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₹100 से शुरू करें निवेश, रिटायरमेंट तक बनेगा करोड़ों का फंड! 10-30-50 फॉर्मूला है गेम चेंजर

रिटायरमेंट के बाद आराम से जीवनयापन के लिए आपके पास ₹40 करोड़ का फंड होना चाहिए, ये जरूरी नहीं है. रिटायरमेंट कॉर्पस का सही आंकड़ा हर व्यक्ति के खर्च, लाइफस्टाइल, शहर, संपत्ति और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर निर्भर करता है. 10-30-50 फ्रेमवर्क कम उम्र से ही इंवेस्टमेंट की आदत को मजबूत करने पर जोर देता है, ताकि आय बढ़ने के साथ निवेश बढ़ाया जा सके.

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इंवेस्टमेंट का 10-30-50 फ्रेमवर्क निवेश की आदत को मजबूत करने पर जोर देता है, ताकि आय बढ़ने के साथ निवेश बढ़ाया जा सके. (सांकेतिक तस्वीर)
इंवेस्टमेंट का 10-30-50 फ्रेमवर्क निवेश की आदत को मजबूत करने पर जोर देता है, ताकि आय बढ़ने के साथ निवेश बढ़ाया जा सके. (सांकेतिक तस्वीर)

चाहिए- ये सोच कई लोगों को निवेश शुरू करने से पहले ही हतोत्साहित कर देती है. एडलवाइस म्यूचुअल फंड (Edelweiss Mutual Fund) की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता के मुताबिक, रिटायरमेंट के लिए किसी एक तय रकम की जरूरत नहीं होती. असली सवाल यह है कि नौकरी खत्म होने के बाद आपको अपनी जिंदगी चलाने के लिए कितने पैसे की जरूरत होगी.

इंडिया टुडे वुमन समिट 2026 में राधिका गुप्ता ने कहा कि रिटायरमेंट प्लानिंग में अक्सर ₹1 करोड़, ₹5 करोड़, ₹10 करोड़ या ₹40 करोड़ जैसे बड़े आंकड़े सामने आते हैं. ऐसे नंबर कई लोगों पर उल्टा असर डाल सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति को लगे कि इतनी बड़ी रकम बनाना उसके लिए संभव ही नहीं है, तो वह निवेश शुरू करने से भी बच सकता है.

सबसे पहले स्पेंडिंग का करें असेसमेंट

राधिका गुप्ता के मुताबिक, रिटायरमेंट कॉर्पस तय करने से पहले यह समझना जरूरी है कि नौकरी खत्म होने के बाद आपके खर्च कितने होंगे. यह आपकी लाइफस्टाइल, रहने की जगह, मौजूदा संपत्ति और घर की स्थिति पर निर्भर करता है. 40 या 50 की उम्र में लोगों को यह हिसाब लगाना चाहिए कि अगर नियमित नौकरी से मिलने वाली आय बंद हो जाए, तो कौन-कौन से खर्च जारी रहेंगे. अगर खुद का घर है और उस पर कोई लोन नहीं है, तो आवास से जुड़े खर्चों को अलग रखते हुए बाकी जरूरी खर्चों का अनुमान लगाया जा सकता है.

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महंगाई को हिसाब में रखना मत भूलें

आज के खर्च के आधार पर रिटायरमेंट का लक्ष्य तय करना पर्याप्त नहीं है. इन खर्चों को भविष्य के लिए प्रोजेक्ट करना जरूरी है. इसमें महंगाई के साथ-साथ समय के साथ बदलने वाली लाइफस्टाइल और जरूरतों को भी शामिल करना होगा. यानी रिटायरमेंट के लिए कोई एक फिक्स नंबर नहीं हो सकता. आपका लक्ष्य आपकी भविष्य की खर्च जरूरतों के हिसाब से तय होना चाहिए.

हर व्यक्ति का रिटायरमेंट कॉर्पस अलग

राधिका गुप्ता ने उदाहरण देते हुए कहा कि मुंबई में अपना घर रखने वाले व्यक्ति की वित्तीय जरूरत किसी छोटे शहर में किराये के मकान में रहने वाले व्यक्ति से अलग होगी. इसी तरह बच्चों की जिम्मेदारियां भी रिटायरमेंट कॉर्पस को प्रभावित करती हैं. उनके मुताबिक, मुंबई में अपना घर होने की स्थिति में करीब ₹5 करोड़ से ₹7 करोड़ का कॉर्पस पर्याप्त हो सकता है. वहीं दिल्ली में रहने वाला एक व्यक्ति होम लोन से मुक्त हो चुका है, लेकिन बच्चों ने अभी कमाना शुरू नहीं किया. ऐसी स्थिति में 60 साल की उम्र तक करीब ₹7 करोड़ से ₹8 करोड़ का पोर्टफोलियो बेहतर स्थिति दे सकता है.

₹100 से भी शुरू हो सकता है निवेश

रिटायरमेंट कॉर्पस भले ही करोड़ों में हो, लेकिन निवेश की शुरुआत बड़ी रकम से करना जरूरी नहीं है. राधिका गुप्ता के मुताबिक, म्यूचुअल फंड में ₹100 से भी निवेश शुरू किया जा सकता है. उन्होंने निवेश को आदत और अनुशासन से जोड़ते हुए कहा कि लोग कई बार इससे ज्यादा पैसा मूवी देखने के दौरान स्नैक्स पर खर्च कर देते हैं. उनका संदेश साफ है कि निवेश की शुरुआत रकम से ज्यादा महत्वपूर्ण है.

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10-30-50 का फ्रेमवर्क है फायदेमंद

युवा निवेशकों के लिए राधिका गुप्ता ने 10-30-50 फ्रेमवर्क पर जोर दिया. इसके मुताबिक, 20 की उम्र में सभी खर्चों के बाद बचने वाली आय का करीब 10 फीसदी निवेश करने की कोशिश करनी चाहिए. 30 की उम्र में यह हिस्सा 30 फीसदी और 40 की उम्र में 50 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य रखा जा सकता है. इसका मकसद कम उम्र में निवेश की आदत बनाना और आय बढ़ने के साथ निवेश की रकम को भी बढ़ाना है. हालांकि, यह एक सामान्य फ्रेमवर्क है और हर व्यक्ति की आय, जिम्मेदारियों और वित्तीय स्थिति अलग होने के कारण इसे उसी हिसाब से देखा जाना चाहिए.

बड़े नंबर से डरने की नहीं है जरूरत

अगर आप युवा निवेशक हैं, तो ₹40 करोड़ जैसे बड़े आंकड़े देखकर निवेश शुरू करने से पीछे हटने की जरूरत नहीं है. पहले अपने मौजूदा खर्चों को समझें, भविष्य की महंगाई को ध्यान में रखें और फिर रिटायरमेंट कैलकुलेटर की मदद से लक्ष्य तय करें. रिटायरमेंट का नंबर भी आपकी जिंदगी के साथ बदल सकता है. आय, खर्च, परिवार की जिम्मेदारियों और लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ इंवेस्टमेंट टारगेट को भी रिव्यू करते रहना जरूरी है. निवेश या ट्रेडिंग से जुड़ा कोई फैसला लेने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना बेहतर है.

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