भारत की एक कंपनी ने टीवी बनाने वाले पारंपरिक कारोबार से शुरू करके आज देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने तक का सफर तय किया है. यह कंपनी है सैमटेल (Samtel). आज सैमटेल भारत की महत्वपूर्ण रक्षा कंपनियों में से एक बन चुकी है, जो Su-30MKI फाइटर जेट और प्रचंड हेलीकॉप्टर जैसे अत्याधुनिक हथियारों के लिए डिस्प्ले सिस्टम बना रही है. ऑपरेशन सिंदूर में भी सैमटेल की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ, जो कंपनी की क्षमता को दर्शाता है.
सैमटेल की शुरुआत: टीवी पिक्चर ट्यूब से
सैमटेल की स्थापना 1970 के दशक में हुई थी. कंपनी शुरू में टीवी पिक्चर ट्यूब (CRT Tubes) बनाने का काम करती थी. उस समय भारत में ज्यादातर टीवी विदेश से आयात किए जाते थे. सैमटेल ने स्वदेशी उत्पादन शुरू करके टीवी उद्योग में क्रांति लाई. कंपनी ने धीरे-धीरे कलर टीवी ट्यूब, मॉनिटर और डिस्प्ले टेक्नोलॉजी में महारत हासिल कर ली.
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90 के दशक और 2000 के शुरुआती सालों में सैमटेल भारत की सबसे बड़ी CRT ट्यूब बनाने वाली कंपनी बन गई. लाखों टीवी सेट्स में सैमटेल के ट्यूब लगे हुए थे. लेकिन जैसे-जैसे LCD और LED टेक्नोलॉजी आई, कंपनी को नई दिशा की जरूरत महसूस हुई.
रक्षा क्षेत्र में प्रवेश: नई चुनौती
सैमटेल ने 2000 के दशक में रक्षा क्षेत्र में कदम रखा. कंपनी ने समझा कि डिस्प्ले टेक्नोलॉजी सिर्फ टीवी तक सीमित नहीं है. फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर, टैंक और अन्य सैन्य उपकरणों में भी हाई-क्वालिटी, हाई-रेजोल्यूशन और बेहद मजबूत डिस्प्ले की जरूरत होती है.
सैमटेल ने DRDO और भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर काम शुरू किया. कंपनी ने एवियोनिक्स (विमान इलेक्ट्रॉनिक्स) डिस्प्ले सिस्टम विकसित करने में विशेषज्ञता हासिल की. आज सैमटेल भारत की उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल है जो स्वदेशी रक्षा उपकरण बना रही हैं.

Su-30MKI और प्रचंड के लिए डिस्प्ले
सैमटेल की सबसे बड़ी उपलब्धि Su-30MKI फाइटर जेट के लिए मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले (MFD) और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर के लिए एडवांस्ड डिस्प्ले सिस्टम बनाना है.
ये डिस्प्ले बेहद मजबूत, उच्च तापमान सहने वाले और इलेक्ट्रॉमैग्नेटिक इंटरफेरेंस से सुरक्षित होते हैं.
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ऑपरेशन सिंदूर में सैमटेल का योगदान
मई 2026 में भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर चलाया. इस अभियान में भारतीय वायुसेना के Su-30MKI और अन्य विमानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सैमटेल द्वारा बनाए गए डिस्प्ले सिस्टम ने पायलटों को रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध कराई, जिससे मिशन सफल हुआ. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सैमटेल की टेक्नोलॉजी ने ऑपरेशन की सटीकता और सुरक्षा बढ़ाई. यह स्वदेशी कंपनियों की बढ़ती भूमिका का उदाहरण है.

कंपनी के एमडी और सीईओ पुनीत कौरा कहता है कि ऑपरेशन सिंदूर में जब भारतीय वायुसेना ने जीत हासिल की तो सबसे ज्यादा खुशी हुई. क्योंकि फाइटर जेट में हमारे डिस्प्ले ने बेहतरीन काम किया. इसलिए डिफेंस के लोग हमारे डिस्प्ले को वायुसेना की 'ईगल आई' कहते हैं. ये एक बड़ी बात होती है जब आपका प्रोडक्ट वॉर प्रूवेन साबित हो. हम ऐसे क्रिटिकल सिस्टम आगे भी सेना को प्रोवाइड करेंगे.
सैमटेल का योगदान और भविष्य
सैमटेल ने मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती दी है. कंपनी अब DRDO, HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) और अन्य रक्षा संगठनों के साथ मिलकर और एडवांस प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है.
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कंपनी का सफर दिखाता है कि सही विजन, टेक्नोलॉजी और सरकार के समर्थन से एक साधारण कंपनी भी देश की रक्षा में अहम भूमिका निभा सकती है. टीवी पिक्चर ट्यूब से शुरू करके आज फाइटर जेट के कॉकपिट तक पहुंचना सैमटेल की मेहनत, इनोवेशन और देशभक्ति का प्रमाण है.
भविष्य में सैमटेल और भी एडवांस डिस्प्ले, हेड-अप डिस्प्ले (HUD) और अगली पीढ़ी के एवियोनिक्स सिस्टम बनाने की तैयारी कर रही है. यह कंपनी न सिर्फ भारत की रक्षा क्षमता बढ़ा रही है, बल्कि रोजगार सृजन और टेक्नोलॉजी निर्यात में भी योगदान दे रही है.