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Petrol-Diesel Price Hike: सिर्फ पेट्रोल-डीजल नहीं, दवाओं से खाने-पीने की चीजें तक होंगी महंगी!

Petrol-Diesel Price Hike Impact: एक बार नहीं, दो बार नहीं, बल्कि सिर्फ 10 दिन में भारत में पेट्रोल-डीजल चार बार बढ़ चुका है. फ्यूल प्राइस में दनादन इजाफे ने आम लोगों के लिए महंगाई के जोखिम को बढ़ा दिया है.

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पेट्रोल-डीजल में लगातार बढ़ोतरी से महंगाई का जोखिम बढ़ा. (File Photo: ITG)
पेट्रोल-डीजल में लगातार बढ़ोतरी से महंगाई का जोखिम बढ़ा. (File Photo: ITG)

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में दनादन बढ़ोतरी (Petrol-Diesel Price Hike) हो रही है. महज 10 दिन में ही तेल कंपनियों ने चार बार इनमें बढ़ोतरी की है और इस दौरान फ्यूल प्राइस 7 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा बढ़ चुका है. लगातार पेट्रोल-डीजल महंगा होने से देश में महंगाई का बड़ा खतरा खड़ा हो रहा है, ऐसा इसलिए क्योंकि इसका असर जल्द ही उन जगहों पर दिखना शुरू हो सकता है, जहां देश के आम लोगों को सबसे ज्यादा तकलीफ होगी. इसकी वजह है ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो जाएगा और ऐसा होने से खाने-पीने की चीजों से लेकर किराने का सामान, दवाएं, ट्रैवलिंग समेत रोजमर्रा की जरूरत के सामानों के दाम बढ़ सकते हैं. 

10 दिन 4 बार महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल
देश में तेल कंपनियों ने 15 मई को चार साल बाद पहली बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया था और इनकी कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था. इसके बाद 19 मई को फिर फ्यूल बम फूटा और ईंधन की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया. बात यहीं नहीं रुकी और 23 मई को 97 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़ाए गए.

इसके बाद 25 मई को तेल कंपनियों ने चौथी बढ़ोतरी करते हुए पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया. इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल 100 रुपये के पार निकल गया और 1 लीटर के लिए 102.12 रुपये खर्च करने पड़ेंगे, जबकि डीजल बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है. 

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Petrol Diesel Price Hike Impact

ट्रांसपोर्टेशन लागत के साथ बढ़ेगी महंगाई
पेट्रोल-डीजल का महंगा होना, महंगाई के जोखिम को बढ़ाने वाला साबित होता है. इसका उदाहरण बीते 15 मई को ही मिल गया, जबकि Petrol-Diesel-CNG Hike की खबर के बाद अचानक अमूल और मदर डेयरी जैसी कंपनियों ने अपने पैकेज्ड दूध को महंगा कर दिया. यही नहीं मुंबई में ब्रेड महंगी हो गई और टैक्सी यूनियनों ने यात्री किराए में बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी. 

देश में पेट्रोल-डीजल बम फूटने के बाद परिवहन उद्योग ने भी अब औपचारिक रूप से ईंधन की बढ़ती लागत को दूसरे व्यवसायों पर डालना शुरू कर दिया है, जो इस बात का संकेत है कि महंगे डीजल का प्रभाव पेट्रोल पंपों पर ही नहीं, बल्कि तमाम दूसरी चीजों से होते हुए इकोनॉमी तक असर डालेगा. ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (AITWU) ने चेतावनी दी है कि डीजल की बढ़ती कीमतों (Diesel Price Hike) के कारण देश भर में ट्रांसपोर्टेशन संचालन प्रभावित होता जा रहा है.

रिपोर्ट की मानें, तो एसोसिएशन ने बीते 20 मई से राष्ट्रव्यापी फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर (FAF) लागू किया है, जिससे ट्रांसपोर्टरों को डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर माल ढुलाई दरों को बढ़ाने की अनुमति होगी. 

Petrol Diesel Price Hike Impact

आम ग्राहकों पर होगा सीधा असर 
Petrol-Diesel महंगा होने और ट्रांसपोर्टरों को माल ढुलाई रेट्स बढ़ाने की अनुमति से FMCG कंपनियों, मैन्युफैक्चरर्स, रिटेल विक्रेताओं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और फूड सप्लायर्स के लिए लॉजिस्टिक्स लागत में सीधी बढ़ोतरी हो सकती है और इसकी भरपाई के लिए कंपनियां बोझ आखिर में सीधे ग्राहकों पर ही डालेंगी, यानी उनके लिए तमाम सामान महंगे हो जाएंगे. 

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FAF से कैसे महंगी होगी माल ढुलाई
AITWU के मुताबिक, सिर्फ डीजल ही ट्रक के परिचालन लागत का लगभग 65% हिस्सा है. इसी को लेकर एसोसिएशन के फैसले पर नजर डालें, तो साफ किया गया था कि 15 मई के प्राइस हाइक से ऊपर डीजल की कीमतों में हर 1 रुपये की वृद्धि के लिए माल ढुलाई रेट ऑटोमैटिक 0.65% बढ़ जाएगा. यानी अगर डीजल की कीमत 10 रुपये बढ़ती है, तो माल ढुलाई की लागत 6.5 फीसदी बढ़ जाएगी. बता दें कि अब तक डीजल 7 रुपये से ज्यादा महंगा हो चुका है. संगठन ने ये भी साफ किया कि इसका उद्देश्य डीजल की बढ़ती लागत की भरपाई करना है. 

Petrol Diesel Price Hike Impact

 

क्या कुछ महंगा होने वाला है!
Diesel Price Hike  के चलते माल ढुलाई की लागत बढ़ने से ग्राहकों द्वारा यूज की जाने वाली रोजमर्रा की चीजों के दाम पर सबसे ज्यादा और पहले असर दिखेगा. इनमें सब्जियां, फल, दूध, डेयरी प्रोडक्ट्स, दवाएं, एफएमसीजी वस्तुओं शामिल हैं. इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से निर्माण सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और ई-कॉमर्स डिलीवरी भी लागत की भरपाई ग्राहकों की जेब से करेंगी. क्योंकि ये सभी सामान, दुकानों और गोदामों तक पहुंचने से पहले ट्रकों के माध्यम से ले जाए जाते हैं.

पहले रुपया अब पेट्रोल-डीजल ने रुलाया
पहले से ही देश में डॉलर के मुकाबले लगातार टूटते जा रहे भारतीय रुपये ने महंगाई के जोखिम को बढ़ा दिया था, क्योंकि विदेशों से आयात किए जाने वाले सामनों का पेमेंट डॉलर में ही किया जाता है और रुपया कमजोर होने से ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. वहीं अब पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ने से महंगाई का खतरा और भी बढ़ गया है. 

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साफ तौर पर कहें, ये मामला सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं है, बल्कि आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का तगड़ा बम फूटने के संकेत हैं, जिसकी शुरुआत दूध समेत कई चीजों से पहले ही हो चुकी है. 

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