scorecardresearch
 
Advertisement

एके-47

एके-47

एके-47

एके-47 (AK-47) दुनिया की सबसे अधिक पहचानी जाने वाली असॉल्ट राइफलों में से एक है. इसका पूरा नाम एव्टोमैट कलाशनिकोवा 1947 है. इसे एके-47 या कलाशनिकोव के नाम से भी जाना जाता है. इस राइफल का विकास सोवियत संघ में किया गया था. इसके डिजाइन का काम रूसी हथियार डिजाइनर मिखाइल कलाशनिकोव ने किया था. एके-47 को 7.62×39 मिलीमीटर कारतूस के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया था. यह कलाशनिकोव राइफल परिवार का शुरुआती मॉडल है.

एके-47 के निर्माण की प्रक्रिया साल 1945 में शुरू हुई थी. उस समय द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने की ओर था. युद्ध के दौरान जर्मन सेना की स्टर्मगेवर 44 राइफल ने सोवियत सैन्य अधिकारियों का ध्यान खींचा था. इस राइफल में इस्तेमाल होने वाले नए प्रकार के कारतूस और इसकी बनावट को देखते हुए सोवियत संघ ने भी एक नई स्वचालित राइफल विकसित करने की योजना बनाई. इसका उद्देश्य सेना में इस्तेमाल हो रही पुरानी राइफलों और सबमशीन गनों के स्थान पर एक नया हथियार तैयार करना था.

सोवियत संघ में नई राइफल के लिए 7.62×39 मिलीमीटर का कारतूस विकसित किया गया. इसका इस्तेमाल एसकेएस कार्बाइन और आरपीडी हल्की मशीन गन में भी किया गया. इसके बाद मिखाइल कलाशनिकोव ने एके-47 के डिजाइन पर काम किया. साल 1947 में इस राइफल को सैन्य परीक्षणों के लिए प्रस्तुत किया गया. साल 1948 में इसके स्थिर बट वाले संस्करण को सोवियत सेना की कुछ चुनिंदा इकाइयों में शामिल किया गया. साल 1949 की शुरुआत में सोवियत सशस्त्र बलों ने इसे आधिकारिक रूप से अपना लिया.

एके-47 का इस्तेमाल सोवियत संघ के अलावा वारसा संधि से जुड़े कई देशों की सेनाओं ने भी किया. समय के साथ इसका उत्पादन दुनिया के कई देशों में होने लगा. अलग-अलग देशों ने इसके आधार पर अपने संस्करण भी तैयार किए. साल 1959 में एकेएम नाम का नया संस्करण पेश किया गया. इसमें पहले के मॉडल की तुलना में कुछ संरचनात्मक बदलाव किए गए थे. यह एके श्रृंखला के सबसे अधिक उत्पादित और इस्तेमाल किए जाने वाले संस्करणों में शामिल हुआ.

इसके बाद सोवियत संघ ने 1960 के दशक में आरपीके नाम की हल्की मशीन गन भी विकसित की. इसका डिजाइन एके श्रृंखला पर आधारित था. इसमें लंबी और भारी नली, मजबूत ढांचा तथा सहारा देने वाला पैर लगाया गया था. इसने धीरे-धीरे आरपीडी मशीन गन का स्थान लिया.

एके-47 के निर्माण के सात दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी इसके विभिन्न संस्करण दुनिया के अनेक देशों में इस्तेमाल किए जाते रहे हैं. इसका उपयोग सैन्य बलों के साथ-साथ कई गैर-सरकारी सशस्त्र संगठनों ने भी किया है. कलाशनिकोव परिवार की राइफलें आज भी दुनिया के छोटे हथियारों के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं.

और पढ़ें

एके-47 न्यूज़

Advertisement
Advertisement