दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े इस मॉड्यूल के दो ऑपरेटिव की गिरफ्तारी के बाद जांच तेज हो गई है. बरामद हथियारों और खुलासों से संकेत मिले हैं कि देश में बड़े आतंकी हमले की साजिश रची जा रही थी.
पुलिस ने इमरान (37) और मोहम्मद कमरान (27) नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. ये दोनों इस अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी नेटवर्क के मुख्य सप्लायर के तौर पर काम कर रहे थे. दोनों को 2 अप्रैल को IGI एयरपोर्ट पर लुकआउट सर्कुलर के आधार पर पूछताछ के बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया.
इस मामले में पहले ही 10 आरोपियों को पकड़ा जा चुका था. अब इन दो नई गिरफ्तारियों के बाद कुल आरोपियों की संख्या 12 हो गई है. पुलिस अब तक 23 अत्याधुनिक विदेशी हथियार और 211 कारतूस बरामद कर चुकी है. इनमें एक मशीन गन भी शामिल है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए UAPA की धाराएं भी जोड़ी गई हैं.
पुलिस की जांच में सामने आया है कि इमरान और कमरान नेटवर्क के मास्टरमाइंड शाहबाज अंसारी के बेहद करीबी हैं. इमरान उसका साला है, जबकि कमरान उसका चचेरा भाई है. दोनों पिछले करीब एक साल से इस आतंकी मॉड्यूल के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे थे. इमरान उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद का रहने वाला है.
वो अपने भाई के साथ डेयरी का काम करता है, जबकि कमरान बुलंदशहर में चूड़ी की दुकान पर काम करता है. सामान्य जीवन जीने वाले ये दोनों आरोपी बेहद शातिर तरीके से इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा बने हुए थे. इनका मुख्य काम नेपाल से आने वाली हथियारों की खेप को रिसीव करके सुरक्षित तरीके से भारत लाना था.
इसके बाद आगे सप्लाई करना था. दोनों लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट और डिलीवरी का पूरा जिम्मा संभालते थे. ये नेटवर्क बेहद सुनियोजित और हाई-टेक तरीके से काम कर रहा था. हथियारों को पहले पाकिस्तान से मंगाया जाता था, फिर उन्हें थाईलैंड के रास्ते नेपाल पहुंचाया जाता था, ताकि सीधे भारत से कनेक्शन छिपाया जा सके.
नेपाल पहुंचने के बाद हथियारों को अलग-अलग हिस्सों में तोड़ दिया जाता था. इसके बाद आरोपियों द्वारा गैर-कानूनी रास्तों से भारत लाया जाता था. यहां पहुंचने के बाद उन्हें फिर से जोड़कर तैयार किया जाता और गुप्त ठिकानों पर रखा जाता था. तस्करी करने वाली गाड़ियों में बेहद प्रोफेशनल तरीके से छिपे हुए खांचे बनाए जाते थे.
ये खांचे इतने चालाकी से तैयार किए जाते थे कि सामान्य जांच में उनका पता लगाना लगभग नामुमकिन होता था. बरामद की गई मारुति स्विफ्ट कार में भी ऐसे ही खांचे पाए गए हैं. पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर एक 0.30 बोर की चाइनीज पिस्टल, एक 0.32 बोर का रिवॉल्वर और 11 कारतूस बरामद किए हैं.
इसके अलावा तस्करी में इस्तेमाल होने वाली कार को भी जब्त किया गया है. जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे ISI का हाथ है. यह नेटवर्क भारत में अवैध हथियारों की सप्लाई कर आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा था. मास्टरमाइंड शाहबाज अंसारी पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के सीधे संपर्क में था.
उनके निर्देश पर भारत में गुर्गों के जरिए हथियारों की सप्लाई करवाता था. हथियारों की बिक्री से मिलने वाला पैसा भी आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाना था. पुलिस का मानना है कि ये हथियार किसी बड़े आतंकी हमले के लिए इस्तेमाल किए जा सकते थे. धार्मिक कार्यक्रमों, त्योहारों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाने की साजिश थी.