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Zerodha वाले नितिन कामथ ने UPI MDR में निकाली बड़ी खामी, ब्रोकरेज हाउस के लिए संकट

New UPI MDR Framework: ब्रोकिंग अकाउंट में पैसे डालना आम निवेशक के लिए एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन UPI के नए MDR फ्रेमवर्क ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जेरोधा के फाउंडर और CEO नितिन कामथ ने इस नए फ्रेमवर्क को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है.

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जेरोधा के फाउंडर और सीईओ नितिन कामथ ने ब्रोकर्स के लिए नए यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क को लेकर चिंता जताई. (File Photo)
जेरोधा के फाउंडर और सीईओ नितिन कामथ ने ब्रोकर्स के लिए नए यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क को लेकर चिंता जताई. (File Photo)

सोचिए, आपने अपने ब्रोकिंग अकाउंट में ₹2 लाख UPI से डाले, लेकिन उस दिन कोई शेयर नहीं खरीदा. आपके लिए यह सिर्फ पैसे ट्रांसफर करने की प्रक्रिया है, लेकिन नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट फ्रेमवर्क के तहत ब्रोकर के लिए यह खर्च का सौदा बन सकता है. जेरोधा के फाउंडर और CEO नितिन कामथ ने ₹2000 से अधिक के मर्चेंट UPI पेमेंट पर 15 अक्टूबर से लागू होने वाले 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर इसी संभावित परेशानी की ओर ध्यान दिलाया है. उनका कहना है कि इंवेस्टमेंट और ब्रोकिंग जैसे बिजनेस के लिए सामान्य मर्चेंट वाला MDR स्ट्रक्चर फिट नहीं बैठता.

सरकार ने UPI इकोसिस्टम के लिए नया MDR फ्रेमवर्क पेश किया है. इसके तहत ₹2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4% फीस लगेगी. ग्राहकों के लिए UPI फ्री रहेगा और एमडीआर फीस मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम में लागू होगा. यानी आप किसी दुकानदार या बिजनेसमैन को अपने UPI से ₹2000 से अधिक का पेमेंट करते हैं, तो आपके लिए यह बिल्कुल फ्री रहेगा, लेकिन सामने वाले को इस पेमेंट पर 0.4% की दर से चार्ज देना होगा.

नितिन कामथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि UPI का इस्तेमाल बहुत बड़े पैमाने पर होने लगा है, जिसके बाद MDR शायद जरूरी हो, लेकिन इन्वेस्टिंग और ब्रोकिंग जैसे मामलों में मौजूदा एमडीआर फ्रेमवर्क प्रैक्टिकल नहीं लगता. उनके मुताबिक, सामान्य मर्चेंट और ब्रोकर के बीच बड़ा फर्क है.

आम मर्चेंट और ब्रोकर में क्या फर्क?

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नितिन कामथ ने इसे एक आसान उदाहरण से समझाया. अगर कोई ग्राहक ₹20,000 का सामान खरीदता है और UPI से भुगतान करता है, तो मर्चेंट को उसके बदले बिक्री से कमाई होती है. यानी पेमेंट सीधे कारोबार से जुड़ा है. लेकिन ब्रोकर के मामले में कस्टमर UPI से ₹2 लाख अपने ट्रेडिंग अकाउंट में डाल सकता है और उस दिन एक भी शेयर नहीं खरीद सकता. ऐसे में ब्रोकर को ट्रांजैक्शन से कोई ट्रेडिंग रेवेन्यू नहीं मिला, लेकिन UPI पेमेंट से जुड़ा MDR खर्च उसके ऊपर आ सकता है. यही वह अंतर है, जिस पर कामथ ने सवाल उठाया है.

₹2 करोड़ का उदाहरण क्यों दिया?

जेरोधा के फाउंडर ने इस संभावित लागत को समझाने के लिए एक उदाहरण दिया. उनके मुताबिक, अगर 10,000 कस्टमर एक महीने में ₹2 लाख के 50-50 UPI ट्रांसफर करें और इनमें कोई ट्रेड न हो, तो 0.02% MDR के हिसाब से लागत करीब ₹2 करोड़ तक पहुंच सकती है. नितिन कामथ ने इस उदाहरण का इस्तेमाल सिर्फ इसलिए किया ताकि यह समझाया जा सके कि बार-बार पैसे ट्रांसफर होने पर बिना कोई ट्रेड हुए भी ब्रोकर को एमडीआर चार्ज के रूप में बड़ी लागत देनी पड़ सकती है.

नितिन कामथ ने सेबी की क्वार्टरली सेटलमेंट व्यवस्था का भी जिक्र किया. इसके तहत ब्रोकर्स को तय अंतराल पर ग्राहक के इस्तेमाल में नहीं आए फंड वापस करने होते हैं. इसके बाद अगर ग्राहक निवेश जारी रखना चाहता है, तो वह यही पैसा दोबारा अपने ब्रोकरेज अकाउंट में भेज सकता है. कामथ के मुताबिक, ऐसे आधे से ज्यादा फंड ट्रांसफर UPI के जरिए होते हैं. इससे पैसे के आने-जाने का एक साइकिल बन सकता है. बैंक अकाउंट से ब्रोकर, फिर ब्रोकर से ग्राहक और उसके बाद ग्राहक से दोबारा ब्रोकर. अगर हर ट्रांसफर पर MDR लागत जुड़ती है, तो बिना किसी ट्रेड के भी ब्रोकर का खर्च बढ़ सकता है.

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जेरोधा पर क्या असर पड़ सकता है

नितिन कामथ ने बताया कि जेरोधा फिलहाल इक्विटी डिलीवरी ट्रेड पर ब्रोकरेज नहीं लेता. उन्होंने कहा कि मौजूदा बिजनेस मॉडल की लागत इसकी इजाजत देती है. लेकिन अगर हर UPI ट्रांसफर पर अलग लागत जुड़ने लगे और ग्राहक ट्रेड करे या न करे, तो इस खर्च को लंबे समय तक वहन करना मुश्किल हो सकता है. इसका मतलब यह नहीं है कि जेरोधा ने अपनी ब्रोकरेज फीस में बदलाव का कोई ऐलान कर दिया है. नितिन कामथ ने सिर्फ नए MDR से पैदा होने वाली संभावित लागत को लेकर चिंता जताई है.

ब्रोकिंग के लिए बने अलग फ्रेमवर्क

नितिन कामथ MDR व्यवस्था के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं. उनका कहना है कि ब्रोकिंग जैसे कारोबार के लिए अलग शुल्क ढांचा होना चाहिए. उन्होंने करीब 0.02% MDR और हर ट्रांजैक्शन पर ₹5 या ₹10 की अधिकतम सीमा का सुझाव दिया है. वहीं नए फ्रेमवर्क में 0.4% MDR है और ₹75,000 या उससे ज्यादा के पेमेंट पर अधिकतम शुल्क ₹300 तय किया गया है.

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