उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस ने एक बड़े GST फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया है. इस मामले में करोड़ों रुपये के टैक्स चोरी और फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. पुलिस ने गैंग के एक सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से फर्जी कंपनियां बनाकर सरकार को भारी नुकसान पहुंचा रहा था. इस कार्रवाई को लेकर पुलिस और जांच एजेंसियां अब और गहराई से जांच कर रही हैं.
पुलिस के मुताबिक, इस गैंग ने फर्जी कंपनियों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल किया. इसके लिए आरोपियों ने फर्जी बिल और इनवॉइस तैयार किए और उन्हें GST रिटर्न में दिखाकर टैक्स चोरी की. इस पूरे फर्जीवाड़े के कारण सरकार को करीब 17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित अपराध है, जिसमें कई लोग शामिल हैं और यह रैकेट काफी समय से सक्रिय था.
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड का इस्तेमाल करके कई कंपनियां बनाई थीं. इन कंपनियों के जरिए वे नकली लेन-देन दिखाते थे और टैक्स चोरी करते थे. इसके अलावा, ई-वे बिल में हेरफेर कर भी टैक्स से बचने की कोशिश की गई. इस तरह के फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर आरोपियों ने सिस्टम को धोखा दिया और करोड़ों रुपये की हेराफेरी की.
पुलिस को इस पूरे मामले की जानकारी एक गुप्त सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मिली थी. इसके बाद जांच शुरू की गई और कई अहम सुराग जुटाए गए. इसी कड़ी में पुलिस ने गाजियाबाद निवासी 38 वर्षीय वसीम अकरम उर्फ मोनू को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के दौरान उसने अपने साथियों के साथ मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने की बात कबूल की है.
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वसीम अकरम ने कई फर्जी फर्म बनाकर टैक्स फ्रॉड किया और इस काम में उसके अन्य साथी भी शामिल थे. फिलहाल पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार करने का दावा किया जा रहा है. इस मामले में आगे की जांच जारी है और उम्मीद है कि और बड़े खुलासे हो सकते हैं.