बिहार के चर्चित सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की सुरक्षा का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. उन्होंने Z+ सिक्योरिटी देने में देरी को लेकर याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अहम टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की याचिकाएं आमतौर पर सीधे नहीं सुनी जातीं, लेकिन मामले में देरी को देखते हुए पटना हाई कोर्ट को निर्देश दिया गया है.
पप्पू यादव ने अपनी याचिका में दावा किया कि उन्हें सिर्फ कागजों पर Y कैटेगरी की सुरक्षा दी गई है, जो जमीन पर प्रभावी नहीं है. उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि इस सुरक्षा में केवल दो सुरक्षाकर्मी शामिल हैं, जो किसी भी गंभीर खतरे के सामने नाकाफी हैं. उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा व्यवस्था उनकी जान की रक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है.
सुनवाई के दौरान पप्पू यादव के वकील ने यह भी बताया कि उनके परिवार पर पहले भी हमला हो चुका है. खास तौर पर उनके भाई पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कोर्ट को बताया गया कि खतरा सिर्फ आशंका नहीं बल्कि वास्तविक है. इस वजह से उन्होंने Z+ सिक्योरिटी की मांग को जरूरी बताया.
वकील ने कोर्ट में यह भी कहा कि कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से उन्हें खुली धमकी मिल चुकी है. इस गैंग के नाम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह सीधा उनकी जान के लिए खतरा है. ऐसे में सिर्फ Y कैटेगरी सुरक्षा देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता.
हालांकि सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने सवाल उठाया कि जब उनके पास निजी सुरक्षाकर्मी भी हैं, तो फिर Y कैटेगरी सुरक्षा क्यों पर्याप्त नहीं है. उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां हैं कि Z+ सुरक्षा की जरूरत पड़ रही है. इस पर वकील ने दोहराया कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था बेहद सीमित है.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने इस मामले में स्पष्ट किया कि आमतौर पर इस तरह की याचिकाएं सीधे सुप्रीम कोर्ट में नहीं सुनी जातीं. उन्होंने कहा कि पहले निचली अदालतों में इस मामले की सुनवाई होनी चाहिए. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि याचिकाकर्ता ने 24 बार इस मामले को सूचीबद्ध करने की मांग की, लेकिन फिर भी सुनवाई नहीं हो सकी.
अंत में सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह इस मामले पर जल्द से जल्द विचार करे. कोर्ट ने कहा कि चूंकि याचिका को कई बार सूचीबद्ध करने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई, इसलिए हाई कोर्ट इस पर संज्ञान ले. अब इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई पटना हाई कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी.