हाल के हफ्तों में पाकिस्तान JF-17 थंडर फाइटर जेट को लेकर जोर-शोर से प्रचार कर रहा है. दावा किया जा रहा है कि यह स्वदेशी जेट दुनिया भर में बहुत डिमांड में है. कई देश इसे खरीदने वाले हैं. लेकिन हकीकत में यह ज्यादातर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स तक ही सीमित है.
असल हवाई युद्ध और एयरस्पेस में नहीं. पाकिस्तान इसे अपनी रक्षा ताकत दिखाने और ऑपरेशन सिंदूर में कथित जीत का प्रचार करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है, हालांकि ऑपरेशन में मुख्य रूप से चीनी J-10C जेट शामिल थे, JF-17 नहीं.
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JF-17 क्या है?
JF-17 थंडर एक हल्का मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जिसे पाकिस्तान और चीन ने मिलकर बनाया है. पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC) में इसका उत्पादन होता है. यह सस्ता माना जाता है, लेकिन रूसी इंजन (RD-93) और चीनी एवियोनिक्स पर निर्भर है. पाकिस्तान साल में 20-25 जेट बना पाता है.
2026 में क्या दावे किए जा रहे हैं?
2026 की शुरुआत से रॉयटर्स के पाकिस्तान में पत्रकार साद सईद ने कई रिपोर्ट्स प्रकाशित कीं. इनमें कहा गया कि JF-17 को बांग्लादेश, सूडान, इंडोनेशिया और सऊदी अरब जैसे देश खरीदने वाले हैं.

ये रिपोर्ट्स ज्यादातर अनाम सूत्रों पर आधारित हैं. कोई ठोस कॉन्ट्रैक्ट, डिलीवरी टाइमलाइन या आधिकारिक घोषणा नहीं. कई पाकिस्तानी खुद इन दावों को उथला और फार्सिकल बता रहे हैं.
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Nearly a month on from 17 Dec scoop—‘Field Marshal Asim Munir is expected to fly to Washington… for a third meeting [with Trump] in six months’—the diary remains stubbornly blank.
— Javed Hassan (@javedhassan)
One begins to detect a pattern: the same agency that floated the ‘Trump to Islamabad’…
JF-17 की असली निर्यात स्थिति क्या है?
अब तक सिर्फ दो विदेशी ग्राहक हैं...
ये समस्याएं JF-17 की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं. पाकिस्तान के पास मजबूत इंडस्ट्रियल बेस नहीं है – चीनी पार्ट्स और रूसी इंजन पर निर्भरता ज्यादा है.

क्यों हो रहा है यह प्रचार?
पाकिस्तान की सरकार और मिलिट्री इसे डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पावर दिखाने के लिए इस्तेमाल कर रही है. 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष (ऑपरेशन सिंदूर) में JF-17 को बैटल-प्रूवन बताकर प्रचार किया जा रहा है, जबकि मुख्य भूमिका J-10C की थी. सोशल मीडिया पर नैरेटिव वॉरफेयर चल रहा है, जहां हकीकत से ज्यादा दावे किए जा रहे हैं.
JF-17 एक उपयोगी जेट हो सकता है, लेकिन इसका निर्यात अभी बहुत सीमित है. 2026 की रिपोर्ट्स ज्यादातर बातचीत या अटकलों पर आधारित हैं, कोई बड़ा ऑर्डर बुक नहीं दिखता. पाकिस्तान के ये सपने सिर्फ न्यूज साइकिल जीत सकते हैं, लेकिन मजबूत डिफेंस इकोसिस्टम नहीं बना सकते. रिपोर्टः अतिशय जैन