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भारतीय नौसेना ने दो तेल टैंकर हूती विद्रोहियों के इलाके से सुरक्षित निकाले

भारतीय नौसेना के INS त्रिशूल और INS आदित्य ने कच्चे तेल टैंकर एमटी कंपास और एमटी थलाट्टा को बाब अल-मंदेब से सुरक्षित पार करवाया. 9-10 अगस्त को दोनों जहाज सफलतापूर्वक निकले.

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बाब अल-मंदेब की खाड़ी से तेल टैंकर को सुरक्षित निकालते भारतीय नौसेना का युद्धपोत. (Photo: Indian Navy)
बाब अल-मंदेब की खाड़ी से तेल टैंकर को सुरक्षित निकालते भारतीय नौसेना का युद्धपोत. (Photo: Indian Navy)

लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच स्थित बाब अल-मंदेब दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. हाल के वर्षों में यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों और क्षेत्रीय तनाव के कारण यह क्षेत्र बेहद जोखिम वाला बन गया है. ऐसे में भारतीय नौसेना ने एक बार फिर अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमता का प्रदर्शन किया है.

भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS त्रिशूल और INS आदित्य ने कच्चे तेल के दो टैंकरों- एमटी कंपास और एमटी थलाट्टा को इस खतरनाक इलाके से सुरक्षित पार करवाया. दोनों वाणिज्यिक जहाज 9 और 10 अगस्त 2026 के बीच सफलतापूर्वक इस क्षेत्र से निकल गए. 

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पश्चिमी नौसेना कमान के आधिकारिक बयान के अनुसार, INS त्रिशूल और INS आदित्य ने इन दोनों कच्चे तेल टैंकरों को बाब अल-मंदेब के जोखिम वाले क्षेत्र से एस्कॉर्ट किया. यह सुनिश्चित किया गया कि जहाज बिना किसी घटना के सुरक्षित गुजर सकें. 

भारतीय नौसेना ने स्पष्ट किया कि वह महत्वपूर्ण ऊर्जा कार्गो की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने और भारतीय समुद्री हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. यह अभियान गल्फ ऑफ एडन और लाल सागर क्षेत्र में चल रहे व्यापक सुरक्षा प्रयासों का हिस्सा है.

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Bab el-Mandeb Strait Indian Navy Warships Escort Crude Tankers

बाब अल-मंदेब एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच तेल और व्यापार का प्रमुख मार्ग है. दुनिया के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इस रास्ते से होकर गुजरता है. हूती हमलों के कारण कई जहाजों को हमलों का सामना करना पड़ा है, जिससे बीमा लागत बढ़ी है. कुछ कंपनियों ने मार्ग बदल लिए हैं. 

रणनीतिक महत्व और ऊर्जा सुरक्षा

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. कच्चा तेल और एलपीजी जैसे ईंधन मुख्य रूप से मध्य पूर्व से समुद्री मार्गों के जरिए आते हैं. बाब अल-मंदेब जैसे चोकपॉइंट पर कोई भी बाधा भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है. इसलिए नौसेना का एक्टिव एस्कॉर्ट मिशन ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है. 

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INS त्रिशूल एक बहुउद्देशीय फ्रिगेट है जबकि INS आदित्य एक फ्लीट टैंकर है, जो लंबे अभियानों में रसद सहायता प्रदान करता है. दोनों जहाजों का संयोजन सुरक्षा और समर्थन दोनों सुनिश्चित करता है. यह अभियान भारतीय नौसेना की मिशन-बेस्ड डिप्लॉयमेंट रणनीति का हिस्सा है, जिसमें जहाजों को नियमित रूप से उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में तैनात रखा जाता है. 

Bab el-Mandeb Strait Indian Navy Warships Escort Crude Tankers

इससे न केवल भारतीय झंडे वाले जहाजों बल्कि भारत आने वाले अन्य वाणिज्यिक जहाजों को भी सुरक्षा मिलती है. हाल के महीनों में क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद नौसेना ने कई ऐसे एस्कॉर्ट अभियान चलाए हैं. बाब अल-मंदेब और लाल सागर क्षेत्र में हूती विद्रोहियों द्वारा जहाजों पर हमले जारी हैं. 

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ये हमले अक्सर ड्रोन, मिसाइल और छोटे नावों से होते हैं. अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों ने भी सुरक्षा बढ़ाई है, लेकिन कई देश स्वतंत्र अभियान चला रहे हैं. भारत की नीति स्वतंत्र और सक्रिय रही है. वह क्षेत्र में शांति और सुरक्षित आवाजाही के पक्ष में है, बिना किसी सैन्य गठबंधन में सीधे शामिल हुए.

भारतीय नौसेना का यह प्रयास अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और स्वतंत्र नेविगेशन के सिद्धांत को मजबूत करता है. यह दिखाता है कि भारत न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा करता है बल्कि वैश्विक कॉमन्स की सुरक्षा में भी जिम्मेदारी निभाता है. पश्चिमी नौसेना कमान ने सोशल मीडिया पर इस अभियान की जानकारी साझा करते हुए नौसेना की प्रतिबद्धता दोहराई. 

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