scorecardresearch
 

तेजस Mk1A की डिलीवरी में देरी पर भड़का रक्षा मंत्रालय, HAL पर लग सकता है भारी जुर्माना

सरकार तेजस Mk1A फाइटर जेट्स की डिलीवरी में देरी पर HAL पर जुर्माना लगाने की तैयारी में है. विमान के इंजन आ चुके हैं. 18 एयरफ्रेम भी तैयार हैं, फिर भी वायुसेना को पहला विमान नहीं मिला है.

Advertisement
X
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की फैक्ट्री में बनता तेजस फाइटर जेट. (File Photo: ITG)
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की फैक्ट्री में बनता तेजस फाइटर जेट. (File Photo: ITG)

रक्षा मंत्रालय स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस Mk1A (Tejas Mk1A) की डिलीवरी में हो रही लगातार देरी को लेकर सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पर भारी जुर्माना लगाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. 

शीर्ष रक्षा सूत्रों के अनुसार, बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद HAL द्वारा भारतीय वायुसेना को एक भी नया अपग्रेड फाइटर जेट नहीं सौंपे जाने पर मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया है. यह संवेदनशील मामला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रमुखता से उठा, जिसके बाद रक्षा क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है.

यह भी पढ़ें: ईरानी हमले का बदला लेने से इजरायल को क्यों रोकना चाहते हैं ट्रंप? 5 पॉइंट्स में समझें रणनीति

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय वायुसेना अपने लड़ाकू विमानों के स्क्वॉड्रनों की घटती संख्या से जूझ रही है. पुरानी पड़ चुकी प्रणालियों को बदलने के लिए स्वदेशी लड़ाकू विमानों की त्वरित इंडक्शन की उम्मीद लगाए बैठी है. रक्षा मंत्रालय की यह नाराजगी दिखाती है कि अब सैन्य तैयारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े समझौतों में ढिलाई को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.  

Advertisement

इंजन आ गए, एयरफ्रेम तैयार; फिर क्यों खाली हाथ है वायुसेना?

इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली और विरोधाभासी बात यह है कि विमान के निर्माण के लिए जरूरी बुनियादी सामान पूरी तरह उपलब्ध है. अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) द्वारा भेजे गए छह GE-F404 इंजन पहले ही HAL को मिल चुके हैं. इंजन की कमी को अक्सर इस देरी के पीछे का एक बड़ा कारण बताया जा रहा था, लेकिन अब वह समस्या भी काफी हद तक सुलझ चुकी है.

Tejas Mk1A Delivery Delay

एचएएल की प्रोडक्शन लाइन पर लगभग 18 तेजस Mk1A के एयरफ्रेम पूरी तरह बनकर तैयार खड़े हैं. एक शीर्ष रक्षा सूत्र ने स्थिति की गंभीरता को बयां करते हुए सीधे शब्दों में कहा कि इंजन आ चुके हैं. एयरफ्रेम भी तैयार हैं, लेकिन इसके बावजूद पहला तेजस Mk1A लड़ाकू विमान अभी तक वायुसेना को डिलीवर नहीं किया जा सका है. 

यह कड़वा सच इस बात की ओर इशारा करता है कि देरी के पीछे कोई बाहरी कारण नहीं, बल्कि HAL के भीतर की तकनीकी कड़ियां या अंतिम असेंबली और परीक्षण की प्रक्रियाएं जिम्मेदार हैं.

यह भी पढ़ें: आ रहा है सदी का सबसे खौफनाक 'सुपर अल-नीनो', साथ ला रहा क्लाइमेट बम

वायुसेना की घटती ताकत और तेजस Mk1A की रणनीतिक अहमियत

Advertisement

भारतीय वायुसेना के लिए तेजस Mk1A सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि उसकी रीढ़ की हड्डी बनने वाला प्लेटफार्म है. वर्तमान में वायुसेना के पास स्वीकृत 42 स्क्वॉड्रनों के मुकाबले लड़ाकू विमानों की संख्या घटकर करीब 30-31 स्क्वॉड्रनों पर आ गई है. ऐसे में मिग-21 जैसे पुराने सोवियत दौर के विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के बाद पैदा हुए शून्य को भरने के लिए तेजस का समय पर आना बेहद जरूरी है.

वायुसेना इस समय लगभग 40 शुरुआती तेजस (Mk1) विमानों का संचालन कर रही है. देश की हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए सरकार ने एचएएल को 83 उन्नत तेजस Mk1A विमानों का एक बड़ा ऑर्डर दिया हुआ है. तेजस Mk1A अपने पुराने वेरिएंट की तुलना में कहीं अधिक घातक है. 

Tejas Mk1A Delivery Delay

इसमें एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक स्कैन्ड एरे (AESA) रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) सुइट, एडवांस एवियोनिक्स और हवा में ही ईंधन भरने जैसी अत्याधुनिक क्षमताएं जोड़ी गई हैं. यही वजह है कि इसमें हो रही देरी सीधे तौर पर देश की सैन्य तैयारियों को प्रभावित कर रही है, जिससे रक्षा मंत्रालय का चिंतित होना लाजिमी है.

क्या होगा आगे का रास्ता?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा बुलाई गई सोमवार की बैठक में एचएएल के प्रदर्शन और वादों की समीक्षा की गई. सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय इस बात से खासा नाराज है कि कंपनी ने समय सीमा को लेकर पहले कई बार लिखित और मौखिक आश्वासन दिए थे, लेकिन जमीन पर एक भी विमान डिलीवर नहीं हुआ. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: ईरान और इजरायल के बीच बैलिस्टिक वॉर... जानिए दोनों के पास कौन-कौन सी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं

रक्षा खरीद समझौतों के नियमों के तहत, यदि कोई कंपनी तय समय सीमा के भीतर सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति करने में विफल रहती है, तो उस पर 'लिक्विडेटेड डैमेजेस' यानी वित्तीय जुर्माना लगाने का प्रावधान है.

रक्षा मंत्रालय अब इसी क्लॉज को लागू करने पर विचार कर रहा है ताकि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में जवाबदेही तय की जा सके. जानकारों का मानना है कि इस कड़े कदम के जरिए सरकार न केवल एचएएल को अपनी कार्यप्रणाली में तेजी लाने का कड़ा संदेश दे रही है. 

अब देखना यह होगा कि इस प्रशासनिक हंटर के बाद एचएएल अपनी कमियों को कितनी जल्दी सुधारता है. पहला तेजस Mk1A कब भारतीय आसमान में वायुसेना के पायलटों के साथ उड़ान भरता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement