भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में बढ़ोतरी (RBI Repo Rate Hike) कर दी है. बुधवार को तीन दिवसीय एमपीसी बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसके बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की गई है और इस इजाफे के बाद Repo Rate 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है.
नीतिगत ब्याज दर में इस बढ़ोतरी के चलते अब आम आदमी को झटका लगने वाला है, क्योंकि उनके लिए होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन की ईएमआई भी बढ़ जाएगी. ऐसे में अगर आपने भी होम लोन ले रखा है, तो आइए जानते हैं RBI द्वारा ब्याज दर बढ़ने पर कितनी EMI बढ़ेगी?
20 लाख के लोन पर कितनी बढ़ेगी EMI?
मान लीजिए किसी ने बैंक से 20 लाख रुपये का होम लोन (Home Loan) लिया है और इस लोन का ब्याज दर फिलहाल 7.5% है. जबकि टेन्योर 20 साल का है, तो इस हिसाब से उसकी ईएमआई 16,112 रुपये बन रही है. लेकिन RBI के 25 बेसिस पॉइंट या 0.25 फीसदी के ब्याज बढ़ोतरी के बाद ये 7.75% के हिसाब से कटेगी. कैलकुलेशन करें, तो इस आधार पर उसे 20 लाख के लोन पर 16,419 रुपये ही मंथली EMI देनी होगी. यानी हर महीने 307 रुपये ज्यादा देने होंगे.
30 लाख के लोन का ये है गणित
अब बात करते हैं कि अगर किसी व्यक्ति ने 30 लाख रुपये का लोन 7.50 फीसदी ब्याज दर पर 20 साल के लिए लिया है, तो उसे हर महीने 24,168 रुपये ईएमआई देनी पड़ रही होगी, लेकिन RBI द्वारा 25 बेसिस पॉइंट ब्याज बढ़ाने के बाद 7.75 फीसदी के हिसाब से उसकी मंथली EMI बढ़कर 24,628 रुपये हो जाएगी. यानी 460 रुपये हर महीने ज्यादा देने होंगे.
50 लाख रुपये का लोन, तो कितनी EMI?
अगला कैलकुलेशन 50 लाख रुपये के होम लोन के लिए करते हैं. अगर इस रकम का बैंक लोन व्यक्ति ने 7.5 फीसदी के ब्याज पर 20 साल के लिए लिया है, तो उसे फिलहाल मंथली 40,280 रुपये ईएमआई चुकानी पड़ रही होगी. लेकिन लोन पर ब्याज 7.75 फीसदी होने पर ये ईएमआई बढ़कर 41,047 रुपये हो जाएगी. यानी लोन लेन वाले को प्रति माह 767 रुपये ज्यादा देने होंगे.
EMI कैलकुलेशन का फॉर्मूला
P x R x (1+R)^N / [(1+R)^N-1]
P = लोन अमाउंट
N = लोन का टेन्योर (महीनों में)
R = मासिक ब्याज दर
आपके लोन पर ब्याज दर (R) का कैलकुलेशन प्रति माह के अनुसार किया जाता है. जिसे आप वार्षिक ब्याज दर/12/100 तरीके से निकाल सकते हैं.
करीब चार साल बाद Repo Rate Hike
बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने करीब चार साल के बाद रेपो रेट हाइक का झटका दिया है. इससे पहले फरवरी 2023 में रेपो रेट बढ़ाया गया था. इस साल की बात करें, तो पिछले तीन बैठकों में इसे लगातार 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा गया था. लेकिन त्योहारों से ऐन पहले केंद्रीय बैंक ने लोन लेने वालों को झटका देते हुए इसे 5.50% कर दिया है.
रेपो रेट में बढ़ोतरी पर एक्सपर्ट्स की राय
बेसिक होम लोन के सह-संस्थापक व सीईओ अतुल मोंगा का कहना है कि रेपो रेट में 25 bps बढ़ोतरी से होम लोन ईएमआई में मामूली वृद्धि होगी, लेकिन होमबायर्स की मांग पर इसका खास असर नहीं पड़ेगा. खासकर लंबी अवधि की आवासीय मांग प्रभावित नहीं होगी. इससे ₹50 लाख के 30 साल के लोन पर ईएमआई ₹850–₹870/माह बढ़ेगी, जिससे कुल ब्याज ~₹3.1 लाख बढ़ेगा.
उन्होंने ग्राहकों को सलाह दी है कि लोन की अवधि बढ़ाने के बजाय ईएमआई बढ़ाएं या हर साल 1 अतिरिक्त ईएमआई का प्री-पेमेंट करें ताकि अतिरिक्त ब्याज से बचा जा सके.
भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट (BYST) की संस्थापक व प्रबंध ट्रस्टी लक्ष्मी वेंकटरमन वेंकटेशन के अनुसार अगस्त में खुदरा महंगाई (4.82%) व खाद्य महंगाई (5.95%) के कारण आरबीआई द्वारा रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% करने से सूक्ष्म व छोटे उद्यमियों पर कार्यशील पूंजी और लोन किस्तों का बोझ बढ़ेगा.
उन्होंने पहली पीढ़ी, महिला व ग्राम उद्यमियों की सुरक्षा हेतु ₹25 लाख तक के ऋणों पर बढ़ी ब्याज दर के बराबर ब्याज सब्सिडी (Interest Subvention) देने, समय पर भुगतान और किफायती औपचारिक ऋण उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है.
वहीं कैपवाइज फाइनेंशियल सर्विसेज के संस्थापक व सीईओ नरेश बियाणी की मानें तो 25 bps बढ़ोतरी के बजाय नीतिगत रुख का बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' होना महत्वपूर्ण है. आने वाले समय में 1–2 और बढ़ोतरी हो सकती हैं.
रेपो रेट से जुड़े लोन वाले छोटे उधारकर्ताओं पर असर जल्द दिखेगा. 12 महीने में फंड की जरूरत वाले कारोबारी फंडिंग में देरी न करें. इससे इनपुट कॉस्ट के साथ फाइनेंसिंग कॉस्ट बढ़ने से टीयर-2 सप्लायर्स पर दबाव पड़ेगा. निर्यातकों को रुपए की कमजोरी से कुछ राहत मिलेगी. 5.5% रेपो रेट 2023-24 के 6.5% से कम है, इसलिए कैपेक्स प्लान को री-टेस्ट करें.
प्रवीन जैन (अध्यक्ष, नारेडको): महंगाई नियंत्रण के लिए 25 bps बढ़ोतरी जरूरी थी. मजबूत त्योहारी मांग से आवासीय बाजार पर असर सीमित रहेगा. ऐसे में रेपो दर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी को व्यापक आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. फिलहाल आवासीय मांग मजबूत बनी हुई है.
साहिल अग्रवाल (सीईओ, निंबस ग्रुप): उपभोक्ता विश्वास और बुनियादी ढांचे के विकास से टियर-2, टियर-3 और महानगरों में मांग स्थिर रहेगी. रियल एस्टेट सेक्टर मजबूत स्थिति में बना हुआ है, जिसे स्वस्थ मांग, बेहतर होते उपभोक्ता विश्वास और गुणवत्तापूर्ण आवासीय एवं प्लॉटेड डेवलपमेंट्स में निरंतर रुचि का समर्थन मिल रहा है.
पीयूष लोहिया (एमडी, लोहिया वर्ल्डस्पेस): रेपो रेट में बढ़ोतरी RBI के आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर निरंतर फोकस को दर्शाती है. रियल एस्टेट के दृष्टिकोण से इसका प्रभाव अलग-अलग खरीदार वर्गों पर अलग हो सकता है. प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट पर असर कम होगा. खरीदार ब्याज दरों के बजाय लोकेशन और प्रोजेक्ट की गुणवत्ता को प्राथमिकता दे रहे हैं.