अमेरिका के कैलिफोर्निया सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की संघीय अदालत में अक्टूबर 2025 में दाखिल ग्रैंड जूरी चार्जशीट में जेल में बंद गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया और उसके 12 से ज्यादा सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. चार्जशीट में रैकेटियरिंग (RICO), ड्रग तस्करी, रंगदारी, हथियार कारोबार और हिंसक अपराधों से जुड़े मामलों का विस्तृत ब्योरा दिया गया है. अमेरिकी जांच एजेंसी FBI का दावा है कि भगवानपुरिया संगठित अपराध समूह (OCG) ने भारत, खासकर पंजाब में पुलिस व्यवस्था को प्रभावित कर झूठे केस दर्ज करवाने और वसूली का नेटवर्क खड़ा किया. दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि इस गिरोह की गतिविधियां कई देशों तक फैली हुई थीं.
चार्जशीट के अनुसार भगवानपुरिया गैंग का एक तयशुदा तरीका था. गैंग के सदस्य या सहयोगी अपने विरोधियों, पुलिस के संभावित मुखबिरों या रंगदारी के निशाने पर मौजूद लोगों की जानकारी कथित तौर पर कुछ भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों को देते थे. इसके बाद उन लोगों या उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ हत्या जैसे गंभीर मामलों में भी झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए जाते थे. जांच एजेंसी का आरोप है कि बाद में गैंग के सदस्य या कुछ पुलिसकर्मी पीड़ित परिवारों से संपर्क कर केस हटाने या नाम निकालने के बदले पैसे मांगते थे.
एफबीआई दस्तावेज में कहा गया है कि इस तरह की कार्रवाई से गिरोह को सीधे तौर पर रंगदारी की रकम मिलती थी और साथ ही कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी कमजोर पड़ता था. आरोप है कि सरकारी पद और पुलिस की कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों को भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता था. चार्जशीट में यह भी दावा किया गया कि यह कोई एक-दो घटनाओं तक सीमित मामला नहीं था, बल्कि एक दोहराई जाने वाली रणनीति थी. इसी वजह से अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इसे संगठित आपराधिक साजिश का हिस्सा माना है.
चार्जशीट में पंजाब पुलिस के इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा का नाम प्रमुख रूप से शामिल है. एफबीआई के मुताबिक वह भगवानपुरिया गैंग के कुछ सदस्यों के संपर्क में थे. एक हत्या मामले में लोगों को झूठा फंसाने और पैसे मांगने की कोशिश की गई. यह मामला 15 जनवरी 2026 को होशियारपुर जिले के मियानी गांव में हार्डवेयर कारोबारी बलविंदर सिंह की हत्या से जुड़ा बताया गया है. गैंग ने बाद में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस हत्या की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था.
एफबीआई चार्जशीट के ओवरट एक्ट 34 के अनुसार 13 अप्रैल 2026 से पहले गैंग से जुड़े गुरलाल सिंह ने एक व्यक्ति (विक्टिम-2) की जानकारी इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह को दी. आरोप है कि यह जानकारी इसलिए दी गई ताकि उस व्यक्ति को बलविंदर सिंह हत्या मामले में झूठा आरोपी बनाया जा सके. अमेरिकी जांच एजेंसी का कहना है कि इसके बाद पुलिस कार्रवाई और दबाव बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई. दस्तावेज में इस घटना को संगठित साजिश की अहम कड़ी बताया गया है.
चार्जशीट के ओवरट एक्ट 35 में दावा किया गया है कि 13 अप्रैल 2026 को इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह ने विक्टिम-3, यानी विक्टिम-2 के पिता, से संपर्क किया. एफबीआई के मुताबिक उन्होंने कहा कि गुरलाल सिंह से बात करने के बाद अब पिता को भी बलविंदर सिंह हत्या मामले में आरोपी बनाया जाएगा. जांच एजेंसी का आरोप है कि इस बातचीत का मकसद परिवार पर दबाव बनाना था. दस्तावेज में इसे वसूली की दिशा में बढ़ाया गया कदम बताया गया है.
ओवरट एक्ट 36 के अनुसार 16 अप्रैल 2026 को गुरिंदरजीत सिंह ने सीधे विक्टिम-2 से बातचीत की. एफबीआई का आरोप है कि उन्होंने कहा कि यदि परिवार भुगतान नहीं करता है तो विक्टिम-2, उसके पिता और उसकी बहन, तीनों को हत्या मामले में शामिल कर दिया जाएगा. जांच एजेंसी ने इसे धमकी और भय का इस्तेमाल कर पैसे हासिल करने की कोशिश बताया है. चार्जशीट में कहा गया है कि सरकारी पद का प्रभाव इस दबाव का अहम हिस्सा था.
ओवरट एक्ट 37 और 38 में कहा गया है कि 24 मई 2026 को पंजाब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुलिस ने सार्वजनिक रूप से विक्टिम-2 और विक्टिम-3 पर हत्या की सुपारी देने का आरोप लगाया. अगले दिन, यानी 25 मई को, एफबीआई के मुताबिक गुरिंदरजीत सिंह ने विक्टिम-3 से कहा कि 'गुरलाल मेरे साथ है' और यह भी कहा कि तय रकम पूरी नहीं दी गई. अमेरिकी एजेंसी का दावा है कि यह बयान भुगतान के लिए दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से दिया गया था.
ओवरट एक्ट 39 में आरोप लगाया गया है कि 25 मई 2026 को गुरिंदरजीत सिंह ने विक्टिम-3 से कहा कि भुगतान मिलने पर तीन आरोपियों में से दो के नाम हत्या केस से हटाए जा सकते हैं. एफबीआई ने इसे सीधी रंगदारी की कोशिश माना है. इसी आधार पर चार्जशीट के दूसरे काउंट में इंस्पेक्टर पर जबरन वसूली के ज़रिए व्यापार में बाधा डालने की कोशिश यानी रंगदारी के जरिए धन हासिल करने की कोशिश का आरोप लगाया गया है. आरोप है कि अप्रैल से जून 2026 के बीच धमकी, भय और सरकारी पद का इस्तेमाल कर पैसे लेने की कोशिश की गई.
एफबीआई चार्जशीट सामने आने के बाद पंजाब पुलिस में भी हलचल बढ़ गई. सूत्रों के अनुसार, उस समय इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा टांडा के SHO थे. उन्हें अब पुलिस लाइंस भेज दिया गया और मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं. अमेरिकी दस्तावेज में लॉस एंजिलिस में रहने वाले भारतीय मूल के एक परिवार से लगभग 4 लाख डॉलर यानी करीब 3.3 से 3.8 करोड़ रुपये की कथित वसूली की साजिश का भी जिक्र है. यह मामला ऑपरेशन हार्ड बॉल नामक अमेरिकी कार्रवाई का हिस्सा बताया गया है.
'आज तक' से बातचीत में गुरिंदरजीत नागरा ने एफबीआई के आरोपों पर हैरानी जताई. उन्होंने कहा कि उन्हें इन आरोपों की जानकारी मीडिया से मिली है और बिना जांच के ऐसे दावों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. नागरा ने कहा कि यह 14 जनवरी 2026 का हत्या मामला है, जिसमें छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और तीन शूटरों ने जिम्मेदारी ली थी. उनका कहना था कि यदि उनके खिलाफ कोई सबूत है तो उसे सार्वजनिक किया जाए. उन्होंने सभी आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया और कहा कि उन्हें यह भी नहीं पता कि कथित रकम भारतीय मुद्रा में कितनी बनती है.
होशियारपुर जिले के मियानी गांव में जनवरी 2026 में हार्डवेयर दुकान चलाने वाले बलविंदर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक तीन बाइक सवार हमलावर दुकान पर पहुंचे और .30 बोर पिस्तौल से कई गोलियां चलाईं. बलविंदर सिंह को सीने समेत कई जगह गोलियां लगीं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई. बाद में अमेरिका में रहने वाले गैंगस्टर गुरलाल रुडियाना ने सोशल मीडिया पर हत्या की जिम्मेदारी लेने का दावा किया और आरोप लगाया कि बलविंदर पुलिस को सूचना देकर गैंग को नुकसान पहुंचा रहे थे. हालांकि पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह सुपारी किलिंग का मामला भी हो सकता है.
एफबीआई के अनुसार जग्गू भगवानपुरिया भारत की जेल में बंद रहते हुए भी कथित तौर पर मोबाइल फोन और VoIP डिवाइस के जरिए गिरोह का संचालन कर रहा था. जांच एजेंसी का दावा है कि हत्या, ड्रग तस्करी और रंगदारी से होने वाली कमाई का हिस्सा भारत भेजा जाता था. चार्जशीट में कहा गया है कि गिरोह के एक हजार से ज्यादा सदस्य और सहयोगी दुनिया भर में सक्रिय थे, जिनमें सौ से अधिक लोग अमेरिका में मौजूद थे. अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक इसका नेटवर्क फैला होने का आरोप है.
अमेरिकी दस्तावेज में कैलिफोर्निया से चलने वाले कई ड्रग नेटवर्क का जिक्र है, जो हर सप्ताह बड़ी मात्रा में कोकीन और मेथामफेटामाइन की खेप अमेरिका के विभिन्न राज्यों और कनाडा सीमा तक पहुंचाते थे. एक मामले में लगभग 99.2 किलोग्राम कोकीन और 1 किलोग्राम हेरोइन कैलिफोर्निया से इंडियाना ले जाने का आरोप दर्ज है. इसके अलावा नेवादा में स्ट्रॉ परचेजर के जरिए हथियार खरीदने और उन्हें अमेरिका में बेचने या कनाडा भेजने का भी आरोप लगाया गया है. चार्जशीट में अपहरण, मारपीट और 50 हजार डॉलर तक की रंगदारी मांगने जैसी घटनाओं का भी उल्लेख है.
एफबीआई का कहना है कि भगवानपुरिया गैंग सोशल मीडिया का इस्तेमाल डर पैदा करने के लिए करता था. हत्या या हिंसक घटनाओं की जिम्मेदारी इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर लेकर लोगों को संदेश दिया जाता था कि गैंग के खिलाफ जाने वालों को निशाना बनाया जा सकता है. चार्जशीट में यह भी आरोप है कि भारत में आर्थिक रूप से कमजोर और संवेदनशील युवाओं, यहां तक कि नाबालिगों को भी हिंसक वारदातों के लिए भर्ती किया जाता था. कुछ मामलों में हत्या के बदले करीब 20 हजार रुपये तक भुगतान किए जाने का दावा किया गया है ताकि खर्च और कानूनी जोखिम कम रहे.
पंजाब पुलिस के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी कार्रवाई से विदेशों में बैठे कई गैंग ऑपरेटरों पर दबाव बढ़ेगा और इससे संगठित अपराध के नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिल सकती है. अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय तक कुछ गैंगस्टर पश्चिमी देशों से संचालन करते रहे और उनकी गतिविधियों का पूरा पैमाना बाद में सामने आया. हालांकि पुलिस सूत्र यह भी स्वीकार करते हैं कि वर्दी में कुछ 'ब्लैक शीप' यानी भ्रष्ट तत्वों की भूमिका से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता. एफबीआई चार्जशीट ने अब इस पूरे नेटवर्क, पुलिस की कथित मिलीभगत और अंतरराष्ट्रीय अपराध जगत के रिश्तों पर नई बहस छेड़ दी है.