भूमि से सिर्फ 25-30 किलोमीटर दूर है, इसलिए ईरान की मिसाइलें और ड्रोन आसानी से पहुंच सकते हैं.

ईरान ने हाल के हफ्तों में द्वीप पर अतिरिक्त सैनिक, एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल और माइन्स तैनात कर दिए हैं. अगर अमेरिका द्वीप पर कब्जा करता है तो उसे लंबे समय तक वहां सैनिक रखने पड़ सकते हैं, जो बहुत महंगा और खतरनाक होगा.
ईरान की प्रतिक्रिया क्या हो सकती है?
ईरान के लिए खार्ग द्वीप सिर्फ तेल निर्यात का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और आर्थिक अस्तित्व का सवाल है. अगर अमेरिका द्वीप पर हमला या कब्जा करता है तो ईरान की प्रतिक्रिया बहुत तेज हो सकती है. ईरान पहले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर चुका है. ईरान और भी लंबे समय तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रख सकता है.
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फ्लोटिंग माइन्स इस्तेमाल कर सकता है और खाड़ी के अन्य देशों के तेल ठिकानों पर हमला कर सकता है. इससे तेल की कीमतें और बढ़ेंगी, जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगा. ईरान के पास अब भी कुछ अन्य द्वीप और विकल्प हैं, इसलिए खार्ग पर कब्जा पूरी तरह तेल निर्यात रोक नहीं पाएगा.

ट्रंप को इससे क्या फायदा और क्या नुकसान?
ट्रंप का लक्ष्य अभी स्पष्ट नहीं है - क्या वे होर्मुज खुलवाना चाहते हैं, ईरान की सरकार बदलना चाहते हैं या परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर रियायतें लेना चाहते हैं.
खार्ग पर कब्जा या हमला करके ट्रंप ईरान को बातचीत के लिए मजबूर कर सकते हैं. लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह रणनीति उल्टी पड़ सकती है. तेल की कीमतें और बढ़ेंगी. ईरान और ज्यादा आक्रामक हो सकता है. अमेरिकी सैनिकों को भारी नुकसान हो सकता है.
कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि द्वीप पर कब्जा करने के बजाय समुद्र में ब्लॉकेड लगाना ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी विकल्प हो सकता है. खार्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था का दिल है. ट्रंप की धमकी से जंग और बढ़ सकती है. अगर अमेरिका द्वीप पर हमला करता है तो ईरान की प्रतिक्रिया पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर सकती है.