लेबनान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग का सबसे बड़ा शिकार बन गया है. असल में यह जंग सीधे लेबनान की नहीं है, लेकिन लेबनान में मौजूद हिज्बुल्लाह ईरान का सबसे करीबी सहयोगी है. जब 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया तो हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेटों की बौछार शुरू कर दी.
इजरायल ने इसे अपना खतरा मानकर लेबनान पर पूरी ताकत से हमले शुरू कर दिए. नतीजा यह हुआ कि लेबनान बिना अपनी जंग लड़े ही बीच में पिसने लगा. आम नागरिक, स्कूल, अस्पताल और घर सब कुछ इस जंग की आग में जल रहे हैं.
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इजरायल ने लेबनान पर अब तक कितने हमले किए?
28 फरवरी 2026 से लेकर 27 मार्च 2026 तक इजरायल ने लेबनान पर भारी हमले जारी रखे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार इस पूरे एक महीने में इजरायल ने 1200 से ज्यादा हमले किए हैं. इनमें एयर स्ट्राइक्स, आर्टिलरी गोलाबारी और ड्रोन हमले शामिल हैं. सिर्फ पिछले 24 घंटे में इजरायल ने 80 हमले किए हैं.
इन हमलों में लेबनान के दक्षिणी इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. इजरायल का कहना है कि वह हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रहा है, लेकिन जमीन पर आम लोग और बुनियादी ढांचा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रहा है.
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हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर कितने रॉकेट दागे?
हिज्बुल्लाह ने इजरायल के इन हमलों का जवाब भी बहुत तेजी से दिया है. 28 फरवरी से अब तक हिज्बुल्लाह ने इजरायल की तरफ 3500 से ज्यादा रॉकेट दाग चुका है. ये रॉकेट इजरायल के उत्तरी शहरों, सैन्य ठिकानों और बस्तियों पर गिरे हैं. हिज्बुल्लाह का कहना है कि वह ईरान का साथ दे रहा है. इजरायल को सबक सिखा रहा है. लेकिन इन रॉकेट हमलों के कारण इजरायल में भी कई मौतें हुई हैं. हजारों लोग विस्थापित हो गए हैं.
आम लेबनानी लोगों पर क्या असर पड़ रहा है?
लेबनान के आम नागरिक इस जंग में सबसे ज्यादा पीड़ित हो रहे हैं. हजारों घर उजड़ चुके हैं. सड़कें टूट गई हैं. अस्पतालों पर बम गिर रहे हैं. लाखों लोग अपने घर छोड़कर भाग रहे हैं. खाने-पीने की चीजें महंगी हो गई हैं. बिजली-पानी की समस्या हर जगह है.
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बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. बीमार लोग इलाज के लिए तरस रहे हैं. लेबनान की सरकार कमजोर है और वह इस जंग को रोकने में पूरी तरह असमर्थ है. इस वजह से पूरा देश आर्थिक और मानवीय संकट में फंस गया है.
अमेरिका-इजरायल और ईरान की रणनीति में लेबनान कहां फिट है?
अमेरिका और इजरायल ईरान को कमजोर करने के लिए हिज्बुल्लाह को भी खत्म करना चाहते हैं क्योंकि हिज्बुल्लाह ईरान का सबसे मजबूत हथियार माना जाता है. वहीं ईरान हिज्बुल्लाह के जरिए इजरायल पर दबाव बनाए रखना चाहता है ताकि अमेरिका का पूरा ध्यान लेबनान पर भी रहे.
इस पूरी जंग में लेबनान बस एक मैदान बनकर रह गया है जहां दोनों बड़ी ताकतें अपने हथियार आजमा रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो लेबनान का पूरा दक्षिणी इलाका जल्द ही बर्बाद हो जाएगा और लाखों लोग शरणार्थी बन जाएंगे.