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ट्रंप की धमकी से बिगड़ी बात! ईरान बोला- लेबनान मुद्दा सुलझे बगैर आगे कोई वार्ता नहीं

अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही उच्चस्तरीय शांति वार्ता एक बार फिर संकट में घिर गई है. पहले दौर की बातचीत के बावजूद ईरान ने साफ कर दिया है कि भविष्य की वार्ताएं इस बात पर निर्भर करेंगी कि लेबनान में इजरायली हमले बंद होते हैं या नहीं.

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ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि उनका देश डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों को गंभीरता से नहीं लेता. (File Photo: PTI)
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि उनका देश डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों को गंभीरता से नहीं लेता. (File Photo: PTI)

स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता एक बार फिर बेपटरी हो गई है. डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के विरोध में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को कुछ देर के लिए पहले दौर की वार्ता बीच में छोड़ दी. तस्नीम न्यूज एजेंसी ने विश्वस्त सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि ट्रंप के सख्त बयानों और सैन्य कार्रवाई की धमकियों के बाद ईरानी पक्ष ने इसे बातचीत के माहौल के खिलाफ माना और विरोध जताते हुए मीटिंग हॉल से बाहर निकल गया.

ट्रंप की आक्रामक बयानबाजी का असर वार्ता स्थल पर भी देखने को मिला. ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित फोटो सेशन में शामिल होने से इनकार कर दिया. ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, वार्ता शुरू होने से पहले आयोजकों और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने दोनों पक्षों के बीच हाथ मिलाने और संयुक्त तस्वीर खिंचवाने की योजना बनाई थी. हालांकि, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इसमें हिस्सा लेने से मना कर दिया.

प्रेस टीवी के हवाले से सूत्रों ने बताया कि ईरानी वार्ताकारों ने अमेरिकी पक्ष के सामने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई, इसके बाद पहले दौर की वार्ता शुरू हुई. हालांकि, ईरान ने पहले दौर की वार्ता समाप्त होने के बाद अगले दौर की वार्ता में तब तक शामिल होने से इनकार कर दिया है, जब तक लेबनान में पूर्ण युद्धविराम का मसला हल नहीं हो जाता. ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मेहदी गोरबनजादेह ने सरकारी मीडिया से कहा, 'जब तक लेबनान की स्थिति का समाधान नहीं हो जाता, तब तक अन्य मुद्दों पर कोई बातचीत नहीं होगी. यदि लेबनान में युद्ध समाप्त नहीं होता, तो दूसरे विषयों पर वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी.' 

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ट्रंप ने ईरान पर फिर हमले की दी थी धमकी

स्विट्जरलैंड में वार्ता शुरू होने के कुछ मिनट बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ईरान को धमकाते हुए एक पोस्ट किया. उन्होंने कहा, 'ईरान को तुरंत लेबनान में अपने भारी फंडिंग वाले प्रॉक्सी समूहों को रोकना होगा. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम ईरान पर फिर बहुत बड़ा हमला करेंगे, पिछले सप्ताह से भी ज्यादा ताकत के साथ.' वहीं फॉक्स न्यूज से फोन पर बातचीत में ट्रंप ने ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नियंत्रण कर सकता है. इन्हीं धमकियों के चलते ईरानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता बीच में छोड़कर हॉल से बाहर निकल गया.

हमारी सेनाएं जवाब देने के लिए तैयार: ईरान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के धमकी भरे पोस्ट के कुछ ही देर बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने ट्रंप को अपनी भाषा पर सावधानी बरतने की सलाह दी. ईरानी संसद के अध्यक्ष गालिबाफ ने ट्रंप की धमकियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'क्या उन्हें नहीं लगता कि अगर उनकी धमकियों का कोई असर होता, तो वे आज इस हताशा की स्थिति में नहीं पहुंचते? हम अमेरिकी धमकियों को कोई महत्व नहीं देते. उन्हें अपने बयानों को लेकर ज्यादा सावधान रहना चाहिए. हमारी सशस्त्र सेनाएं उन्हें अलग तरीके से जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. वे चाहे कुछ भी कहें, कार्रवाई हम ही करेंगे.' 

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पहले दौर की वार्ता में किन मुद्दों पर हुई बात?

ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने कहा की पहले दौर की वार्ता युद्ध खत्म करने, प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज किए गए फंड को जारी करने पर केंद्रित रही. ईरानी प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने अपने देश की सरकारी मीडिया को बताया कि अमेरिका के साथ पहले दौर की वार्ता में ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने को लेकर ड्राफ्ट को अंतिम रूप दे दिया गया है और जल्द ही प्रतिबंधों में छूट लागू की जाएगी. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता और वार्ता दल के सदस्य इस्माइल बघाई ने कहा कि रविवार की बातचीत में दुनिया भर के बैंकों में फ्रीज ईरानी फंड्स को जारी करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया. यह युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की प्रमुख शर्तों में शामिल है. सूत्रों के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कतर के अधिकारियों के साथ इन फंड्स को जारी करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की.

ईरान को फ्रीज 6 अरब डॉलर वापस मिलेंगे

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने रविवार की वार्ता से पहले तस्नीम न्यूज एजेंसी से कहा, 'समझौता ज्ञापन (MoU) की सभी शर्तें हमारे पक्ष में हैं और इन वार्ताओं तथा बातचीत की उपलब्धियां जल्द ही सामने आएंगी.' उन्होंने दावा किया कि कतर में फ्रीज किए गए ईरान के 6 अरब डॉलर इस समझौते के तहत वापस किए जाएंगे. पेजेश्कियान ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने हालिया भाषण में ईरान पर कई प्रतिबंधों की बात की थी, अब उन्हीं मुद्दों को ईरानी जनता के अधिकार के रूप में स्वीकार कर चुके हैं.

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पेजेश्कियान बोले- हम एटम बम नहीं चाहते

पेजेश्कियान ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भी निशाना साधते हुए कहा कि स्विट्जरलैंड में हो रही वार्ता से सबसे अधिक असंतुष्ट वही होंगे. ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, 'अमेरिका की केवल एक ही शर्त है कि हमारे पास परमाणु बम नहीं होना चाहिए. यह वही बात है जिसे हमारे शहीद नेता भी बार-बार कहते थे कि हम परमाणु बम नहीं चाहते. अमेरिका ने कहा कि इसे लिखकर हस्ताक्षर कर दीजिए और हमने हस्ताक्षर करने का आश्वसन दिया है.' हालांकि, स्विट्जरलैंड में पहले दौर की बातचीत के बावजूद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने साफ कर दिया है कि भविष्य की वार्ताएं इस बात पर निर्भर करेंगी कि लेबनान में इजरायली हमले बंद होते हैं या नहीं.

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