USA-Iran war. US-Israel-Iran War LIVE News & Latest Updates: ईरान-अमेरिका के बीच फेल हुए पहले दौर की वार्ता के बाद युद्ध का कूटनीतिक हल खोजने की कोशिशें जारी हैं. इसी बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने शांति वार्ता को लेकर बड़ी जानकारी दी है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि हमने (ईरान) पाकिस्तान को अपना 10 सूत्रीय प्रस्ताव सौंप दिया. इसके साथ ही ईरान ने अमेरिका पर कूटनीतिक बातचीत को लेकर गंभीर न होने और सीजफायर के उल्लंघन का आरोप लगाया है.
इससे पहले ईरानी विदेश मंत्री ने इस्लामाबाद शांति वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया था. वहीं, रविवार सुबह अमेरिकी नेवी ने ईरानी झंडे वाले एक कार्गो जहाज को अपने कब्जे में ले लिया था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ये जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी को पार करने की कोशिश कर कहा था, जबकि ईरान ने बोट ड्रोन से अमेरिकी नेवी पर पलटवार का दावा किया है.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं पर आरोप लगाया है कि वो ईरान के खिलाफ अमेरिका की मजबूत स्थिति को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि उन पर समझौता करने का कोई दबाव नहीं है और वो किसी जल्दबाजी में कोई खराब डील नहीं करेंगे. उन्होंने पिछले ऐतिहासिक युद्धों का उदाहरण देते हुए कहा कि सैन्य नजरिए से ईरान के खिलाफ सफलता उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज रही है. ट्रंप ने कहा कि वो पिछले 47 सालों की समस्याओं को ठीक कर रहे हैं, जिन्हें पिछले राष्ट्रपतियों ने नजरअंदाज किया था. उन्होंने इस पूरे अभियान की तुलना वेनेजुएला के सफल ऑपरेशन से करते हुए कहा कि वे अपनी सैन्य शक्ति का इस्तेमाल उन समस्याओं को सुलझाने के लिए कर रहे हैं, जिन्हें दूसरे लोग नहीं सुलझा सके.
इजरायली सेना ने हिज्बुल्लाह पर सीजफायर का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है. IDF के मुताबिक, बिंत जुबैल और लितानी इलाके में तीन अलग-अलग घटनाओं में कुछ हथियारबंद लोग प्रतिबंधित क्षेत्र में घुस आए और सैनिकों के पास पहुंचकर खतरा पैदा करने लगे. सेना का कहना है कि इस खतरे को देखते हुए उन लोगों पर कार्रवाई की गई और उन्हें मार दिया गया.
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान में इजरायल का काम अभी खत्म नहीं हुआ है. यरूशलेम में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ये बात कही. उनका ये बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ जारी दो हफ्तों का सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि इजरायल ने उन्हें ईरान के साथ युद्ध के लिए उकसाया है. ट्रंप ने कहा कि 7 अक्टूबर के हमलों के नतीजों और उनके इस पुराने विचार ने उन्हें इस युद्ध के लिए प्रेरित किया कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए. उन्होंने मीडिया और चुनावी सर्वेक्षणों को 'फर्जी' बताते हुए दावा किया कि 2020 के अमेरिकी चुनाव की तरह ये भी धांधली से भरे हैं. ट्रंप ने भविष्यवाणी की कि ईरान में 'सत्ता परिवर्तन' के नतीजे शानदार होंगे और अगर ईरान के नए नेता समझदार हुए, तो देश का भविष्य बहुत समृद्ध और उज्ज्वल हो सकता है.
इजरायल और लेबनान के प्रतिनिधि गुरुवार, 23 अप्रैल को वाशिंगटन में अहम वार्ता करेंगे. इस बैठक में इजरायल का पक्ष अमेरिका में उनके राजदूत लीटर रखेंगे. इसी बीच, लेबनानी संसद के अध्यक्ष नबीह बेरी ने 'अशरक अल-अवसत' अखबार को बताया कि अमेरिका दोनों देशों के बीच जारी सीजफायर की अवधि को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ईरानी दूतावास का दौरा किया और राजदूत रजा अमीरी मोघद्दाम से मुलाकात की. उन्होंने अमेरिका के साथ वार्ता के दूसरे दौर के लिए संभावित व्यवस्थाओं और तनाव कम करने के लिए स्थायी राजनयिक समाधान पर चर्चा की.
रूस में ईरान के राजदूत काजेम जलाली ने कहा है कि हाल ही में शुरू हुए युद्ध में रूस, ईरान को किसी भी तरह की सैन्य सहायता नहीं देगा. इसका सीधा मतलब ये है कि ईरान को इस संघर्ष में रूस की सेना या हथियारों का साथ नहीं मिलने वाला है.
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिण लेबनान में इजरायली सैनिक के ईसा मसीह की मूर्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना की निंदा की है. उन्होंने इस पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि ये इजरायल के आपसी सम्मान के मूल्यों के खिलाफ है. नेतन्याहू ने बताया है कि इस मामले की आपराधिक जांच शुरू कर दी गई है और दोषी सैनिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने ये भी कहा कि जहां पूरे मिडिल-ईस्ट में ईसाई आबादी घट रही है, वहीं इजरायल एकमात्र ऐसा देश है जहां ईसाई सुरक्षित हैं और उनकी संख्या बढ़ रही है. उन्होंने इस घटना की वजह से दुनिया भर के ईसाई समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचने पर अफसोस जाहिर किया.

शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरने वाला जहाजों की आवाजाही सोमवार को भी पूरी तरह थमा हुई है. इस ठहराव के बीच, सिर्फ एक तेल उत्पाद टैंकर खाड़ी से बाहर निकलता हुआ देखा गया. इसी दौरान दो टैंकर खाड़ी के अंदर दाखिल हुए. इनमें से एक एलपीजी टैंकर है और दूसरा केमिकल टैंकर है.
अमेरिकी-ईरान के बीच अस्थायी सीजफायर और शांति वार्ता को लेकर पाकिस्तान के शक्तिशाली सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में हैं. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बढ़ती नजदीकियों और ईरान की खुफिया एजेंसियों के साथ पुराने रिश्तों का इस्तेमाल कर वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत का रास्ता तैयार किया है. बताया जा रहा है कि मुनीर वर्तमान में अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और फारस की खाड़ी में नौसैनिक नाकाबंदी को लेकर चल रही बातचीत में एक अनौपचारिक 'बैक चैनल' के रूप में काम कर रहे हैं. हालांकि, मुनीर की ये दोहरी भूमिका अमेरिकी विशेषज्ञों के बीच संदेह भी पैदा कर रही है. यहां पढ़ें पूरी खबर...
ईरान-अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई हैं. इसी बीच ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि हमने पाकिस्तान को 10 सूत्रीय प्रस्ताव सौंप दिया है.
उन्होंने कहा कि हम अमेरिकी पक्ष पर कभी भरोसा नहीं करते क्योंकि उसने लंबे समय से कूटनीति के साथ विश्वासघात किया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जो कुछ भी हो रहा है, वह अमेरिकी-इजरायली हमलों का असर है. विरोधी पक्ष लगातार अपनी स्थिति बदलता रहता है और मीडिया में विरोधाभासी बयान जारी करता है.
उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते में व्यावहारिक गारंटी शामिल होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि 2 हफ्ते के लिए हुए सीजफायर में अमेरिकी पक्ष ने लेबनान में सीजफायर को स्वीकार करने के बावजूद अपने वादे को तोड़ दिया है. समझौते के एक हिस्से में लेबनान में सीजफायर शामिल था और हमने इसी आधार पर होर्मुज जलडमरूमध्य खोला. अमेरिकी-इजरायली हमलों से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य सुरक्षित था.
उन्होंने अमेरिका पक्ष पर कूटनीति रास्तों पर न चलने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली बातचीत में तेहरान को अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों को हटाने के संबंध में कोई ठोस प्रस्ताव नहीं मिला है. अमेरिका और इजरायल द्वार होर्मुज की सुरक्षा को खतरे में डालने के संबंध में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए.
ओमान की खाड़ी में ईरान के कार्गो जहाज को अमेरिका द्वारा कब्जे में लिए चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है. चीन ने अमेरिका का बिना नाम लिए अपने बयान में कहा कि हमने जहाज को जबरन रोके जाने पर चिंता व्यक्त की है. हम उम्मीद करते हैं कि संबंधित पक्ष सीजफायर समझौते का पालन करते हुए जिम्मेदारी से काम करेंगे. चीन ने वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा वक्त में स्थिति नाजुक बनी हुई है और चीनी पक्ष रचनात्मक भूमिका निभाएगा.
अमेरिकी नेवी ने 19 अप्रैल को अरब सागर में एक बड़ा कदम उठाया. गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर यूएसएस स्प्रूएंस (DDG 111) ने ईरानी झंडे वाले कार्गो जहाज एमवी तूस्का को रोक लिया. यह जहाज 27 km/hr की गति से ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट की तरफ जा रहा था. अमेरिकी बलों ने कई बार चेतावनी दी कि यह जहाज यूएस ब्लॉकेड तोड़ रहा है. छह घंटे तक चेतावनी देने के बाद भी क्रू ने नहीं माना तो स्प्रूएंस ने जहाज के इंजन रूम को खाली करवाया. यहां पढ़ें पूरी खबर...
अमेरिकी-इजरायल बमबारी में ईरान के कई इलाके पूरी तरह तबाह हो गए हैं. इसी बीच ईरान के फॉरेंसिक मेडिसिन संगठन के प्रमुख ने बताया कि युद्ध में मरने वालों की संख्या अब कम से कम 3375 हो गई है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने ईरान और अमेरिका के बीच सुलह कराने की जो कोशिश की थी, उसे बड़ा झटका लगा है. दरअसल, इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता का दूसरा दौर शुरू होने से पहले ही फेल हो गया. दरअसल, मुनीर-शहबाज की जोड़ी इस वैश्विक मसले को सुलझाने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं और उनकी कोशिश एक वैश्विक पीसमेकर बनने की है. यहां पढ़ें पूरी खबर...
आर्थिक तंगहाली से जूझ रहा पाकिस्तान एक बार फिर अपने पुराने कूटनीतिक पैंतरे पर लौट आया है. शहबाज सरकार को पूरी उम्मीद है कि मिडिल ईस्ट में चल रही शांति वार्ता की मेजबानी करने के बदले अमेरिका उसे मोटा 'इनाम' यानी भारी-भरकम वित्तीय मदद देगा. पाकिस्तान का इतिहास गवाह है कि उसने अपनी जमीन और भूगोल का इस्तेमाल हमेशा सौदेबाजी के लिए किया है. ठीक वैसे ही जैसे 1980 के दशक और फिर 2000 की शुरुआत में उसे अमेरिका से अरबों डॉलर मिले थे, इस बार भी पाकिस्तान वैसी ही बड़ी फंडिंग की आस लगाए बैठा है. लेकिन मौजूदा हालात में उसकी ये 'किरायेदारी' चल पाना मुश्किल लग रहा है. यहां पढ़ें पूरी खबर...
मिस्र में ईरान के हितों के प्रतिनिधि कार्यालय के अध्यक्ष मोजतबा फर्दोसीपूर ने एक समाचार एजेंसी को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से वार्ता में रियायतें हासिल करने के लिए मनगढ़ंत (इमेजिनरी) जीत का प्रचार कर रहे हैं, लेकिन उनके दावे सही नहीं हैं. उन्होंने कहा, 'हम संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को या दुनिया के किसी भी अन्य देश को नहीं सौंपेंगे. ईरान ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है.'
फर्दोसीपूर ने आगे कहा कि होर्मुज में बढ़ते तनाव के लिए पूरी तरह अमेरिका जिम्मेदार है. उन्होंने कहा, 'युद्ध से पहले ये स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह खुला था. इस जलमार्ग की वर्तमान स्थिति अमेरिका की कार्रवाइयों का नतीजा है.'
ईरानी अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा, 'हम सिर्फ वार्ता करने के लिए वार्ता नहीं कर रहे हैं. हमारी सभी मांगें पूरी होनी चाहिए.'
शिपिंग एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 20 से ज्यादा जहाज गुजरे जो एक मार्च के बाद इस महत्वपूर्ण रणनीतिक जलमार्ग को पार करने वाले जहाजों की सबसे ज्यादा संख्या है.
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल माजिद मूसावी ने कहा है कि उनकी सेनाएं मिसाइल और ड्रोन के भंडार को तेजी से फिर से भर रही हैं और सीजफायर की अवधि के दौरान परिचालन तैयारियों को और मजबूत कर रही हैं.
IRGC एयरोस्पेस फोर्स कमांडर ने मिसाइल और ड्रोन स्टॉक के रखरखाव तथा पुनर्निर्माण का फुटेज पोस्ट करते हुए कहा कि युद्धविराम की इस अवधि में मिसाइल और ड्रोन लॉन्च प्लेटफॉर्म को फिर से भरने की गति युद्ध से पहले के स्तर से भी ज्यादा तेज हो गई है.
जनरल मूसावी ने कहा, 'युद्धविराम की अवधि के दौरान, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च प्लेटफॉर्म को अपडेट करने और फिर से भरने की हमारी गति युद्ध से पहले की तुलना में भी कहीं ज्यादा है. हमारे पास जानकारी है कि दुश्मन खुद के लिए ऐसी स्थितियां पैदा करने में असमर्थ है और उसे दुनिया के दूसरी तरफ से बूंद-बूंद करके गोला-बारूद लाना पड़ रहा है.'
अमेरिकी और इजरायली दुश्मनों के खिलाफ आक्रामक युद्ध में उनकी हार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'वो इस चरण के युद्ध में भी हार चुके हैं! उन्होंने महत्वपूर्ण रणनीतिक जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खो दिया है, उन्होंने लेबनान और पूरे इलाके को भी खो दिया है.'
यूरोपीय देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि जल्दबाजी में किया गया कोई भी समझौता भविष्य में उल्टा पड़ सकता है. डिप्लोमेट्स ने चेतावनी दी है कि यूरेनियम एनरिचमेंट और प्रतिबंधों में छूट से जुड़े तकनीकी विवाद अभी भी अनसुलझे हैं. ईरान गारंटी चाहता है और यूरोप इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की मांग कर रहा है. यहां पढ़ें पूरी खबर...
अमेरिका-ईरान एक बार फिर से आमने-सामने आ गए हैं. दोनों के बीच होने वाली दूसरे दौर की शांति वार्ता अपनी शुरुआत से पहले ही विफल नजर आ रही है. होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है और अमेरिका जहां अपने नाकेबंदी को पार करने की कोशिश कर रहे ईरानी जहाजों को कब्जे में ले रहा है, तो ईरान की ओर से अमेरिकी नेवी पर ड्रोन अटैक किए जाने की खबरें आ रही हैं. जंग और टेंशन फिर से बढ़ने का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला है. ब्रेंट क्रूड की कीमतें करीब 6 फीसदी से ज्यादा उछल गई, तो WTI Crude में भी करीब 7 फीसदी की तेजी आई है. यहां पढ़ें पूरी खबर...
तेहरान के साथ बातचीत का पूर्व अनुभव रखने वाले राजनयिकों का कहना है कि यूरोपीय सहयोगी देशों को डर है कि अमेरिका की अनुभवहीन वार्ताकार टीम ईरान के साथ जल्दबाजी में, सुर्खियां बटोरने वाले एक ढांचागत समझौते पर हस्ताक्षर करने की कोशिश कर रही है जो गहरी समस्याओं को सुलझाने के बजाय और भी जटिल बना सकता है.
उन्हें चिंता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक राजनयिक जीत का दावा करने के लिए उत्सुक वाशिंगटन, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में राहत पर एक सतही समझौते पर हस्ताक्षर कर सकता है और फिर तकनीकी रूप से जटिल वार्ताओं में महीनों या सालों तक संघर्ष करना पड़ सकता है.
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने बताया कि अमेरिकी सैनिकों द्वारा एक ईरानी कार्गो जहाज पर गोलीबारी करके उसे जब्त करने के बाद, ईरानी सेना ने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाकर ड्रोन हमले किए. हालांकि, रिपोर्ट में हमलों के पैमाने, तैनात ड्रोनों की संख्या या अमेरिकी संपत्तियों को हुए किसी नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है. इन हमलों से इलाके में नाजुक सीजफायर के बीच तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव में और ज्यादा बढ़ गया है.
ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नाकेबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा ईरानी झंडे वाले कार्गो जहाज को कब्जे में लिए जाने की घटना पर पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक नौसैनिक नाकाबंदी रहेगी, तब तक मतभेद बने रहेंगे.
उन्होंने एक्स पर पोस्ट साझा कर लिखा, 'आप अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते नहीं रह सकते, नाकाबंदी को और सख्त नहीं कर सकते, ईरान को और युद्ध अपराधों की धमकी नहीं दे सकते, अनुचित मांगों पर अड़े नहीं रह सकते, बयानबाजी से काम नहीं चला सकते और 'कूटनीति' का दिखावा नहीं कर सकते. जब तक नौसैनिक नाकाबंदी रहेगी, तब तक मतभेद बने रहेंगे.'
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका-ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर से उछाल आ गया है. रविवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई. शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज में कारोबार फिर से शुरू होने के बाद अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 6.4% बढ़कर 87.88 डॉलर प्रति बैरल हो गईं. अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.5% बढ़कर 96.25 डॉलर प्रति बैरल हो गई. रविवार की शुरुआती बढ़त ने शुक्रवार को हुई गिरावट के एक हिस्से की भरपाई कर दी, जब ईरान के विदेश मंत्री द्वारा वाणिज्यिक टैंकरों के लिए होर्मुज को फिर से खोलने की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 9% से अधिक की गिरावट आई थी.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी के बीच अमेरिकी नेवी ने ईरानी झंडे वाले कार्गो (मालवाहक जहाज) को अपने कब्जे में लिया है. इस कार्गो ने होर्मुज के पास अमेरिकी नौसैनिक की नाकेबंदी को पार करने की कोशिश की थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में दावा किया कि ईरान झंडे लगे इस कार्गो का नाम TOUSKA है. इस जहाज को ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के विध्वंसक यूएसएस स्प्रूएंस ने इंटरसेप्ट किया. यह जहाज नाकेबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा था. ...और यह उनके (ईरान) लिए अच्छा नहीं रहा. यहां पढ़ें पूरी खबर...