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इंस्टाग्राम, फेसुबक और यूट्यूब... महज 17 हजार रुपये में बंद कराने का दावा, सोशल मीडिया पर डिजिटल 'सुपारी किलर' एक्टिव

पैसे लेकर Facebook, Instagram और YouTube अकाउंट बंद कराने का दावा करने वाली वेबसाइटों का खुलासा. जानें मास रिपोर्टिंग का तरीका, इसकी कीमतें और क्रिएटर इकोनॉमी पर इसका असर. पढ़ें पूरी खबर.

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इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)
इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)

सोशल मीडिया पर किसी क्रिएटर का अकाउंट बंद कराने के लिए अब पैसे लेकर सामूहिक रिपोर्टिंग करने वाली सेवाएं उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है. डिजिटल 'सुपारी किलर' कहे जा रहे ये लोग मास रिपोर्टिंग के जरिए इंस्टाग्राम (Instagram), फेसबुक (Facebook) और यूट्यूब (YouTube) अकाउंट को निशाना बनाने की पेशकश करते हैं. India Today OSINT की पड़ताल में ऐसी पांच वेबसाइटों का पता चला है. इनकी सेवाओं की कीमत कुछ दर्जन रुपये से लेकर हजारों रुपये तक बताई गई है. ऐसे में सवाल उठता है कि रिपोर्टिंग सिस्टम का दुरुपयोग डिजिटल क्रिएटर्स की पहचान और कमाई को किस हद तक प्रभावित कर सकता है.

क्या है Mass Reporting का खेल?

मास रिपोर्टिंग में किसी सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ बड़ी संख्या में रिपोर्ट भेजी जाती हैं, ताकि प्लेटफॉर्म उस अकाउंट की समीक्षा करे और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई कर सके. रिपोर्टिंग सिस्टम का उद्देश्य अनुचित कंटेंट और नियम तोड़ने वाले अकाउंट की जानकारी देना है, लेकिन इसका समन्वित दुरुपयोग किसी व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए भी किया जा सकता है. हालांकि, रिपोर्ट किए जाने भर से किसी अकाउंट का बंद होना तय नहीं है.

अकाउंट हटवाने का दावा

India Today OSINT को मिली पांच वेबसाइटें Instagram, Facebook, YouTube और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए Mass Reporting सेवाएं देने का दावा करती हैं. इनमें से एक वेबसाइट करीब 17,000 रुपये में Facebook प्रोफाइल, 23,000 रुपये में बिजनेस पेज और 28,000 रुपये में ग्रुप हटवाने की बात कहती है.

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एक अन्य वेबसाइट YouTube अकाउंट बंद कराने की पेशकश करती है. उसका कहना है कि लक्षित अकाउंट की समीक्षा के बाद कीमत और काम पूरा करने की समयसीमा बताई जाएगी. ये वेबसाइटों के अपने दावे हैं. इनकी सेवाओं से वास्तव में अकाउंट बंद कराया जा सकता है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

Naizop और SMM Pirat की सेवाएं

Naizop नाम की वेबसाइट Instagram के लिए 'Report Bots' बेचती है. इसकी एक सेवा की कीमत 36 रुपये बताई गई है. वेबसाइट का दावा है कि उसके प्रीमियम पैकेज में पुराने और सक्रिय दिखने वाले अकाउंट से रिपोर्टिंग की जाती है. वह ग्राहकों को लक्षित अकाउंट के फॉलोअर्स या लाइक्स में अचानक बढ़ोतरी को रिपोर्ट करने की सलाह भी देती है, ताकि इंस्टाग्राम के ऑटोमेटेड सिस्टम को उस पर शक हो. हालांकि, वेबसाइट अकाउंट हटने की गारंटी नहीं देती.

दूसरी वेबसाइट SMM Pirat पर Instagram रिपोर्टिंग के 20 प्लान सूचीबद्ध हैं, जिनकी शुरुआती कीमत 46 रुपये है. यह वेबसाइट अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए भी ऐसी सेवाएं देने का दावा करती है. कुछ विक्रेता अपनी सेवाओं को फर्जी अकाउंट और ट्रोल्स के खिलाफ कार्रवाई में मददगार बताते हैं और ग्राहकों की पहचान गुप्त रखने का दावा करते हैं. 

Naizop का कहना है कि अपने तरीकों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए वह सेवा पूरी होने का सबूत साझा नहीं कर सकती. कई सेवाएं Telegram या WhatsApp के जरिए संपर्क करती हैं, जबकि कुछ केवल क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान स्वीकार करती हैं.

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हरीश की मौत के बाद चर्चा

डिजिटल रिपोर्टिंग के कथित दुरुपयोग का मुद्दा चेन्नई के 27 वर्षीय फाइनेंस इन्फ्लुएंसर वी. हरीश की मौत के बाद चर्चा में है. 'Finance With Harish' के नाम से मशहूर हरीश के एक मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स थे. 20 अक्टूबर को उनकी आत्महत्या से मौत हो गई. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मौत से पहले के हफ्तों में उन्होंने अपने अकाउंट्स का एक्सेस खो दिया था और उनके चैनल को कई बार Mass Reporting का सामना करना पड़ा था.

पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में केस दर्ज किया है. हालांकि, Mass Reporting का उनकी मौत से कोई संबंध था या नहीं, यह अब तक स्थापित नहीं हुआ है. इसलिए दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध मानना सही नहीं होगा.

भारत में तेजी से बढ़ रही क्रिएटर इकोनॉमी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की पिछले साल जारी की गई प्रेस रिलीज के मुताबिक, भारत की डिजिटल क्रिएटर इकोनॉमी से 20 से 25 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष राजस्व जुड़ा है. अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर 100 से 125 अरब डॉलर हो सकता है.

अमेरिका स्थित Boston Consulting Group (BCG) के मुताबिक, भारतीय क्रिएटर्स सालाना 350 अरब डॉलर से ज्यादा के उपभोक्ता खर्च को प्रभावित करते हैं. 2030 तक यह आंकड़ा एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक होने का अनुमान है. वहीं, Google के मुताबिक, 2025 में YouTube के क्रिएटिव इकोसिस्टम ने भारत की GDP में 18,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का योगदान दिया और 9.6 लाख से अधिक पूर्णकालिक नौकरियों को समर्थन दिया.

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अकाउंट बंद होने से कमाई पर असर

क्रिएटर्स के लिए सोशल मीडिया अकाउंट दर्शकों तक पहुंचने, विज्ञापन हासिल करने और ब्रांड पार्टनरशिप से कमाई करने का प्रमुख जरिया है. अकाउंट निलंबित होने या उसकी पहुंच प्रभावित होने से उनकी आय पर असर पड़ सकता है. इसका प्रभाव उन लोगों पर भी पड़ सकता है, जो वीडियो निर्माण और दूसरे कामों में क्रिएटर्स के साथ जुड़े होते हैं.

Meta ने अपने रिपोर्टिंग फीचर के समन्वित दुरुपयोग को सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. कंपनी के मुताबिक, ऐसी गतिविधियों का इस्तेमाल लोगों की आवाज दबाने के लिए किया जा सकता है. हालांकि, किसी अकाउंट के खिलाफ रिपोर्ट आने और उसके निलंबित होने के बीच प्लेटफॉर्म की समीक्षा प्रक्रिया भी अहम है. ऐसे में किसी अकाउंट पर हुई कार्रवाई की वजह की पुष्टि किए बिना उसे Mass Reporting का नतीजा नहीं माना जा सकता.

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