आने वाले महीनों में बैंकों और NBFC की तरफ से पर्सनल लोन देने की गतिविधि बढ़ सकती है. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म UBS के मुताबिक भारत एक नए अनसिक्योर्ड क्रेडिट ग्रोथ साइकिल में एंट्री कर रहा है और इसमें पर्सनल लोन की बड़ी भूमिका रहेगी. UBS ने इसके पीछे बैंकों और NBFC की बेहतर एसेट क्वालिटी, सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी और कर्ज देने को लेकर बढ़ती तैयारी को प्रमुख वजह बताया है. हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि पर्सनल लोन की ब्याज दरें तुरंत कम हो जाएंगी क्योंकि कर्ज देने की क्षमता बढ़ना एक बात है और ब्याज दर घटना दूसरी बात है.
पर्सनल लोन की ग्रोथ में तेज उछाल
UBS ने CRIF के अगस्त 2026 के डेटा का हवाला देते हुए कहा है कि बैंकों में पर्सनल लोन की सालाना ग्रोथ करीब 9% रही. ये करीब दो साल का सबसे तेज ग्रोथ रेट है. वहीं NBFC के पर्सनल लोन पोर्टफोलियो में ग्रोथ करीब 30% सालाना रही. UBS के मुताबिक NBFC के पर्सनल लोन की ग्रोथ मार्च 2025 में 16% थी, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 30% हो गई. NBFC के पर्सनल लोन बुक में मिड और बड़े टिकट वाले लोन की हिस्सेदारी करीब 75% बताई गई है.
ज्यादा लिक्विडिटी से क्या बदलेगा?
पर्सनल लोन ग्रोथ के पीछे सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त लिक्विडिटी भी एक बड़ी वजह है. RBI की विशेष विंडो के तहत बैंकों ने 31 अगस्त 2026 तक करीब 127 अरब डॉलर FCNR(B) डिपॉजिट के जरिए जुटाए. UBS को इन इनफ्लो से बैंकिंग सिस्टम में करीब 12-13 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त लिक्विडिटी बनने की उम्मीद है. 7 सितंबर तक बैंकिंग सिस्टम की सरप्लस लिक्विडिटी रिकॉर्ड 11.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी थी.
UBS के मुताबिक सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी आने से बैंकों और NBFC के पास कर्ज देने की क्षमता बढ़ी है. हालांकि इस पूरी अतिरिक्त लिक्विडिटी का तुरंत लोन में बदलना जरूरी नहीं है. यानी बैंक और NBFC ज्यादा कर्ज देने की स्थिति में हो सकते हैं. हालांकि इसका पूरा असर लोन बुक में दिखने में समय लगेगा. इसके साथ एक और पहलू है कि RBI इस अतिरिक्त लिक्विडिटी को सिस्टम से सोख भी रहा है. 17 सितंबर को ही रिजर्व बैंक ने VRRR नीलामी के जरिए बैंकिंग सिस्टम से करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये निकाले यानी पूरी लिक्विडिटी लोन में नहीं जाएगी.
क्या पर्सनल लोन की ब्याज दर घटेगी?
ये सवाल उन लोगों के लिए सबसे अहम है, जो आने वाले दिनों में पर्सनल लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं. UBS की रिपोर्ट मुख्य रूप से क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी पर है, ब्याज दर घटने का कोई संकेत इसमें नहीं है. उलटे, UBS को FY27 में फंडिंग कॉस्ट करीब 15-20 बेसिस पॉइंट बढ़ने की उम्मीद है, हालांकि मौजूदा लिक्विडिटी में वो इसका असर संभालने लायक मानता है. पर्सनल लोन आम तौर पर अनसिक्योर्ड लोन होता है, इसलिए इसकी कीमत तय करते समय बैंक ग्राहक के क्रेडिट रिस्क को भी देखते हैं. बैंक अपनी फंडिंग कॉस्ट, ग्राहक की क्रेडिट प्रोफाइल और बाजार में प्रतिस्पर्धा के मुताबिक ब्याज दर तय कर सकते हैं.
गोल्ड लोन या पर्सनल लोन?
UBS ने अपनी रिपोर्ट में गोल्ड लोन के बढ़ते चलन को भी पर्सनल लोन की ग्रोथ से जोड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अनसिक्योर्ड क्रेडिट यानी बिना किसी सिक्योरिटी के लिए जाने वाले कर्ज की हिस्सेदारी FY19 में GDP के करीब 6% से बढ़कर FY24 में 10% हो गई थी. इसके बाद ये अनुपात स्थिर रहा है. दूसरी तरफ, गोल्ड लोन का आकार FY19 में GDP के करीब 1% से बढ़कर FY26 में करीब 5% हो गया. UBS का अनुमान है कि सोने की कीमतों में स्थिरता आने पर गोल्ड लोन की ग्रोथ की रफ्तार कम हो सकती है जिससे पर्सनल लोन के लिए जगह बन सकती है.
EMI चुकाने की स्थिति में भी सुधार
UBS के मुताबिक, अनसिक्योर्ड लोन सेगमेंट में एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ है. NBFC के पर्सनल लोन में 1 से 30 दिन तक की देरी वाले खातों का अनुपात अगस्त 2026 में घटकर 1.8% रह गया, जबकि जून 2024 में ये 3.5% था. UBS ने कहा है कि बैंकों और NBFC दोनों में अलग-अलग टिकट साइज वाले पर्सनल लोन की एसेट क्वालिटी कई तिमाहियों के मुकाबले मजबूत स्थिति में है. हालांकि NBFC के कुछ छोटे टिकट वाले बिजनेस लोन में तनाव अभी भी बना हुआ है.
ग्राहकों के लिए क्या मतलब?
बैंकों और NBFC के पास पर्याप्त लिक्विडिटी और पर्सनल लोन की बढ़ती ग्रोथ का मतलब ये हो सकता है कि आने वाले महीनों में कर्ज देने की गतिविधि बढ़े. मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल वाले ग्राहकों के लिए अलग-अलग बैंकों और NBFC से लोन ऑफर मिलने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं. हालांकि सभी जानकार बैंकों की लेंडिंग में बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं कर रहे. मूडीज रेटिंग्स के एक एनालिस्ट के मुताबिक, FCNR(B)-बैक्ड लेंडिंग को छोड़कर बैंक क्रेडिट ग्रोथ 13-15% के दायरे में रह सकती है.