दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आखिरकार गुजरात में दस्तक दे दी है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 24 जून को मॉनसून गुजरात में दाखिल हुआ और यह सूरत तक पहुंच चुका है. मौसम विभाग ने मॉनसून के और आगे बढ़ने के लिए स्थिति अनुकूल बनाई है. दक्षिण गुजरात के कुछ इलाकों में बारिश की गतिविधियां देखी जा रही हैं लेकिन उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र क्षेत्र अभी भी तेज गर्मी से झुलस रहे हैं. गांधीनगर और राजकोट में बुधवार को सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया गया है. दोनों जगहों पर अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया.
मौसम विभाग ने दक्षिण गुजरात के कुछ हिस्सों में 25 जून को भारी बारिश की चेतावनी दी है. इन इलाकों में गरज-चमक के साथ मध्यम से तेज बारिश हो सकती है. साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है. अगले सात दिनों तक गुजरात के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की उम्मीद है.
गुजरात में भी देर से मॉनसून की एंट्री
आमतौर पर मॉनसून 15 जून तक गुजरात को पूरी तरह कवर कर लेता है, लेकिन इस साल मॉनसून देर से पहुंचा है. IMD ने 24 जून 2026 को जारी अपने ताजा बुलेटिन में बताया कि मॉनसून उत्तर-पूर्व अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के बचे हुए हिस्सों, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ गया है. मॉनसून की उत्तरी सीमा फिलहाल सूरत, इंदौर, मंडला, डाल्टनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है.
मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 2-3 दिनों में गुजरात के बाकी हिस्सों, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में मॉनसून के और आगे बढ़ने की अच्छी संभावना है. ऐसे में गर्मी से परेशान लोग अब राहत की उम्मीद कर रहे हैं. हालांकि, उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र के लोगों को अभी कुछ दिन और गर्मी सहनी पड़ेगी.
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मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों में भी उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र-कच्छ में तापमान 40 डिग्री के पार ही बना रह सकता है. जबकि दक्षिण गुजरात में मॉनसून के कारण कुछ राहत मिल सकती है. हालांकि, पूरे राज्य में अच्छी बारिश के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा. अल नीनो के कारण बारिश की गतिविधि कमजोर रहने की आशंका है.
अल नीनो क्या है और यह मॉनसून को कैसे प्रभावित करता है?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है. इसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे हवाओं और बारिश के पैटर्न बदल जाते हैं. भारत में अल नीनो के सालों में अक्सर मॉनसून कमजोर रहता है. IMD ने 29 मई 2026 को जारी अपनी लंबी अवधि की भविष्यवाणी में कहा है कि इस साल पूरे देश में मॉनसून की बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) का सिर्फ 90-92% रह सकती है. ऐसे में कम बारिश की संभावना है.