डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने रूस से 288 S-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दे दी है. इसकी अनुमानित लागत ₹10,000 करोड़ है. ये मिसाइलें मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुई थीं, जहां भारत ने पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों, AWACS और ड्रोन्स को मार गिराया था. यह फैसला भारतीय वायुसेना की हवाई रक्षा को और मजबूत करेगा.
DAC ने क्या मंजूरी दी?
DAC ने Acceptance of Necessity (AoN) दी है, जो रक्षा खरीद की पहली बड़ी मंजूरी है. इसमें शामिल है...
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खरीद Fast Track Procedure (FTP) से होगी, ताकि जल्दी डिलीवरी हो. यह मंजूरी S-400 के स्टॉक को फिर से भरने और बढ़ाने के लिए है. भारत पहले से 5 S-400 स्क्वाड्रन का सौदा कर चुका है. इसमें से दो और स्क्वाड्रन इस साल जून और नवंबर में मिलेंगे.
ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की भूमिका
मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया. यह 7-10 मई तक चला और भारत-पाकिस्तान के बीच दशकों का सबसे बड़ा संघर्ष था.
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S-400 ने इसमें कमाल किया...

S-400 सिस्टम क्या है?
S-400 ट्रायम्फ रूस का सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम है. मुख्य विशेषताएं...
खरीद की प्रक्रिया कैसे चलती है?
भारत की रक्षा खरीद सख्त निगरानी में होती है. ऑपरेशनल जरूरत का केस बनता है. डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड (रक्षा सचिव की अध्यक्षता) जांचता है. DAC AoN देती है. वेंडर से कॉस्ट नेगोशिएसन. अंत में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) अंतिम मंजूरी देती है.
भारत की हवाई रक्षा मजबूत होगी
यह फैसला ऑपरेशन सिंदूर के सबक से आया है. S-400 ने साबित किया कि भारत की एयर डिफेंस विश्व स्तर की है. 288 नई मिसाइलें स्टॉक बढ़ाएंगी. पाकिस्तान जैसे खतरों से बेहतर बचाव करेंगी. भारत रूस से रक्षा साझेदारी को मजबूत कर रहा है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है.