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CrPC Section 140: मजिस्ट्रेट के लिखित निर्देश देने की शक्ति से संबंधित है धारा 140

सीआरपीसी की धारा 140 (Section 140) में मजिस्ट्रेट की उस शक्ति के बारे में प्रावधान (Provision) किया गया है, जिससे वह लिखित निर्देश आदि जारी कर सकता है. आइए जान लेते हैं कि सीआरपीसी की धारा 140 इस बारे में क्या कहती है?

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मजिस्ट्रेट के लिखित आदेश की शक्ति से जुड़ी है ये धारा
मजिस्ट्रेट के लिखित आदेश की शक्ति से जुड़ी है ये धारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मजिस्ट्रेट के लिखित आदेश की शक्ति से जुड़ी है ये धारा
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • CrPC में कई बार हुए है संशोधन

Code of Criminal Procedure: दंड प्रक्रिया संहिता में मजिस्ट्रेट की शक्तियों और उसके आदेश से जुड़े कई प्रावधान (Provision) मिलते हैं. इसी तरह से सीआरपीसी की धारा 140 (Section 140) में मजिस्ट्रेट की उस शक्ति के बारे में प्रावधान (Provision) किया गया है, जिससे वह लिखित निदेश आदि जारी कर सकता है. आइए जान लेते हैं कि सीआरपीसी की धारा 140 इस बारे में क्या कहती है?

सीआरपीसी की धारा 140 (CrPC Section 140)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure 1973) की धारा 140 (Section 140) में मजिस्ट्रेट की लिखित अनुदेश आदि देने की शक्ति का प्रावधान किया गया है. CrPC की धारा 140 के अनुसार-

(1) जहां मजिस्ट्रेट धारा 139 के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा स्थानीय अन्वेषण किए जाने के लिए निदेश देता है वहां मजिस्ट्रेट (क) उस व्यक्ति को ऐसे लिखित अनुदेश दे सकता है जो उसके मार्गदर्शन के लिए आवश्यक प्रतीत हो, (ख) यह घोषित कर सकता है कि स्थानीय अन्वेषण का सब आवश्यक व्यय, या उसका कोई भाग, किसके द्वारा दिया जाएगा.

(2) ऐसे व्यक्ति की रिपोर्ट को मामले में साक्ष्य के रूप में पढ़ा जा सकता है.

(3) जहां मजिस्ट्रेट धारा 139 के अधीन किसी विशेषज्ञ को समन करता है और उसकी परीक्षा करता है वहां मजिस्ट्रेट निदेश दे सकता है कि ऐसे समन करने और परीक्षा करने के खर्चे किसके द्वारा दिए जाएंगे.

इसे भी पढ़ें--- CrPC Section 138: कोर्ट में हाजिर होकर कारण बताने की प्रक्रिया बताती है धारा 138 

क्या है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.

1974 में लागू हुई थी CrPC
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है.

 

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