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ED ने पहली बार नीलाम किया जब्त किया गया विमान, 3 करोड़ रुपये में बिका फाल्कन ग्रुप का हॉकर 800ए जेट

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पहली बार मनी लॉन्ड्रिंग केस में जब्त किए गए हॉकर (Hawker) 800A विमान को 3 करोड़ रुपये में नीलाम कर दिया. यह विमान 792 करोड़ रुपये के कथित पोंजी घोटाले के आरोपी अमरदीप कुमार और फाल्कन ग्रुप से जुड़ा था. पढ़ें क्या है ये पूरा मामला?

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ED ने पहली बार इस तरह की नीलामी की है (फोटो-ITG)
ED ने पहली बार इस तरह की नीलामी की है (फोटो-ITG)

देश में पहली बार प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जब्त किए गए एक विमान की नीलामी कर इतिहास रच दिया है. हैदराबाद जोनल ऑफिस ने हॉकर (Hawker) 800A विमान को 3 करोड़ रुपये में बेच दिया. यह विमान 792 करोड़ रुपये के कथित पोंजी घोटाले के आरोपी अमरदीप कुमार और उनकी कंपनी से जुड़े मामले में जब्त किया गया था. ED का कहना है कि नीलामी से प्राप्त रकम का इस्तेमाल पीड़ित निवेशकों को राहत देने के लिए किया जाएगा.

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने एक अभूतपूर्व कार्रवाई करते 1 जुलाई 2026 को एमएसटीसी (MSTC) लिमिटेड के जरिए हॉकर 800A विमान को 3 करोड़ रुपये में बेच दिया. यह देश में पहली बार हुआ है जब किसी जब्त विमान की नीलामी की गई है. इस कार्रवाई को मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ एजेंसी की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

यह हॉकर (Hawker) 800A विमान 7 मार्च 2025 को ED द्वारा की गई छापेमारी के दौरान जब्त किया गया था. विमान को हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से बरामद किया गया था. यह कार्रवाई अमरदीप कुमार, कैपिटल प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के मामले में की गई थी. ED को जांच के दौरान विमान के अपराध से अर्जित संपत्ति होने का शक हुआ था.

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विमान जब्त करने के बाद ED ने पीएमएलए (PMLA) की न्यायनिर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) के समक्ष मूल आवेदन दायर किया था. इस आवेदन पर सुनवाई के बाद 18 अगस्त 2025 को विमान की जब्ती को वैध ठहराते हुए पुष्टि कर दी गई. इसके बाद ED ने नियम 4(2) के तहत विमान की बिक्री की अनुमति मांगी, ताकि उसे नीलाम किया जा सके और उससे प्राप्त धनराशि को सुरक्षित रखा जा सके.

न्यायनिर्णायक प्राधिकरण ने 20 नवंबर 2025 को ED की याचिका स्वीकार करते हुए हैदराबाद जोनल कार्यालय को विमान की नीलामी की अनुमति दे दी. इसके बाद ED ने विमान की बिक्री के लिए प्रक्रिया शुरू की और सरकारी ई-नीलामी प्लेटफॉर्म MSTC लिमिटेड के माध्यम से इसकी नीलामी कराई. अंततः यह विमान 3 करोड़ रुपये की बोली पर बेचा गया.

ED ने यह मामला हैदराबाद की कंपनी कैपिटल प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमुख अमरदीप कुमार के खिलाफ दर्ज किया था. यह कार्रवाई साइबराबाद की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज तीन FIR के आधार पर शुरू की गई थी. आरोप है कि फाल्कन ग्रुप और उसके संचालकों ने निवेशकों को फर्जी इनवॉइस डिस्काउंटिंग स्कीम के नाम पर भारी मुनाफे का लालच दिया था.

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने निवेशकों से करोड़ों रुपये जुटाए, लेकिन वास्तविक रूप से कोई इनवॉइस डिस्काउंटिंग कारोबार संचालित नहीं किया गया. इसके बजाय निवेशकों को कथित रूप से एक पोंजी स्कीम के जरिए ठगा गया. इस कथित धोखाधड़ी का आकार लगभग 792 करोड़ रुपये बताया गया है. इस मामले में बड़ी संख्या में निवेशकों के साथ वित्तीय धोखाधड़ी किए जाने का आरोप है.

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इस मामले में ED ने पहले भी कई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां की थीं. गिरफ्तार आरोपियों में अमरदीप कुमार के भाई संदीप कुमार, चार्टर्ड अकाउंटेंट शरद चंद्र तोषणीवाल और फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग के CEO आर्यन सिंह छाबड़ा शामिल हैं. इन तीनों को जांच के दौरान हिरासत में लिया गया था. इसके अलावा ED ने 29 सितंबर 2025 को संबंधित अदालत में अभियोजन शिकायत भी दायर की थी.

ED ने स्पष्ट किया है कि विमान की नीलामी से प्राप्त 3 करोड़ रुपये की राशि को सुरक्षित रखा जाएगा. यह धनराशि PMLA, 2002 के प्रावधानों के तहत विशेष अदालत की अनुमति मिलने के बाद वास्तविक और प्रभावित निवेशकों को लौटाने की प्रक्रिया में उपयोग की जाएगी. एजेंसी का कहना है कि उसका उद्देश्य पीड़ित निवेशकों को न्याय दिलाना है.

प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि वह मनी लॉन्ड्रिंग से अर्जित संपत्तियों की पहचान, उनका पता लगाने, उन्हें जब्त करने और अंततः अपराधियों को इन संपत्तियों का लाभ उठाने से रोकने के लिए प्रतिबद्ध है. साथ ही, एजेंसी आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रही है और कानून के अनुसार पीड़ितों को उनकी धनराशि वापस दिलाने की दिशा में भी काम कर रही है.

देश में पहली बार किसी जब्त विमान की नीलामी का यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से आर्थिक अपराधों में शामिल लोगों को कड़ा संदेश जाएगा कि अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को न केवल जब्त किया जाएगा, बल्कि उन्हें बेचकर पीड़ितों को राहत भी पहुंचाई जाएगी.

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