
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और सूरत की कोसंबा पुलिस ने साल 2022 में कोरोना काल के दौरान कोसंबा में हुई एक 70 वर्षीय वृद्धा की हत्या के अलावा दो अन्य महिलाओं की हत्या का खुलासा कर दिया है. ये तीनों मृतक महिलाएं आपस में करीबी रिश्तेदार थीं और यह खुलासा हुआ है कि तीनों की हत्या वृद्धा की नातिन और उसके पति ने मिलकर की थी.
हत्यारे दामाद माधवदास ने अपनी पत्नी उर्मिला के साथ मिलकर वृद्धा की हत्या की और शव को घर के बाड़े में दफना दिया था. यह पूरा मामला तब सामने आया जब खुद आरोपी माधवदास पुलिस को बताने पहुंचा के उसकी पत्नी ने नानी की हत्या कर दी थी.
कोसंबा पुलिस ने अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के साथ मिलकर आरोपियों को साथ ले जाकर गड्ढा खोदा और एक पोटली में वृद्धा के अवशेष बरामद किए. साथ ही, आरोपी दंपत्ति ने दो अन्य महिलाओं की हत्या करने की बात भी कबूल की, जिससे यह ट्रिपल मर्डर केस सुलझ गया है.
क्राइम ब्रांच के एसपी भरत पटेल ने बताया कि साल 2022 में कोसंबा के वडफलिया में घर पर अकेली रहने वाली 70 वर्षीय शांताबेन वसावा की हत्या उनके दामाद माधवदास और उनकी पत्नी उर्मिला ने तकिए से मुंह दबाकर कर दी थी और शव को घर के पीछे बने बाड़े में गड्ढा खोदकर दफना दिया था. हत्या के बाद पति-पत्नी अहमदाबाद के धोलका तालुका के वालथेरा गांव में रहने लगे थे.
हालांकि, किसी बात को लेकर अनबन होने के कारण वे पिछले 9 महीनों से अलग-अलग रह रहे थे. इस दौरान, शांताबेन की हत्या के मामले में माधवदास ने अपनी पत्नी उर्मिला और अफजल उर्फ फोटो दीवान को फंसाने के लिए अहमदाबाद पुलिस के समक्ष यह आरोप लगाया था कि दोनों ने मिलकर वृद्धा की हत्या की है. हालांकि, जब अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने आवेदन के संबंध में गहन जांच की, तो पूरा मामला संदिग्ध लगा. जांच आगे बढ़ने पर हत्या का राज खुल गया और माधवदास ने अपनी पत्नी उर्मिला के साथ मिलकर शांताबेन की हत्या करने का अपराध कबूल कर लिया.

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और कोसंबा पुलिस ने आरोपी दंपति को साथ लेकर संयुक्त रूप से घटनास्थल पर तलाशी अभियान चलाया और उस जगह पहुंची जहां वृद्धा के शव को दफनाया गया था. आरोपी माधवदास और उर्मिला ने बहुत सावधानी से, ताकि आस-पड़ोस के लोगों या रिश्तेदारों को पता न चले, वृद्धा के शव का निपटान किया और सबूत नष्ट कर दिए. इस शातिर दंपति ने कोरोना काल में मृतकों के शव घर न भेजे जाने की स्थिति का फायदा उठाया और सभी को बताया कि वृद्धा को अस्पताल से सीधे श्मशान ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया था.
लेकिन उन्होंने शांताबेन के घर पर ही शव को एक ड्रम में डालकर उसमें तीन बोरी सीमेंट और पानी मिलाकर ड्रम भर दिया था. तीन महीने बाद मौका मिलते ही उन्होंने शव वाले ड्रम को घर के आंगन में गड्ढा खोदकर दफना दिया था. पति-पत्नी ने वृद्धा के शव को गड्ढे में दफनाने के बाद उसके ऊपर सीमेंट की एक मोटी परत (स्लैब जैसी) बना दी थी. पुलिस ने गैंती-फावड़े से सीमेंट की इस परत को तोड़कर 4-5 फीट की गहराई तक खुदाई की और वृद्धा के अवशेष बाहर निकाले.
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच उन अवशेषों को एक पोटली में भरकर FSL और आगे की जांच के लिए ले गई है. क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी पता चला कि उर्मिला उर्फ जया और माधवदास पिछले लगभग 8 महीनों से अलग-अलग रह रहे थे. माधवदास अपनी पत्नी से नाराज़ था क्योंकि उर्मिला घर में रखे गहने, नकद और अपने बेटे को साथ लेकर चली गई थी. जांच से पता चला कि इसी नाराज़गी और अपनी पत्नी पर शक के कारण उसने अपनी पत्नी और उसके कजीन को अपराध में फंसाने के इरादे से पूरी झूठी कहानी गढ़ी गई थी.
भगवती वसावा आरोपी उर्मिला उर्फ जया की बहन थीं और उन्हें टीबी (TB) की बीमारी थी. माधवदास और उर्मिला ने मिलकर तकिए से भगवती का मुंह दबाकर उनकी हत्या कर दी थी. इसके बाद शव को दफना दिया गया था. इसके अलावा मंजुलाबेन साधु जो आरोपी माधवदास की मां और आरोपी उर्मिला उर्फ जया की सास थीं, और उन्हें लकवा (पैरालिसिस) की बीमारी थी. माधवदास और उर्मिला ने मिलकर तकिए से मंजुलाबेन का मुंह दबाकर उनकी हत्या कर दी थी. बाद में, उनके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया.