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मैग्लेव, टैल्गो, शिंकानसेन से यूरोस्टार तक... ये हैं दुनिया की स्पीडस्टर ट्रेनें, देखें लिस्ट में वंदे भारत कहां?

दुनिया में ट्रेनें अब सिर्फ सफर का साधन नहीं, बल्कि रफ्तार की मिसाल बन चुकी हैं. चीन की शंघाई मैग्लेव करीब 460 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है, जबकि कई हाई-स्पीड ट्रेनें 300 से 400 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ती हैं. जापान और यूरोप भी इस दौड़ में काफी आगे हैं.

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शंघाई मैग्लेव, स्पैनिश टैल्गो, यूरोस्टार (L to R) दुनिया की सबसे तेज ट्रेनों में शामिल हैं. (Photo: X)
शंघाई मैग्लेव, स्पैनिश टैल्गो, यूरोस्टार (L to R) दुनिया की सबसे तेज ट्रेनों में शामिल हैं. (Photo: X)

ट्रेन से सफर करने का मतलब कभी घंटों और कई बार पूरा दिन यात्रा में बिताना होता था. लेकिन दुनिया के कई देशों ने रेल की तस्वीर बदल दी है. ऐसी ट्रेनें पटरी पर दौड़ रही हैं, जो 300 से 400 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती हैं. कुछ ट्रेनों की रफ्तार तो 400 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा है. इनमें सबसे खास है मैग्लेव टेक्नोलॉजी, जिसमें ट्रेन पहियों के सहारे नहीं बल्कि मैग्नेटिक फोर्स से पटरी के ऊपर चलती है. अगर आप सोच रहे हैं कि दुनिया की सबसे तेज ट्रेन कौन सी है और भारत इस दौड़ में कहां खड़ा है, तो आइए जानते हैं...

ये हैं दुनिया की सबसे तेज ट्रेनें

  • Shanghai Maglev: करीब 460 km/h
  • CR450 Fuxing: करीब 400 km/h
  • CR400 Fuxing: करीब 350 km/h
  • Talgo 350/Avril: करीब 350 km/h
  • ICE 3: करीब 330 km/h
  • TGV M: करीब 320 km/h
  • Eurostar e320: करीब 320 km/h
  • Shinkansen E5/H5: करीब 320 km/h
  • KTX-Cheongyong: करीब 320 km/h
  • Vande Bharat: डिजाइन क्षमता करीब 180 km/h

शंघाई मैग्लेव की 460 Kmph रफ्तार

दुनिया की सबसे तेज ट्रेनों में चीन की शंघाई मैग्लेव (Shanghai Maglev) सबसे ऊपर है. इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 460 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई जाती है. यह ट्रेन शंघाई पुडोंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लोंगयांग रोड स्टेशन से जोड़ती है. इसमें मैग्लेव टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है. यानी ट्रेन सामान्य ट्रेनों की तरह पहियों के सहारे पटरी पर नहीं दौड़ती, बल्कि चुंबकीय ताकत की मदद से पटरी के ऊपर चलती है. यही तकनीक इसे बहुत तेज रफ्तार हासिल करने में मदद करती है.

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Shanghai Maglev Train
शंघाई मैग्लेव ट्रेन. 

चीन की CR450 Fuxing पीछे नहीं

चीन की सीआर450 फक्सिंग (CR450 Fuxing) भी दुनिया की सबसे तेज पैसेंजर ट्रेनों में शामिल है. इसकी रफ्तार करीब 400 किलोमीटर प्रति घंटे तक है. इसे तेज रफ्तार के साथ कम ऊर्जा खर्च करने के हिसाब से भी तैयार किया गया है. इसके बारे में दावा है कि यह पिछली पीढ़ी की तुलना में करीब 10% कम ऊर्जा खपत के लिए डिजाइन की गई है.

CR450 Fuxing
चीन की सीआर400 फक्सिंग ट्रेन.

ये ट्रेनें भी 350 की स्पीड से चलती हैं

चीन की सीआर400 फक्सिंग (CR400 Fuxing) भी हाई-स्पीड रेल की दुनिया में काफी अहम है. यह करीब 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है. यह ट्रेन बीजिंग-शंघाई और बीजिंग-ग्वांगझाउ जैसे व्यस्त रूट पर सेवा देती है. इसके अलावा चीन की सीआरएच380ए हेक्सी (CRH380A Hexie) भी करीब 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है. ट्रायल के दौरान इस ट्रेन ने 486.1 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार दर्ज की थी. यानी चीन ने हाई-स्पीड रेल के मामले में सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि पूरा नेटवर्क तैयार किया है.

CRH380A Hexie
चीन की सीआरएच380ए हेक्सी ट्रेन.

यूरोप की ट्रेनें भी किसी से कम नहीं

यूरोप में भी कई हाई-स्पीड ट्रेनें 300 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से चलती हैं. स्पेन की टैल्गो 350 (Talgo 350) और एव्रिल ट्रेन (Avril Train) करीब 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकती हैं. इसके आगे का डिजाइन बतख की चोंच जैसा दिखता है, इसलिए इसे Pato भी कहा जाता है, जिसका स्पेनिश और पुर्तगाली में मतलब बतख होता है. इस डिजाइन को तेज रफ्तार और मोड़ पर बेहतर स्थिरता के लिए तैयार किया गया है.

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Spain Talgo Train
स्पेन की टैल्गो ट्रेन.

जर्मनी की ICE 3 ट्रेन करीब 330 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है. वहीं फ्रांस की TGV M करीब 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हाई-स्पीड ट्रेन है. इसकी टेस्टिंग के दौरान 574.8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था. ध्यान रहे कि यह ट्रायल के दौरान हासिल की गई रफ्तार है, सामान्य यात्री सेवा की रफ्तार नहीं.

ICE 3
जर्मनी की ICE 3 ट्रेन.

यूरोप की Eurostar e320 भी करीब 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है. यह ट्रेन London, Paris और Brussels जैसे शहरों को जोड़ती है. इसकी खासियत यह है कि यह करीब 50 किलोमीटर लंबी Channel Tunnel से होकर गुजरती है. यानी एक ही ट्रेन अंतरराष्ट्रीय रेल नेटवर्क के जरिए अलग-अलग देशों को जोड़ती है.

Eurostar e320
यूरोप की Eurostar e320 ट्रेन.

जापान की शिनकानसेन है काफी तेज

जापान की E5 और H5 सीरीज शिनकानसेन (Shinkansen) ट्रेनें करीब 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं. ये टोक्यो और शिन-आओमोरी (Shin-Aomori) के बीच चलने वाली हाई-स्पीड रेल सेवा का हिस्सा हैं. इन ट्रेनों के आगे करीब 15 मीटर लंबी नुकीली नाक जैसा डिजाइन दिया गया है. इसका मकसद खास तौर पर सुरंग में ट्रेन के प्रवेश के दौरान होने वाले शोर और हवा के दबाव को कम करना है. दक्षिण कोरिया की केटीएक्स-चेओंगयोंग (KTX-Cheongyong) भी करीब 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचती है. इसमें हल्की एल्युमिनियम बॉडी का इस्तेमाल किया गया है, जिससे ट्रेन को तेजी से रफ्तार पकड़ने में मदद मिलती है.

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Japan Shinkansen Train
जापान की शिनकानसेन ट्रेन. 

इटली से अफ्रीका तक हाई-स्पीड रेल

तेज रफ्तार ट्रेनों का नेटवर्क अब सिर्फ चीन, जापान और यूरोप के कुछ देशों तक सीमित नहीं है. इटली की फ्रेकियारोसा 1000 (Frecciarossa 1000) और दक्षिण कोरिया की KTX सीरीज अपने-अपने हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का हिस्सा हैं. अफ्रीका में भी मोरक्को की अल बोराक (Al Boraq) ट्रेन हाई-स्पीड रेल सेवा का उदाहरण है. यानी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रेलवे धीरे-धीरे कम समय में लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेनों की तरफ बढ़ रहा है.

Frecciarossa 1000
इटली की फ्रेकियारोसा 1000 ट्रेन. 

हाई स्पीड रेल में भारत कहां खड़ा है?

अब बात भारत की. भारत में वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) ने तेज और आधुनिक रेल यात्रा की दिशा में बड़ा बदलाव दिखाया है. इसकी डिजाइन क्षमता करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक की है, हालांकि सामान्य परिचालन में इसकी रफ्तार रूट और ट्रैक की क्षमता के हिसाब से कम रहती है. वंदे भारत में तेज रफ्तार पकड़ने के साथ आधुनिक यात्री सुविधाएं और सुरक्षा से जुड़े फीचर दिए गए हैं. इसके अलावा भारत मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के जरिए बुलेट ट्रेन नेटवर्क की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है. इस प्रोजेक्ट में जापान की हाई-स्पीड रेल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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