ईरान में महिलाओं को पारंपरिक पोशाक में हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बसीज संगठन 'जनफदा' नाम के मोबिलाइजेशन अभियान के तहत महिलाओं को पैरामिलिट्री भूमिकाओं के लिए तैयार कर रहे हैं.
महिलाएं बुर्का या हिजाब पहने एके-47 राइफल थामे नजर आ रही हैं. यह दृश्य ईरान की घरेलू सुरक्षा और बाहरी खतरों से निपटने की नई रणनीति को दर्शाता है. अभियान का मकसद आम लोगों को प्रतिरोध की ताकत बनाना है. इसमें महिलाओं की भागीदारी करीब 32 प्रतिशत बताई जा रही है, जो संख्या की दृष्टि से काफी है.
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जनफदा अभियान क्या है और क्यों चलाया जा रहा है?
जनफदा मोबिलाइजेशन कैंपेन के तहत ईरान 'पॉपुलर नेशनल रेजिस्टेंस बटालियन' बनाने की योजना पर काम कर रहा है. लक्ष्य एक हजार ऐसी बटालियन तैयार करने का है. ये बटालियन युद्ध या आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया दे सकेंगी. आईआरजीसी और बसीज इसे जन प्रतिरोध की ताकत के रूप में पेश कर रहे हैं. क्षेत्रीय तनाव, संभावित संघर्ष और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों के बीच यह अभियान देश की रक्षा क्षमता बढ़ाने का प्रयास लगता है.
महिलाओं को शामिल करना इसलिए खास है क्योंकि पारंपरिक समाज में उनकी भूमिका सीमित मानी जाती थी. अब उन्हें सक्रिय लड़ाकू और सहायक भूमिकाओं में लाया जा रहा है. तेहरान में महिलाओं की बसीज रैपिड-रिस्पॉन्स बटालियन भी बनाई गई हैं, जो शहर में त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार रहेंगी.
महिलाओं को क्या प्रशिक्षण दिया जा रहा है?
प्रशिक्षण में कई व्यावहारिक कौशल शामिल हैं. महिलाओं को राइफल चलाना सिखाया जा रहा है, जिसमें एके-47 जैसी स्वचालित बंदूकें प्रमुख हैं. एफपीवी ड्रोन यानी फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन का इस्तेमाल भी सिखाया जा रहा है, जो आधुनिक युद्ध में निगरानी और हमले दोनों के लिए उपयोगी होते हैं. एंटी-टैंक हथियारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि बख्तरबंद वाहनों से निपटा जा सके.
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WATCH: Iran's IRGC and Basij are training women in paramilitary roles under the Janfada mobilization campaign.
— Clash Report (@clashreport) September 30, 2026
Women make up ~32% of participants.
Training covers rifles, FPV drones, anti-tank weapons, urban warfare, and first aid.
All-women Basij rapid-response battalions… pic.twitter.com/8MtLYfzlRw
शहरी युद्ध की तकनीकें सिखाई जा रही हैं, क्योंकि शहरों में लड़ाई अलग होती है. इसके अलावा प्राथमिक चिकित्सा यानी फर्स्ट एड भी सिखाई जा रही है, ताकि घायलों की मदद की जा सके. यह मिश्रित प्रशिक्षण दर्शाता है कि महिलाओं को सिर्फ प्रतीकात्मक भूमिका नहीं, बल्कि वास्तविक मुकाबले और सहायता दोनों के लिए तैयार किया जा रहा है. बुर्का या हिजाब में प्रशिक्षण जारी रखना सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान बनाए रखने का संकेत है.
इस अभियान का रणनीतिक महत्व साफ है. बड़े पैमाने पर नागरिकों को प्रशिक्षित करके ईरान अपनी रक्षा को सिर्फ नियमित सेना पर निर्भर नहीं रखना चाहता. महिलाओं की भागीदारी से जनबल बढ़ता है और समाज के हर वर्ग को जोड़ा जाता है. तेहरान जैसी बड़ी शहर में महिलाओं की बटालियन बनाने से शहरी सुरक्षा मजबूत होती है.
सामाजिक दृष्टि से यह महिलाओं को नई जिम्मेदारी सौंपने का प्रयास है, हालांकि धार्मिक नियमों के दायरे में. आलोचक इसे तनाव बढ़ाने वाला कदम मान सकते हैं, जबकि समर्थक इसे राष्ट्रीय एकता और तैयारियों का प्रतीक बताते हैं. एफपीवी ड्रोन जैसे आधुनिक उपकरणों का प्रशिक्षण दिखाता है कि अभियान पुरानी विधियों तक सीमित नहीं है.
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Here is Iranian women receiving basic military training This is a volunteer-based program by a supposedly anti-woman government https://t.co/j2Hg6VAgmH
— The Gulag (@WelcomeTheGulag) September 29, 2026
आगे की चुनौतियां और असर
एक हजार बटालियन बनाने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है. प्रशिक्षण की गुणवत्ता, हथियारों की उपलब्धता और लंबे समय तक प्रेरणा बनाए रखना चुनौती रहेगा. महिलाओं की सुरक्षा और उनके परिवारों का सहयोग भी महत्वपूर्ण होगा. क्षेत्रीय स्तर पर यह कदम पड़ोसी देशों और वैश्विक शक्तियों का ध्यान खींच सकता है.
कुल मिलाकर जनफदा अभियान ईरान की रक्षा रणनीति में नागरिकों, खासकर महिलाओं की भूमिका बढ़ाने का प्रयास है. बुर्का-हिजाब और एके-47 का संयोजन सांस्कृतिक पहचान के साथ सैन्य तैयारियों को जोड़ने का प्रतीक बन गया है. आने वाले समय में इस अभियान की प्रगति और वास्तविक प्रभाव पर नजर रखना जरूरी होगा.