scorecardresearch
 

साल 2006 के हथियार बरामदगी केस में दोषी को राहत नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

साल 2006 के हथियार और विस्फोटक बरामदगी मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मोहम्मद आमेर शकील अहमद शेख की जमानत याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने उसकी भूमिका को सह-आरोपियों से ज्यादा गंभीर बताया. जानें अदालत ने क्या कहा?

Advertisement
X
अदालत ने आतंकी साजिश में भूमिका को गंभीर बताया (फोटो-ITG)
अदालत ने आतंकी साजिश में भूमिका को गंभीर बताया (फोटो-ITG)

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2006 के हथियार और विस्फोटक बरामदगी मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे मोहम्मद आमेर शकील अहमद शेख को राहत देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने उसकी सजा पर रोक लगाने और अपील लंबित रहने तक जमानत देने की मांग खारिज कर दी. हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में कथित बड़ी साजिश में शेख की भूमिका उन सह-आरोपियों के मुकाबले कहीं ज्यादा गंभीर है, जिन्हें अपील पर फैसला आने तक जमानत मिल चुकी है.

जस्टिस मनीष पिताले और जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की पीठ ने कहा कि पहली नजर में ऐसे उचित आधार मौजूद हैं, जिनसे शेख के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर विश्वास किया जा सकता है. अदालत ने उसकी याचिका खारिज करते हुए निर्देश दिया कि उसकी अपील और इससे जुड़ी अन्य अपीलों को अंतिम सुनवाई के लिए 7 दिसंबर 2026 को सूचीबद्ध किया जाए.

मोहम्मद आमेर शकील अहमद शेख को जुलाई 2016 में एक विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी. उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था. हालांकि, विशेष अदालत ने उसे महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के आरोपों से बरी कर दिया था. महाराष्ट्र सरकार ने इस बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है.

मुंबई एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) के मुताबिक, 9 मई 2006 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में घृष्णेश्वर मंदिर के पास एक टाटा सूमो को रोका गया था. जांच एजेंसी का दावा था कि गाड़ी में बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री ले जाई जा रही थी. तलाशी के दौरान 10 AK-47 राइफल, 40 मैगजीन, 200 जिंदा कारतूस और 30 किलोग्राम विस्फोटक पाउडर बरामद होने की बात कही गई थी.

Advertisement

ATS ने दावा किया था कि हथियारों और विस्फोटकों की यह खेप एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी, जिसका मकसद आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना था. इसी मामले में शेख को दोषी ठहराया गया और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई. अब सजा के खिलाफ उसकी अपील हाईकोर्ट में लंबित है.

हाईकोर्ट में शेख की ओर से दलील दी गई कि अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से MCOCA के तहत दर्ज किए गए इकबालिया बयानों पर आधारित है. उसने दावा किया कि ये बयान स्वेच्छा से नहीं दिए गए थे और बाद में उन्हें वापस भी ले लिया गया था. शेख ने यह भी कहा कि वह 20 साल से अधिक समय से हिरासत में है, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए.

हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया. पीठ ने कहा कि इकबालिया बयान वापस लेने में काफी देरी हुई और यह कदम बाद में सोचा गया विचार यानी आफ्टरथॉट प्रतीत होता है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि MCOCA के आरोपों से बरी होने के बावजूद UAPA की कार्यवाही में इन इकबालिया बयानों पर विचार किया जा सकता है.

हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इकबालिया बयान को स्वैच्छिक और साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने योग्य मानकर सही रुख अपनाया था. पीठ ने यह भी गौर किया कि अभियोजन पक्ष का मामला केवल कबूलनामों पर निर्भर नहीं था. जांच एजेंसी ने अपने दावों के समर्थन में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और दूसरे साक्ष्यों पर भी भरोसा किया था.

Advertisement

अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री को देखते हुए शेख के मामले को उन सह-आरोपियों के समान नहीं माना जा सकता, जिन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है. पीठ ने टिप्पणी की, 'याचिकाकर्ता का मामला उन सह-आरोपियों के समान नहीं है, जिन्हें जमानत दी गई है. वास्तव में, उसका मामला कहीं अधिक गंभीर है और एक ऊंचे स्तर पर है.'

हाईकोर्ट ने साफ किया कि लंबे समय तक जेल में रहना अपने आप में उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता. ऐसे मामलों में अपराध की प्रकृति, उसकी गंभीरता और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों को भी ध्यान में रखना जरूरी है. अदालत ने कहा कि किसी आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर विचार करते समय राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित से जुड़े पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

इन्हीं तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए पीठ ने शेख की सजा निलंबित करने की मांग खारिज कर दी. अब इस मामले में उसकी अपील और संबंधित अपीलों पर 7 दिसंबर 2026 को अंतिम सुनवाई के लिए विचार किया जाएगा. फिलहाल हाईकोर्ट से उसे जमानत नहीं मिली है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement