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Rail Neer Details: देश में रेल नीर के 19 प्लांट, कहां-कहां? आप भी लगा सकते, जानिए लागत और कमाई?

Rail Neer Benefits: रेल नीर के पीछे रेलवे का मकसद यात्रियों को कम दाम में साफ और सुरक्षित पानी देना है. IRCTC के ये प्लांट आधुनिक तकनीकों से लैस हैं, जिससे पानी पूरी तरह शुद्ध रहता है.

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रेल नीर प्लांट से स्टेशन तक कैसे पहुंचता है. (Photo: IRCTC)
रेल नीर प्लांट से स्टेशन तक कैसे पहुंचता है. (Photo: IRCTC)

रेल यात्रा के दौरान आप देश के किसी भी कोने में चल जाइए, आपको ट्रेन के अंदर और स्टेशन पर रेल नीर मिल जाएगा. फिलहाल 1 लीटर रेल नीर की कीमत 14 रुपये है. आखिर रेलवे कैसे एक-एक यात्री तक रेल नीर पहुंचाता है? आपके मन में भी ये सवाल उठता होगा, कि कहां-कहां देश में रेल नीर का प्लांट है और इससे रेलवे को कितनी कमाई होती है? 

दरअसल, रेलवे हमेशा यात्रियों को सफर के दौरान रेल नीर ही लेने की सलाह देता है. यह बोतल बंद पानी शुद्ध और सुरक्षित होता है. सरकार से पूछा गया था कि रेल नीर का प्लांट कहां-कहां है? इस सवाल के जवाब में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि फिलहाल देश के अलग-अलग राज्यों में कुल 19 रेल नीर के प्लांट्स चल रहे हैं. 

IRCTC को मिली है जिम्मेदारी
रेलवे की खानपान सेवा संभालने वाली एजेंसी IRCTC को जरूरत और मांग के हिसाब से अलग-अलग जगहों पर रेल नीर प्लांट लगाने का काम सौंपा गया है. इन 19 प्लांटों के जरिए सभी प्रमुख ट्रेनों और बड़े रेलवे स्टेशनों पर पानी की बोतलें पहुंचाई जाती हैं. 

हर एक रेल नीर प्लांट से रोजाना लगभग 1 लाख बोतलें तैयार की जाती हैं. इन प्लांटों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP Model) के तहत लगाया गया है. जहां निजी ठेकेदार उत्पादन और बॉटलिंग की जिम्मेदारी संभालते हैं और IRCTC उन्हें हर बोतल एक निश्चित कॉन्ट्रैक्ट प्राइस का भुगतान करता है. 
 
रेल मंत्रालय के मुताबिक एक लाख बोतल रोजाना की क्षमता वाले एक प्लांट को बनाने में लगभग 10 करोड़ रुपये का खर्च आता है. इसमें शेड का निर्माण, हाईटेक मशीनें और दूसरे उपकरण शामिल हैं. जबकि जमीन की लागत इसमें शामिल नहीं है. 

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देश के 19 रेल नीर प्लांटों की लिस्ट-
नंगलोई – दिल्ली
दानापुर – बिहार
अंबरनाथ – महाराष्ट्र
पालूर – तमिलनाडु
मनेरी – मध्य प्रदेश
अमेठी – उत्तर प्रदेश
नागपुर – महाराष्ट्र
ऊना – हिमाचल प्रदेश
हापुड़ – उत्तर प्रदेश
जागीरोड – असम
संकराइल – पश्चिम बंगाल
कोटा – राजस्थान
मंडीदीप – मध्य प्रदेश
साणंद – गुजरात
भुसावल – महाराष्ट्र
भुवनेश्वर – ओडिशा
बिलासपुर – छत्तीसगढ़
सिम्हाद्री – आंध्र प्रदेश
विजयवाड़ा – आंध्र प्रदेश

रेल नीर के पीछे रेलवे का मकसद यात्रियों को कम दाम में साफ और सुरक्षित पानी देना है. IRCTC के ये प्लांट आधुनिक तकनीकों से लैस हैं, जिससे पानी पूरी तरह शुद्ध रहता है. देश के अलग-अलग राज्यों में इन 19 प्लांटों के होने से न सिर्फ रेलवे स्टेशनों पर पानी की कमी दूर हुई है, बल्कि नकली या खराब पानी बेचे जाने पर भी लगाम लगी है. 

बता दें, IRCTC रेल नीर ब्रांड का मालिक और डिस्ट्रीब्यूटर खुद है. इसलिए रेल नीर पर IRCTC का कमाई मॉडल रॉयल्टी और नेट प्रॉफिट मार्जिन (EBIT Margin) पर आधारित है. IRCTC के आधिकारिक फाइनेंशिल रिजल्ट के अनुसार रेल नीर सेगमेंट का ऑपरेटिंग/EBIT प्रॉफिट मार्जिन करीब 8% से 9% रहता है. 

अगर 1 लीटर रेल नीर की कीमत 14 रुपये है, तो IRCTC को हर बोतल पर करीब 1.10 रुपये से 1.30 रुपये का नेट प्रॉफिट होता है.

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शुद्ध पानी और बोतल निर्माण की लागत
अगर लागत की बात करें तो बड़े पैमाने पर यानी रोजाना करीब 1 लाख बोतल ऑटोमेटिक प्लांट में पानी को फिल्टर (RO/UV) करने और PET बोतल बनाने पर लागत 3 रुपये से 4.50 रुपये प्रति बोतल के आसपास आती है. लेबल, कैप, कार्टन पैकिंग और IRCTC रॉयल्टी जोड़कर प्लांट गेट तक की लागत 5 रुपये से 6.50 रुपये प्रति बोतल हो जाती है. ये केवल एक अनुमान है. 

प्लांट से रेलवे स्टेशनों तक ट्रांसपोर्ट, लोडिंग-अनलोडिंग और लाइसेंस प्राप्त वेंडरों का कमीशन जोड़ने के बाद यह यात्रियों तक 14 रुपये में पहुंचती है.

आप कैसे प्लांट लगा सकते हैं...

रेल नीर का प्लांट लगाने के लिए IRCTC से अधिकृत फ्रेंचाइजी या बॉटमलिंग प्लांट के लिए आवेदन करना होता है. इसके लिए आवेदक के पास कम से कम 2000 से 4000 वर्ग मीटर जमीन, वाटर सोर्स, और लगभग 4 से 8 करोड़ रुपये का निवेश होना जरूरी है. प्लांट स्थापित करने हेतु भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) प्रमाणन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी, और खाद्य सुरक्षा लाइसेंस (FSSAI) अनिवार्य हैं. आप इससे जुड़ी पूरी जानकारी IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं.

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