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सरकारी पद का झांसा, 5 सितारा होटल में इंटरव्यू और फर्जी काउंसिल... हरियाणा के कारोबारी को ऐसे लगा 2.9 करोड़ का चूना

सरकारी काउंसिल में चेयरपर्सन बनाने का झांसा देकर हरियाणा के कारोबारी को शातिर ठगों ने छोटा-मोटा नहीं बल्कि 2.9 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया. इसी आरोप के साथ पीड़ित पुलिस तक पहुंचा. अब पुलिस ने छह लोगों पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पढ़ें पूरी कहानी.

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इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (सांकेतिक फोटो-ITG)
इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (सांकेतिक फोटो-ITG)

हरियाणा के एक कारोबारी को सरकारी पद और सत्ता की सुविधाओं का ऐसा लालच दिया गया कि उसे 2.9 करोड़ रुपये गंवाने पड़े. आरोप है कि छह लोगों ने मिलकर केंद्र सरकार से जुड़ी एक फर्जी काउंसिल बनाई और कारोबारी को हरियाणा में उसका चेयरपर्सन बनाने का झांसा दिया. 

मामला दिल्ली के चाणक्यपुरी थाने में दर्ज हुआ है. कारोबारी आयुर्वेदिक दवाइयों के निर्माण का काम करता है और सामाजिक सेवा में भी रुचि रखता है. इसी का फायदा उठाकर एक परिचित ने उसे पर्यावरण सुरक्षा से जुड़ी नई सरकारी काउंसिल के बारे में बताया.

इसके बाद कारोबारी को हरियाणा में काउंसिल का चेयरपर्सन बनाने की बात कही गई. उसकी मुलाकात आरोपियों में से एक से कराई गई, जिसने उसे जयपुर के रहने वाले एक व्यक्ति से मिलवाया. 

आरोप है कि चाणक्यपुरी के एक पांच सितारा होटल में कारोबारी का फर्जी इंटरव्यू कराया गया. वहां दो लोगों को काउंसिल से जुड़े अधिकारी के तौर पर पेश किया गया. उन्होंने दावा किया कि हरियाणा में पेड़ लगाने और उनके रखरखाव के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. कारोबारी को चेयरपर्सन बनने पर सरकारी गाड़ी, पुलिस सुरक्षा, वेतन, सरकारी आवास और दूसरी सुविधाएं मिलने का भरोसा भी दिया गया.

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आरोपियों ने कारोबारी को यह भी बताया कि चेयरपर्सन होने के नाते उसे पेड़ लगाने और दूसरे सरकारी कामों से जुड़े टेंडरों के फैसलों में भूमिका मिलेगी. इसके बाद कारोबारी ने इंटरनेट पर उस काउंसिल की वेबसाइट खोजी, जिससे उसे और उसके परिवार को भरोसा हो गया कि संस्था का संबंध किसी सरकारी मंत्रालय से है. 

नियुक्ति के लिए उससे बड़ी रकम मांगी गई. कारोबारी का आरोप है कि पैसे जुटाने के लिए उसे व्यापारियों से उधार लेना पड़ा और सोनीपत स्थित अपने घर को बैंक के पास गिरवी रखकर लोन भी लेना पड़ा. रकम कई बैंक खातों में ट्रांसफर कराने के साथ-साथ नकद भी ली गई और बाद में उसे एक नियुक्ति पत्र थमा दिया गया.

लेकिन नियुक्ति पत्र की जांच होते ही पूरा मामला संदिग्ध नजर आने लगा. कारोबारी को पता चला कि केंद्र सरकार ने ऐसी कोई काउंसिल बनाई ही नहीं थी और नियुक्ति पत्र भी फर्जी था. उसने आरोपियों में से एक से मुलाकात कर सवाल किया तो उसे फिर भरोसा दिलाया गया कि केंद्र से नियुक्ति की मंजूरी कुछ दिनों में मिल जाएगी. 

इसके बाद कारोबारी ने RTI दाखिल की, जिसमें सामने आया कि संबंधित मंत्रालय का इस काउंसिल से कोई संबंध नहीं है. उसे यह भी पता चला कि इस कथित काउंसिल को लेकर पहले से एक FIR दर्ज है. कारोबारी की शिकायत पर 13 अगस्त को चाणक्यपुरी पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और अब पूरे नेटवर्क तथा पैसों के लेन-देन की जांच की जा रही है.
 

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