scorecardresearch
 

अमेरिका का बड़ा ऐलान... ईरान के ही हथियार से करेंगे उसपर हमला!

पेंटागन ने ईरान के शाहेद-136 ड्रोन से रिवर्स-इंजीनियर LUCAS कामिकाजे ड्रोन यूनिट टास्क फोर्स स्कॉर्पियन स्ट्राइक तैयार की है, जो $35,000 में सस्ता और स्वार्म हमला कर सकता है. अमेरिका के पास महंगे हथियार सिर्फ 7-10 दिन चलेंगे. जेनेवा टॉक्स में प्रोग्रेस हुई लेकिन कोई डील नहीं. ट्रंप 28 फरवरी को 3 बजे फैसला लेंगे – जंग या समझौता?

Advertisement
X
ईरान के शाहेद ड्रोन की रिवर्स इंजीनियरिंग करके अमेरिका ने लुकास ड्रोन बनाया. अब उसी से हमले की तैयारी है. (Photo: Getty)
ईरान के शाहेद ड्रोन की रिवर्स इंजीनियरिंग करके अमेरिका ने लुकास ड्रोन बनाया. अब उसी से हमले की तैयारी है. (Photo: Getty)

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है. 27 फरवरी 2026 को पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) ने एक बड़ा ऐलान किया – वे ईरान के ही बनाए ड्रोन को कॉपी करके, बेहतर बनाकर ईरान पर इस्तेमाल करेंगे. यह टास्क फोर्स स्कॉर्पियन स्ट्राइक नाम का अमेरिका का पहला कामिकाजे ड्रोन यूनिट है, जो मिडल ईस्ट में तैनात है. अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आदेश दें, तो ईरान पर हमला हो सकता है. 

अमेरिका-ईरान तनाव क्यों?

ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम (परमाणु कार्यक्रम) सालों से विवाद का केंद्र है. अमेरिका और इजरायल का आरोप है कि ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु बम बना रहा है. ट्रंप ने 2025 में सत्ता संभालते ही ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए और कहा – या तो डील करो, या हमले के लिए तैयार रहो.

यह भी पढ़ें: अफगान लड़ाकों का इस्लामाबाद पर ड्रोन अटैक... क्या फिर फेल हो गए चीनी डिफेंस सिस्टम?

फरवरी 2026 में अमेरिका ने मिडल ईस्ट में 500 से ज्यादा लड़ाकू विमान, दो एयरक्राफ्ट कैरियर (USS अब्राहम लिंकन और USS गेराल्ड फोर्ड) और हजारों सैनिक तैनात कर दिए. ईरान ने जवाब में कहा – हमले हुए तो अमेरिकी बेस पर मिसाइल बरसाएंगे.

जेनेवा में बातचीत चल रही है, लेकिन कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ है. ईरान कहता है – हमारा प्रोग्राम शांतिपूर्ण है, जबकि अमेरिका मांग कर रहा है – सभी यूरेनियम अमेरिका को दो, नातांज, फोर्डो और इस्फाहान प्लांट नष्ट करो, और हमेशा के लिए यूरेनियम संवर्धन बंद करो.

Advertisement

Task Force Scorpion Strike

टास्क फोर्स स्कॉर्पियन स्ट्राइक क्या है?

यह अमेरिका का पहला कामिकाजे ड्रोन यूनिट है, जो दिसंबर 2025 में शुरू हुआ. अब मिडल ईस्ट में एक्टिव है.  

  • ड्रोन का नाम: LUCAS (Low-Cost Unmanned Combat Attack System)
  • कहां से आइडिया: ईरान के शाहेद-136 ड्रोन से। रूस ने इसी ड्रोन से यूक्रेन पर हजारों हमले किए. अमेरिका ने एक शाहेद पकड़ा, उसे खोलकर स्टडी किया और बेहतर वर्जन बनाया.  
  • कंपनी: स्पेक्ट्रेवर्क्स (एरिजोना की कंपनी).  
  • कीमत: सिर्फ 35,000 डॉलर (करीब 29 लाख रुपये) प्रति ड्रोन – बहुत सस्ता.

यह भी पढ़ें: आंखें बंद हो जाती हैं... नींद आने लगती है, गर्दन की मसाज में इतना मजा क्यों आता है?

खासियतें... 

  • ऑटोनॉमस (खुद उड़ता है, पायलट की जरूरत नहीं).  
  • GPS-डिनाइड नेविगेशन (GPS जैम होने पर भी काम करता है).  
  • स्वार्मिंग (40 ड्रोन्स का झुंड एक साथ हमला करता है).  
  • एक तरफा हमला – लक्ष्य पर टकराकर फट जाता है.  
  • 40 पाउंड पेलोड (विस्फोटक ले जा सकता है).

यह ड्रोन सॉफ्ट टारगेट्स जैसे मिसाइल साइट्स, सड़कें, फैक्टरियां पर हमला करने के लिए बने हैं. सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के तहत काम करता है.

Task Force Scorpion Strike

क्यों जरूरी है यह ड्रोन? – हथियारों की गणित

पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के पास हाई-टेक हथियार जैसे टोमाहॉक मिसाइल (20 लाख डॉलर यानी करीब 16 करोड़ रुपये प्रति) और JDAM बम (25-40 हजार डॉलर) सिर्फ 7-10 दिन के लिए ही हैं. लंबी जंग में स्टॉक खत्म हो जाएगा.

Advertisement

ईरान भी यह जानता है. इसलिए अमेरिका को सस्ते, ज्यादा संख्या में बनने वाले हथियार चाहिए. LUCAS ड्रोन इसी समस्या का हल है – सस्ता, डिस्पोजेबल (एक बार इस्तेमाल) और घातक. यह 7 दिन की जंग को महीनों तक खींच सकता है. पेंटागन ने कहा – यह यूनिट रेडी टू पार्टिसिपेट है, मतलब हमला प्लान हो रहा है.

यह भी पढ़ें: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जैसलमेर में स्वदेशी ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में उड़ान भरी

जेनेवा टॉक्स क्या हुआ? – गुड प्रोग्रेस लेकिन फार अपार्ट

26 फरवरी 2026 को जिनेवा में तीसरे दौर की बातचीत खत्म हुई. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा – यह सबसे गंभीर और लंबी मीटिंग थी. सुबह 4 घंटे, दोपहर 2 घंटे. अच्छी प्रोग्रेस हुई. लेकिन वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट – दोनों पक्ष के इश्यूज पर बहुत दूर हैं. ईरान यूरेनियम संवर्धन बंद करने, प्लांट नष्ट करने या परमानेंट रेस्ट्रिक्शन मानने को तैयार नहीं.
 
ओमान (मध्यस्थ) ने कहा – सिग्निफिकेंट प्रोग्रेस, लेकिन कोई डील नहीं. अगली टेक्निकल मीटिंग विएना में अगले हफ्ते होगी. दोनों बातें सही हैं – माहौल बेहतर हुआ है लेकिन असली मुद्दों पर कोई समझौता नहीं. यह गैप ही जंग की शुरुआत हो सकती है. 

Task Force Scorpion Strike

ट्रंप का फैसला – घड़ी टिक-टिक कर रही

Advertisement

अगर फैसला मार्केट बंद होने के बाद आया, तो दुनिया को वीकेंड में सोचने का समय मिलेगा. पहले आया, तो संस्थाओं को 1 घंटा मिलेगा पोजिशन बदलने का. यह मार्केट-मूविंग ऐलान का तरीका है – शॉक से बचाने के लिए. 19 फरवरी को ट्रंप ने 10-15 दिन का डेडलाइन दिया था – अब समय खत्म हो रहा है.

क्या होगा आगे? – जंग या डील?

अगर डील नहीं हुई, तो अमेरिका LUCAS ड्रोन्स से ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमला कर सकता है. ईरान ने शाहेद बनाया था दुश्मनों को डराने के लिए, अब अमेरिका उसी को अपग्रेड करके इस्तेमाल करेगा. लेकिन जंग से दोनों को नुकसान – तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, मिडल ईस्ट अस्थिर हो सकता है.

विशेषज्ञ कहते हैं – यह ड्रोन यूनिट अमेरिका की नई रणनीति है. सस्ते हथियारों से लंबी जंग लड़ना. लेकिन डिप्लोमेसी अभी जिंदा है. ईरान का हथियार अमेरिका ने चुराया, बेहतर बनाया और अब उसी से धमकी दे रहा है. जेनेवा में प्रोग्रेस है, लेकिन डिफरेंस ज्यादा. ट्रंप का फैसला कल आएगा – जंग या शांति? 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement