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क्या 'डर्टी बम' बना सकता है ईरान? आसान भाषा में समझिए पूरा मामला

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का पांचवां दिन है. यूएस और इजरायल के हमलों का ईरान लगातार जवाब दे रहा है और मिडिल ईस्ट में बने अमेरिका बेस को लगातार निशाना बना रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि युरेनियम की मौजूदा सामग्री से क्या ईरान डर्टी बम बना सकता है?

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इस तस्वीर में डर्टी बम को डिफाइन किया गया. ये बम न्यूक्लियर कचरे से भी बन जाता है. (Photo: ITG)
इस तस्वीर में डर्टी बम को डिफाइन किया गया. ये बम न्यूक्लियर कचरे से भी बन जाता है. (Photo: ITG)

माना जाता है कि ईरान के पास करीब 440 किलोग्राम अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम है, जो लगभग 60 प्रतिशत तक संवर्धित है. परमाणु हथियार बनाने के लिए यूरेनियम को लगभग 90 प्रतिशत तक संवर्धित करना पड़ता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ईरान इस मौजूदा सामग्री से डर्टी बम बना सकता है?

डर्टी बम क्या होता है?

डर्टी बम को रेडियोलॉजिकल डिस्पर्सल डिवाइस (RDD) कहा जाता है. यह परमाणु बम नहीं होता और इसमें कोई परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया या विखंडन (fission) नहीं होता. यह एक ऐसा उपकरण है जिसमें साधारण विस्फोटक (जैसे डायनामाइट या अन्य पारंपरिक बम) को रेडियोधर्मी पदार्थ के साथ मिलाया जाता है. इसका उद्देश्य परमाणु धमाका करना नहीं, बल्कि किसी इलाके में रेडियोधर्मी प्रदूषण फैलाना होता है.

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डर्टी बम में इस्तेमाल होने वाला रेडियोधर्मी पदार्थ कई स्रोतों से मिल सकता है, जैसे चिकित्सा उपकरणों से (उदाहरण: कैंसर उपचार में इस्तेमाल होने वाला सीज़ियम-137), औद्योगिक उपकरणों से (जैसे कोबाल्ट-60), अनुसंधान संस्थानों से या किसी देश के पास मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम.

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काम कैसे करता है?

रेडियोधर्मी पदार्थ को विस्फोटक के चारों ओर पैक किया जाता है. इसे ड्रोन, वाहन या यहां तक कि बैलिस्टिक मिसाइल से भी ले जाया जा सकता है. लक्ष्य से टकराने पर विस्फोटक जोरदार धमाका करता है. धमाके की शॉकवेव, गर्मी और दबाव से रेडियोधर्मी पदार्थ धूल और महीन कणों में टूटकर हवा में फैल जाता है. ये कण आसपास के इलाके आमतौर पर कुछ शहरी ब्लॉकों के भीतर जमीन पर गिर जाते हैं. इससे जमीन, इमारतें, वाहन, लोग, हवा (सांस के जरिए) और संभवतः पानी व भोजन भी दूषित हो सकते हैं.

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Dirty Bomb Iran

इसमें न तो परमाणु विस्फोट होता है और न ही मशरूम क्लाउड जैसा दृश्य होता है. यह परमाणु बम की तरह भारी तबाही नहीं मचाता. इसका मकसद सामूहिक हत्या से ज्यादा दहशत, अफरातफरी और आर्थिक नुकसान पहुंचाना होता है. इसे “एरिया डिनायल वेपन” भी कहा जाता है, यानी ऐसा हथियार जो किसी इलाके को लंबे समय तक इस्तेमाल के लायक न रहने दे. अब तक किसी भी देश या गैर-राज्य संगठन ने युद्ध में डर्टी बम का इस्तेमाल नहीं किया है. यह अवधारणा लंबे समय से मौजूद है, लेकिन व्यवहार में इसका उपयोग नहीं हुआ.

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क्या ईरान हथियार बना सकता है?

तकनीकी दृष्टि से देखें तो डर्टी बम बनाना परमाणु बम की तुलना में काफी आसान है. इसके लिए जटिल परमाणु डिजाइन की जरूरत नहीं होती. अगर किसी देश के पास रेडियोधर्मी सामग्री, विस्फोटक तकनीक और वैज्ञानिक विशेषज्ञता है तो वह सैद्धांतिक रूप से ऐसा उपकरण तैयार कर सकता है. ईरान के पास परमाणु कार्यक्रम, वैज्ञानिक ढांचा और विस्फोटक विशेषज्ञता मौजूद है, इसलिए संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता.

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क्या ईरान इसका इस्तेमाल करेगा?

विश्लेषकों का मानना है कि इसकी संभावना बेहद कम है. ऐसा कदम उठाने का मतलब होगा अमेरिका और इज़राइल जैसे परमाणु शक्ति संपन्न देशों को सीधे चुनौती देना. इससे गंभीर सैन्य टकराव और संभवतः भारी जवाबी कार्रवाई हो सकती है. किसी भी देश के लिए ऐसा जोखिम उठाना बेहद बड़ा और खतरनाक फैसला होगा.

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