उत्तरी अरब सागर में 15 सितंबर 2026 को शाम करीब 7 बजकर 10 मिनट पर भारत और पाकिस्तान की नौसेना इकाइयों के बीच टक्कर हो गई. पाकिस्तान नौसेना का जहाज पीएनएस हुनैन तेज रफ्तार से और असुरक्षित तरीके से भारतीय नौसेना के कोलकाता क्लास डेस्ट्रॉयर से टकरा गया. भारतीय जहाज नियमित गश्त और तैनाती पर था.
यह ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा यानी ऑप ऊर्जा सुरक्षा के तहत व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए चल रहा था. पाकिस्तान उसी समय सी स्पार्क नाम का समुद्री अभ्यास कर रहा था जो 8 से 16 सितंबर तक चल रहा था. पाकिस्तानी जहाज ने भारतीय अभियान में दखल देने की कोशिश की. इससे हेलिकॉप्टर संचालन खतरे में पड़ गया. दूरी खतरनाक रूप से कम हो गई.
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टक्कर हुई लेकिन भारतीय युद्धपोत को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ. भारत ने इसे गैर-पेशेवर और अस्वीकार्य आचरण बताया. पाकिस्तान के चार्ज द अफेयर्स को विदेश मंत्रालय बुलाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया. यह 1991 के समझौते की धारा 10 का उल्लंघन माना गया जिसमें मिलिट्री यूनिट्स को सावधानी बरतने और सुरक्षित दूरी रखने की बात कही गई है.
ब्रह्मोस, बराक मिसाइलों से लैस युद्धपोत से टक्कर
कोलकाता क्लास डेस्ट्रॉयर भारतीय नौसेना का आधुनिक स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर है. इसका डिस्प्लेसमेंट करीब 7400 टन है. लंबाई 163 मीटर, चौड़ाई 17.4 मीटर और ड्राफ्ट 6.5 मीटर है. यह 55.56 km/hr स्पीड हासिल कर सकता है. 33 km/hr की स्पीड से चले तो यह 11 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है. इसमें कुल मिलाकर करीब 300 क्रू आते हैं.

इसमें शक्तिशाली हथियार हैं. 16 ब्रह्मोस मिसाइल और लैंड अटैक मिसाइल, 32 बराक-8 मिसाइल, 76 मिमी गन, चार एके-630 CIWS, टॉरपीडो ट्यूब और आरबीयू-6000 एंटी-सबमरीन रॉकेट हैं. दो हेलिकॉप्टर भी ले जा सकता है. रडार और सेंसर बहुत एडवांस हैं. यह मल्टीरोल जहाज है जो एयर, सरफेस और सबमरीन खतरों से निपट सकता है.
पीएनएस हुनैन यारमूक क्लास बैच-2 ऑफशोर पेट्रोल वेसल या कॉवेट है. इसे 2024 में सेवा में शामिल किया गया. डिस्प्लेसमेंट करीब 2600 टन है. लंबाई लगभग 98 मीटर, चौड़ाई 14.4 से 14.6 मीटर और ड्राफ्ट 4 मीटर है. स्पीड 41 से 44 km/hr तक है. ये भी 11 हजार किलोमीटर तक जा सकता है. लेकिन इसकी स्पीड भारत के युद्धपोत से कम है. यह समुद्र में अधिकतम 40 दिन रह सकता है.
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क्रू 60 से 100 के आसपास है. हथियारों में 30 मिमी असेलसान स्मैश गन, 12.7 मिमी मशीन गन, हरबह एंटी-शिप मिसाइल लॉन्चर (आमतौर पर आठ तक), फालैक्स या इसी तरह का CIWS शामिल हैं. हेलिकॉप्टर और यूएवी रखने की सुविधा है. यह मुख्य रूप से गश्त, समुद्री सुरक्षा और सीमित लड़ाकू मिशन के लिए बनाया गया है.
तुलना से साफ है कि कोलकाता क्लास आकार, हथियार, सेंसर और क्षमता में काफी आगे है. यह तीन गुना बड़ा और कहीं ज्यादा शक्तिशाली प्लेटफॉर्म है. हुनैन छोटा पेट्रोल जहाज है जो मुख्य रूप से तटीय और ऑफशोर भूमिकाओं के लिए उपयुक्त है. टक्कर में छोटे जहाज का बड़ा जहाज के करीब आना जोखिम भरा था.
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घटना का विश्लेषण और महत्व
पाकिस्तानी जहाज अभ्यास के दौरान भारतीय गश्ती जहाज के करीब आया. भारतीय पक्ष के अनुसार यह जानबूझकर दखल और खतरनाक पैंतरेबाजी थी. हेलीकॉप्टर संचालन प्रभावित होने का खतरा था. भारतीय कप्तान ने संयम बरता जिससे बड़ा हादसा टल गया. अंतरराष्ट्रीय जल में होने के बावजूद दोनों देशों के बीच समझौते लागू होते हैं. 1991 का समझौता ऐसे जोखिम कम करने के लिए है.
यह घटना दिखाती है कि तनाव के समय छोटे-छोटे कदम भी बड़े असर डाल सकते हैं. भारतीय जहाज व्यापार सुरक्षा जैसे शांतिपूर्ण मिशन पर था. पाकिस्तानी जहाज अभ्यास में शामिल था. दोनों पक्षों को नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए. कोलकाता क्लास जैसी बड़ी शक्ति होने के बावजूद भारत ने संयम दिखाया. यह पेशेवर रवैये का उदाहरण है.
भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए संचार और सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है. दोनों नौसेनाओं के बीच समझ और समझौतों का सम्मान तनाव कम रखने में मदद करेगा. कुल मिलाकर यह घटना समुद्री इलाकों में सावधानी की याद दिलाती है.