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HAL को मिला तेजस Mk1A का सातवां इंजन, GE ने छठे इंजन की समस्या सुलझाई

HAL को Tejas Mk1A के लिए GE का सातवां F404-IN20 इंजन मिल गया है. छठे इंजन में आई तकनीकी समस्या को GE ने ठीक कर दिया है. अब पहली खेप इस साल के अंत में डिलीवर हो सकती है.

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ऊपर- तेजस एमके1ए फाइटर जेट और नीचे जीई का इंजन है. (File Photo: PTI)
ऊपर- तेजस एमके1ए फाइटर जेट और नीचे जीई का इंजन है. (File Photo: PTI)

भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने वाला LCA Tejas Mk1A कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है. हाल ही में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस से सातवां F404-IN20 इंजन मिल गया है. साथ ही, छठे इंजन में आई समस्या को GE ने ठीक कर दिया है. यह खबर Tejas Mk1A प्रोजेक्ट के लिए पॉजिटिव है, हालांकि पूरा प्रोजेक्ट अभी भी दो साल से ज्यादा की देरी का सामना कर रहा है.

F404-IN20 इंजन तेजस फाइटर जेट का दिल है. यह हल्का, शक्तिशाली और आधुनिक इंजन है जो लड़ाकू विमान को जरूरी थ्रस्ट, गति और मैन्यूवरेबिलिटी देता है. जीई एयरोस्पेस इस इंजन को HAL के लिए सप्लाई कर रहा है. सातवें इंजन की डिलीवरी से कार्यक्रम को गति मिलने की उम्मीद है. 

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Tejas Mk1A GE F404-IN20 Engine HAL

छठा इंजन भारत पहुंचने के बाद HAL की क्वालिटी जांच में खराबी आ गई थी. HAL ने इसे GE को वापस भेजा या समस्या की सूचना दी. GE ने जरूरी मरम्मत के बाद इंजन को फिर से ऑपरेशनल बना दिया. HAL ने जांच पूरी कर ली है. अब यह इंजन पूरी तरह तैयार है.

कार्यक्रम में देरी के कारण

तेजस कार्यक्रम मूल रूप से तय समय से काफी पीछे चल रहा है. मुख्य देरी इंजन डिलीवरी और इंटीग्रेशन से जुड़ी चुनौतियों के कारण हुई है. भारतीय रक्षा मंत्रालय (MoD) और भारतीय वायु सेना (IAF) इस कार्यक्रम पर लगातार नजर रखे हुए हैं. HAL ने IAF की मांगी गई कई संशोधनों को शामिल किया है, जिससे समय लगा.

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फिर भी, पॉजिटिव खबर यह है कि इंजन सप्लाई अब नियमित हो रही है. सातवें इंजन की डिलीवरी से उत्पादन लाइन तेज होने की संभावना है. तेजस Mk1A की पहली खेप इस साल के अंत में डिलीवर हो सकती है, बशर्ते इंटीग्रेशन, सर्टिफिकेशन और IAF की स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी हो जाए.

Tejas Mk1A GE F404-IN20 Engine HAL

तेजस Mk1A भारत का स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान है. इसमें बेहतर रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, हथियार क्षमता और इंजन परफॉर्मेंस शामिल है. IAF को कुल 83 Mk1A विमान चाहिए. इसमें स्वदेशी कंपोनेंट्स की हिस्सेदारी बढ़ रही है. 

इंजन जैसी महत्वपूर्ण चीज अब भी विदेशी कंपनी पर निर्भर है, लेकिन भविष्य में भारत अपना इंजन (Kaveri या अन्य) विकसित करने की कोशिश कर रहा है. फिलहाल GE के साथ साझेदारी से कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है.

आगे का रास्ता क्या होगा?

कार्यक्रम की देरी से IAF की स्क्वॉड्रन संख्या पर असर पड़ा है. पुराने MiG-21 जैसे विमान रिटायर हो रहे हैं, इसलिए नई डिलीवरी जल्द जरूरी है. HAL और GE के बीच बेहतर समन्वय से भविष्य में ऐसी समस्याएं कम हो सकती हैं. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इंजन सप्लाई में सुधार एक अच्छा संकेत है.

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अगर HAL समय पर इंटीग्रेशन और टेस्टिंग पूरी कर ले तो 2026 के अंत तक पहली खेप मिल सकती है. IAF इन विमानों को जल्द शामिल करके अपनी लड़ाकू क्षमता बढ़ाना चाहती है. HAL को सातवें GE F404-IN20 इंजन की प्राप्ति और छठे इंजन की समस्या का समाधान Tejas Mk1A कार्यक्रम के लिए राहत भरी खबर है.

हालांकि देरी अभी भी एक चुनौती है, लेकिन इंजन सप्लाई में तेजी आने से उम्मीद बढ़ गई है. भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन के लिए यह कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है. अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला तो भारतीय वायुसेना को जल्द ही आधुनिक Tejas Mk1A विमान मिलेंगे, जो देश की हवाई सुरक्षा को मजबूत बनाएंगे.

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