इंस्टाग्राम पर रील बनाने वाले नौजवानों को पहले फॉलो करना, फिर उनसे बातचीत शुरू करना और धीरे-धीरे उन्हें अपने जाल में फंसाना. पाकिस्तान में बैठे कुछ लोगों पर भारत के युवाओं को इसी तरीके से आतंकी गतिविधियों में शामिल करने की साजिश रचने का आरोप है. आज तक/इंडिया टुडे की एक्सक्लूसिव पड़ताल में सामने आया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर सोशल मीडिया को कथित तौर पर आतंक का नया हथियार बनाया जा रहा है.
इस नेटवर्क के निशाने पर खासतौर पर 18 से 25 साल के युवा हैं. जांच में दावा किया गया है कि इंस्टाग्राम के जरिए संपर्क बनाकर युवाओं का ब्रेनवॉश किया जाता है और फिर उन्हें अलग-अलग आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार किया जाता है.
पंजाब में टारगेट किलिंग की घटनाएं, जालंधर में BSF हेडक्वार्टर पर बम ब्लास्ट और झारखंड में RSS कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला किया गया. इन घटनाओं के पीछे पाकिस्तान में बैठे नेटवर्क की भूमिका की जांच की जा रही है. पड़ताल में दावा किया गया है कि इन गतिविधियों के लिए सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं को अपने साथ जोड़ा गया.
सवाल यह है कि आखिर इंस्टाग्राम पर रील और मैसेज के जरिए नौजवानों को किस तरह प्रभावित किया जा रहा है? कौन हैं ISI के वे पांच कथित मोहरे, जो भारत के युवाओं को निशाना बना रहे हैं? और कैसे एक पाकिस्तानी गैंगस्टर का नेटवर्क कई राज्यों तक फैल गया?
17 अगस्त: गृह मंत्री का खुलासा
इस पूरे मामले में 17 अगस्त की तारीख अहम है. देश के गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जानकारी दी थी कि स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त के मौके पर भारत में बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम किया गया. अमित शाह के मुताबिक, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और शहजाद भट्टी के नेटवर्क के खिलाफ देश के 14 राज्यों में कई एजेंसियों ने एक साथ कार्रवाई की थी. इस अभियान में 200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई थी. इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान से संचालित बताए जा रहे नेटवर्क और उसके भारतीय संपर्कों की जांच तेज हो गई.
16 सितंबर: शहजाद भट्टी के नेटवर्क पर UAPA एक्शन
इसके बाद 16 सितंबर को गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया के जरिए एक और बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने शहजाद भट्टी के नेटवर्क को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आतंकी संगठनों की सूची में शामिल किया है. इस कार्रवाई के बाद सवाल उठने लगे कि आखिर पाकिस्तान में बैठा एक गैंगस्टर भारत में इतना बड़ा नेटवर्क कैसे तैयार करने में कामयाब हुआ? उसके संपर्क में देश के अलग-अलग राज्यों के युवा कैसे आए? और किस तरह सोशल मीडिया के जरिए उन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा रहा था? आज तक/इंडिया टुडे की पड़ताल में इस नेटवर्क के काम करने के तरीके और इसके कथित संचालकों के बारे में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं.
ISI के पांच कथित मोहरे, इंस्टाग्राम का इस्तेमाल
जांच से जुड़े इनपुट के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे शहजाद भट्टी के अलावा आबिद जट्ट, अजमल गुर्जर, राणा हुसैन और हसन गुर्जर के नाम सामने आए हैं. आरोप है कि ये पांचों पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के अलग-अलग अकाउंट के जरिए भारतीय युवाओं से संपर्क करते थे. शुरुआत में युवाओं की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी और फिर उन्हें मैसेज भेजकर बातचीत शुरू की जाती थी. धीरे-धीरे उन्हें अपने प्रभाव में लेकर कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों के लिए उकसाया जाता था.
इस नेटवर्क में युवाओं को कई तरह के लालच दिए जाने की बात सामने आई है. किसी को विदेश में सेटल कराने का भरोसा दिया जाता था तो किसी को पाकिस्तान में बसाने का प्रस्ताव दिया जाता था. कुछ युवाओं को मोटी रकम और परिवार की आर्थिक मदद का लालच दिया जाता था. वहीं, कुछ लोगों को धार्मिक भावनाओं के नाम पर भड़काकर दूसरे समुदाय के लोगों के खिलाफ नफरत पैदा करने की कोशिश की जाती थी. जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस तरह सोशल मीडिया पर शुरू हुई बातचीत धीरे-धीरे युवाओं को गंभीर आपराधिक और आतंकी गतिविधियों की तरफ धकेलने का जरिया बन रही थी.
700 से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई
पंजाब समेत कई राज्यों में शहजाद भट्टी और उसके नेटवर्क से जुड़ी कथित आतंकी गतिविधियों के इनपुट मिलने के बाद खुफिया एजेंसियां सतर्क हुईं. इस नेटवर्क की जानकारी गृह मंत्रालय तक पहुंचाई गई, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसियों और अलग-अलग राज्यों की पुलिस ने मिलकर अभियान शुरू किया. पड़ताल में सामने आई जानकारी के मुताबिक, अब तक इस नेटवर्क से जुड़े 700 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसके अलावा 700 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. इनमें से कई युवाओं की काउंसलिंग भी कराई गई और उन्हें समझाने के बाद छोड़ दिया गया. एजेंसियों का मकसद सिर्फ आरोपियों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए आतंकी नेटवर्क के प्रभाव में आ रहे युवाओं को समय रहते बचाना भी था.
पहला खुलासा: इंस्टाग्राम पर विवादित वीडियो
आज तक/इंडिया टुडे की पड़ताल में एक ऐसे युवक का बयान सामने आया, जो इंस्टाग्राम पर विवादित वीडियो बनाता था और उसके करीब तीन लाख फॉलोअर्स थे. युवक के मुताबिक, वह धार्मिक मुद्दों पर वीडियो बनाता था और सोशल मीडिया पर दूसरे लोगों के वीडियो का जवाब देता था. इसी दौरान अभिषेक ठाकुर नाम के एक व्यक्ति को लेकर उसकी सोशल मीडिया पर बहस चल रही थी. युवक ने बताया कि एक दिन उसे इंस्टाग्राम पर एक मैसेज आया, जिसमें सिर्फ 'HI' लिखा था. उसने जवाब दिया तो सामने वाले व्यक्ति की प्रोफाइल पर एक शख्स की तस्वीर लगी हुई थी. बाद में पता चला कि उसका नाम शहजाद भट्टी था.
युवक के मुताबिक, शहजाद भट्टी ने उससे अभिषेक ठाकुर का पता मांगा. युवक ने कहा कि उसे उस व्यक्ति के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है और वह सिर्फ वीडियो बनाता है. इसके बाद भट्टी ने उसे पैसे देकर अपने लिए काम करने का प्रस्ताव दिया. युवक का दावा है कि भट्टी ने उसे अभिषेक ठाकुर की हत्या करने के लिए कहा और इसके बदले पैसे देने की बात कही. उसने यह भी बताया कि बाद में भट्टी ने उसे नेपाल आने का प्रस्ताव दिया. वहां फर्जी पासपोर्ट बनवाने और उसे बुलाने की बात कही गई. इसके बाद पाकिस्तान और दुबई बुलाने तथा मोटी रकम देने का लालच भी दिया गया.
शहजाद भट्टी ने किया ब्रेनवॉश
पूछताछ के दौरान युवक ने बताया कि वह धार्मिक मुद्दों पर वीडियो बनाता था. मस्जिदों को गिराए जाने और पैगंबर के अपमान से जुड़े मुद्दों पर वह सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देता था. युवक के मुताबिक, अभिषेक ठाकुर के कुछ वीडियो और बयानों से वह नाराज था. इसी नाराजगी का फायदा शहजाद भट्टी ने उठाया. उसने युवक को धार्मिक भावनाओं के नाम पर उकसाया और कथित तौर पर हत्या के लिए तैयार करने की कोशिश की. युवक ने स्वीकार किया कि उस समय वह भट्टी की बातों से प्रभावित हो गया था, लेकिन किसी की हत्या करने की बात उसके लिए गलत थी.
युवक ने बातचीत के दौरान कहा, 'शहजाद भट्टी ने मेरा ब्रेनवॉश कर दिया था.' उसके मुताबिक, भट्टी ने उसे समझाया कि अगर कोई पैगंबर की शान में गुस्ताखी करता है तो उसे बर्दाश्त नहीं करना चाहिए. इसी बहाने उसे भड़काया गया और पैसे के साथ विदेश जाने का लालच दिया गया. युवक के दावे के मुताबिक, भट्टी ने यह भी कहा था कि दिल्ली और दूसरी जगहों पर उसके कई लड़के हैं और कुछ युवाओं को पाकिस्तान भी बुलाया जा चुका है. हालांकि, बाद में युवक का इंस्टाग्राम अकाउंट स्ट्राइक मिलने के बाद डिलीट हो गया और एक एजेंसी ने उसे पकड़ लिया.
मस्जिद का वीडियो बनाने की बात कबूली
पूछताछ में युवक से यह भी पूछा गया कि हाल में उसने किस मस्जिद को लेकर वीडियो बनाया था. इस पर उसने पुरानी दिल्ली की दरगाह फैज इलाही मस्जिद का जिक्र किया. उसने बताया कि जब वहां मस्जिद गिराई गई तो उसने इस घटना का वीडियो बनाया था. पूछे जाने पर कि यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर हुई थी, युवक ने अपनी गलती स्वीकार की. उसने बताया कि उस समय वह शिमला में था और वहीं से उसने वीडियो बनाया था. बाद में वह पुलिस के सामने भी पेश हुआ था. युवक ने कहा कि उसे इस मामले में अपनी गलती का अहसास हुआ.
युवक के मुताबिक, जब एजेंसी ने उसे बताया कि वह पाकिस्तान में बैठे एक व्यक्ति के संपर्क में था और वह व्यक्ति गलत गतिविधियों में शामिल है, तब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ. उसने कहा कि उसे बाद में समझ आया कि वह अनजाने में अपने ही देश के खिलाफ काम करने वाले व्यक्ति के संपर्क में आ गया था. अब उसे इस बात का पछतावा है कि उसने शहजाद भट्टी से बातचीत की. उसने देश के लोगों, खासकर अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखें. यह भी देखें कि बच्चे किससे बात कर रहे हैं और किस तरह के कंटेंट से प्रभावित हो रहे हैं.
दूसरा खुलासा: मदद के नाम पर संपर्क और लालच
पड़ताल में एक दूसरे युवक का बयान भी सामने आया, जिसने बताया कि इंस्टाग्राम पर शहजाद भट्टी की रील देखकर वह उसके संपर्क में आया था. युवक के मुताबिक, भट्टी की रील में कहा जाता था कि किसी भाई या बहन को मदद की जरूरत हो तो उससे संपर्क करें. वीडियो के साथ दिए गए लिंक में एक मोबाइल नंबर था. युवक ने उस नंबर से व्हाट्सऐप पर मैसेज और कॉलिंग के जरिए संपर्क किया. करीब दो-तीन दिन बाद उसे जवाब मिला. युवक ने बताया कि उसने अपनी आर्थिक परेशानी का जिक्र करते हुए भट्टी से काम मांगा था. इसके बाद भट्टी ने उसे काम दिलाने का भरोसा दिया और कुछ दिन इंतजार करने को कहा.
युवक के मुताबिक, तीन दिन बाद शहजाद भट्टी ने उसे व्हाट्सऐप पर एक ऐसी वॉयस रिकॉर्डिंग भेजी, जिसे सिर्फ एक बार सुना जा सकता था. रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर कहा गया कि दिल्ली से कुछ सामान पंजाब पहुंचाना है और इसके बदले उसे 60 से 70 हजार रुपये दिए जाएंगे. युवक ने शुरुआत में इस काम के लिए हामी भर दी थी. लेकिन बाद में उसने अपनी पत्नी को इस बारे में बताया. पत्नी को वह व्यक्ति संदिग्ध लगा और उसने सावधान रहने की सलाह दी. इसके बाद युवक ने उस काम को करने से इनकार कर दिया और भट्टी से किसी दूसरे काम के बारे में पूछा.
शहजाद भट्टी ने बताया था- 'मैं पाकिस्तान से हूं'
युवक ने बताया कि काम से इनकार करने के बावजूद शहजाद भट्टी से उसकी बातचीत जारी रही. दोनों के बीच वीडियो कॉल भी हुई. इस दौरान भट्टी ने उससे पंजाब के हालात पूछे और जब युवक ने उसकी पहचान जाननी चाही तो उसने खुद को पाकिस्तान का रहने वाला बताया. उसने अपना नाम शहजाद भट्टी बताया और युवक को मदद करने का भरोसा दिया. युवक के मुताबिक, भट्टी ने कहा कि उसे उसके लिए काम करना होगा. इसके बाद उसने दिल्ली से आने वाले एक लड़के की जानकारी और लोकेशन साझा करने को कहा.
युवक के बयान के मुताबिक, भट्टी ने बताया था कि दिल्ली से एक लड़का उसके पास आएगा. युवक को उस लड़के का नंबर और लोकेशन भेजनी थी. इसके बाद उससे सामान लेकर पंजाब पहुंचाने का काम करना था. युवक ने इस काम को करने से मना कर दिया और पैसे की जरूरत बताते हुए कोई दूसरा काम देने की बात कही. भट्टी ने उसे दो-तीन दिन और इंतजार करने के लिए कहा. लेकिन इससे पहले ही एजेंसी के अधिकारी उसके पास पहुंच गए और उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी.
सिद्धू मूसेवाला के नाम पर भी कोशिश
दूसरे युवक ने यह भी बताया कि वह शहजाद भट्टी के सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किए गए वीडियो देखकर प्रभावित हुआ था. उसके मुताबिक, भट्टी वीडियो में दावा करता था कि उसने भारत में मस्जिदों और गुरुद्वारों की मदद के लिए पैसे दिए हैं. वह चार लाख और 30 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद करने की बातें भी करता था. इसी तरह के वीडियो देखकर युवक ने उसे फॉलो करना शुरू कर दिया. युवक को लगता था कि भट्टी धार्मिक और सामाजिक काम करने वाला व्यक्ति है.
युवक ने बताया कि भट्टी ने पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को लेकर भी एक वीडियो बनाया था. उसमें उसने दावा किया था कि सिद्धू मूसेवाला के हत्यारों से बदला जरूर लेगा, चाहे इसके लिए उसे अपनी जान ही क्यों न देनी पड़े. युवक के मुताबिक, उसे यह वीडियो अच्छा लगा था और उसे लगा कि भट्टी सिद्धू मूसेवाला के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए कुछ करना चाहता है. इसी तरह के वीडियो और दावों के जरिए वह उसके प्रभाव में आ गया.
हमलों की खबरों की रील
युवक के मुताबिक, शहजाद भट्टी को फॉलो करने के बाद उसने उसके अकाउंट पर पंजाब में हुए हमलों और बम ब्लास्ट से जुड़ी रील भी देखीं. इनमें जालंधर में हुए ब्लास्ट की खबर का भी जिक्र था. युवक ने बताया कि इन वीडियो को देखकर उसे धीरे-धीरे भट्टी की गतिविधियों और उसके असली इरादों पर शक होने लगा. बाद में जब एजेंसी ने उसे पूछताछ के दौरान बताया कि भट्टी कई युवाओं को अपने जाल में फंसाकर उनसे काम करवाता है, तब उसे पूरी बात समझ में आई. उसे बताया गया कि इस नेटवर्क में फंसने वाले कई युवा बाद में जेल पहुंच जाते हैं और उनका भविष्य बर्बाद हो जाता है.
युवाओं और अभिभावकों के लिए चेतावनी
दोनों युवकों के बयान सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को प्रभावित करने के कथित तरीकों की ओर इशारा करते हैं. पहले मामले में धार्मिक भावनाओं और विवादित कंटेंट के जरिए संपर्क बढ़ाने की बात सामने आई, जबकि दूसरे मामले में आर्थिक मदद, रोजगार और मोटी रकम का लालच देने का दावा किया गया. जांच एजेंसियों के मुताबिक, ऐसे नेटवर्क का निशाना मुख्य रूप से 18 से 25 साल के युवा हैं, जिन्हें सोशल मीडिया पर पहचानकर धीरे-धीरे अपने प्रभाव में लेने की कोशिश की जाती है. कई बार शुरुआत में सामान्य बातचीत या मदद के प्रस्ताव से शुरू हुआ संपर्क बाद में संदिग्ध गतिविधियों तक पहुंच जाता है.
दूसरे युवक ने पंजाब और देश के नौजवानों से अपील की कि वे शहजाद भट्टी जैसे लोगों के जाल में न फंसें. उसका कहना था कि ऐसे लोग युवाओं को लालच देकर अपने लिए काम करवाते हैं और जब जांच एजेंसियां कार्रवाई करती हैं तो जेल में युवाओं को ही जाना पड़ता है. वहीं, पहले युवक ने मां-बाप से अपील की कि वे अपने बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखें. आखिर सवाल सिर्फ एक इंस्टाग्राम अकाउंट या एक रील का नहीं है, बल्कि उस पूरे नेटवर्क का है जो कथित तौर पर सोशल मीडिया को इस्तेमाल कर युवाओं को कट्टरपंथ और आतंकी गतिविधियों की तरफ धकेलने की कोशिश कर रहा है.