
जरा सोचिए, आप रोज की तरह सोमवार की सुबह अपने ऑफिस का सिस्टम ऑन करते हैं, अटेंडेंस लगाते हैं, अपने काम में जुट जाते हैं और सब कुछ बिल्कुल सामान्य चल रहा होता है. लेकिन लंच का वक्त आते-आते अचानक आपके पैरों तले जमीन खिसक जाए और आपको पता चले कि आपकी नौकरी जा चुकी है!
दिल्ली के एक 28 वर्षीय युवा इंजीनियर के साथ कुछ ऐसा ही खौफनाक वाकया 26 अक्टूबर को पेश आया. अमेरिकी डेटा इंजीनियरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सर्विस कंपनी 'इनडाटा' (Innodata) ने भारत में एक बड़ा झटका देते हुए लगभग 550 कर्मचारियों को रातों-रात नौकरी से बाहर कर दिया है. यह गाज सिर्फ भारत पर ही नहीं गिरी, बल्कि फिलीपींस में भी कंपनी की टीमों पर छंटनी की बड़ी मार पड़ी है.
लंच तक सब ठीक था, फिर अचानक गईं नौकरियां
पीड़ित कर्मचारियों ने इस खौफनाक अनुभव को साझा करते हुए बताया कि सोमवार की सुबह किसी आम दिन की तरह ही शुरू हुई थी. सबने लॉगिन किया, काम में व्यस्त हो गए. लेकिन दोपहर के वक्त अचानक सुगबुगाहट शुरू हुई कि फिलीपींस वाली टीम (जिसमें रेटर्स, क्वालिटी एक्सपर्ट्स और टीम लीड्स शामिल थे) को एक जूम कॉल के जरिए अचानक नौकरी से निकाल दिया गया है.
जब कुछ कर्मचारियों ने शक होने पर कंपनी के एचआर पोर्टल पर चेक किया, तो उनके होश उड़ गए. पोर्टल पर 26 अक्टूबर की तारीख को ही उनका 'आधिकारिक इस्तीफा' और आखिरी कामकाजी दिन (Last Working Day) दर्ज कर दिया गया था.
इससे पहले कि कर्मचारी कुछ समझ पाते या अपने मैनेजरों से संपर्क करते, एक के बाद एक उनके आधिकारिक डिवाइस लॉक होने लगे, लैपटॉप्स से लॉग-आउट हो गया और ऑफिशियल आईडी डीएक्टिवेट कर दी गईं. यहां तक कि वे अपनी पे-स्लिप या जरूरी दस्तावेज भी डाउनलोड नहीं कर पाए क्योंकि एचआर पेरोल ऐप का एक्सेस भी तुरंत छीन लिया गया. बाद में कर्मचारियों की पर्सनल ईमेल आईडी पर टर्मिनेशन (बरखास्तगी) के मेल गिरने शुरू हुए.
कंपनी ने क्या दी सफाई?
इंडिया टुडे के हाथ लगे टर्मिनेशन ईमेल के मुताबिक, कंपनी ने नौकरी से निकालने की वजह 'बिजनेस असाइनमेंट में कटौती' को बताया है. ईमेल में लिखा गया है, 'व्यापारिक और ऑपरेशनल जरूरतों को देखते हुए कंपनी ने इनडाटा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में आपकी सेवाओं को समाप्त करने का फैसला किया है.' हालांकि, कंपनी ने यह साफ किया है कि यह फैसला किसी कर्मचारी के व्यक्तिगत प्रदर्शन की वजह से नहीं लिया गया है.

रेडिट और आंतरिक चर्चाओं से सामने आए तथ्यों के मुताबिक, यह छंटनी मुख्य रूप से MUPSL प्रोजेक्ट से जुड़ी हुई थी, जिसमें अमेरिकी, फिलीपींस और भारतीय टीमों के एआई एनालिस्ट और प्रोसेस एनालिस्ट प्रभावित हुए हैं. एक बड़े क्लाइंट की तरफ से सर्विस वॉल्यूम घटने की वजह से पदों को रिडंडेंट घोषित किया गया.
साथ ही फुल एंड फाइनल सेटलमेंट को लेकर कहा गया है कि डिमांड ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है, जो कंपनी के सभी एसेट्स (लैपटॉप आदि) वापस मिलने के बाद सौंप दिया जाएगा. लेकिन हैरानी की बात यह है कि कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में यह नहीं बताया कि कुल कितने कर्मचारियों पर यह गाज गिरी है.
घबराए कर्मचारियों ने बनाया व्हाट्सऐप ग्रुप
अचानक नौकरी छिनने के बाद जब सिस्टम से सारे रास्ते बंद हो गए, तो इन डरे हुए और हताश कर्मचारियों ने आपस में जुड़ने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप का सहारा लिया. देखते ही देखते देर शाम तक उस ग्रुप में 500 से ज्यादा ऐसे लोग जुड़ चुके थे जो इस अचानक हुए फैसले से पूरी तरह सन्न और बेसहारा थे.
बता दें कि न्यू जर्सी स्थित 'इनडाटा' दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, एप्पल और सोनी जैसी दिग्गज कंपनियों को डेटा लेबलिंग, मॉडल ट्रेनिंग और सेफ्टी टेस्टिंग जैसी सेवाएं देती है. वैश्विक स्तर पर इसके पास हजारों कर्मचारी हैं, लेकिन इस अचानक हुई छंटनी ने एक बार फिर टेक और एआई सेक्टर के अस्थिर माहौल और कॉरपोरेट जगत की क्रूरता पर बहुत बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
टेक सेक्टर में बढ़ रही है अनिश्चितता
इनडाटा की यह छंटनी अकेले नहीं है. इसी दौरान माइक्रोसॉफ्ट ने भी अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और भारत की चुनिंदा टीमों के योग्य कर्मचारियों के लिए 'वॉलंटरी एग्जिट ऑफर' का ऐलान किया है, जो यह दिखाता है कि टेक और एआई सेक्टर में कंपनियां अपनी बिजनेस प्राथमिकताओं को कितनी तेजी से बदल रही हैं. बहरहाल, इनडाटा के कर्मचारियों के सामने अब सबसे बड़ा संकट यह है कि वे बिना किसी नोटिस के बाहर हो चुके हैं और अपने एम्प्लॉयमेंट रिकॉर्ड्स को जुटाने में जुटे हैं.