8वें वेतन आयोग के तहत तेजी से काम चल रहा है. आए दिन किसी ना किसी शहर में आयोग बैठकें कर रहा है और सैलरी-पेंशन को लेकर कर्मचारियों से बातचीत कर रहा है. इस बीच, कर्मचारियों में फिटमेंट फैक्टर, भत्तों और पेंशन को लेकर चर्चा तेज है.
आयोग की बैठकों में बड़े मुद्दे फिटमेंट फैक्टर, सैलरी रिवीजन और भत्तों के अलावा, पुरानी पेंशन योजना (OPS) बनाम नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) है. साल 2004 के बाद सेवा में आए केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन अब 'गारंटीड पेंशन' की मांग पर अड़े हुए हैं. आइए जानते हैं रिटायर्ड कर्मचारियों की क्या-क्या मांगे हैं...
पुरानी पेंशन योजना की मांग
साल 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए शुरू की गई नई पेंशन योजना से देशभर के कर्मचारी संतुष्ठ नजर नहीं आ रहे हैं. 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए नोट में कर्मचारी यूनियनों ने साफ तौर पर कहा है कि मौजूदा बाजार बेस्ड रिटर्न वाली योजनाएं उनके और उनके फैमिली के फ्यूचर को आर्थिक सुरक्षा देने में पूरी तरह से नाकाम है. कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें फिर से पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ दिया जाए. सर्वे ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूरी तरह बहाली की मांग की है.
45,000 रुपये न्यूनतम पेंशन
भारत पेंशनर्स समाज (BPS) के तहत पेंशनर्स ने न्यूनतम पेंशन की मांग उठाई है. BPS ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹45,000 प्रति माह करने, अंतिम वेतन का 67% पेंशन देने और फैमिली पेंशन को अंतिम वेतन का 50% करने की सिफारिश की है.
कब लागू हो सकती है सिफारिशें?
वेतन आयोग देशभर के अलग-अलग जोनों में जाकर सभी प्रतिनिधियों की बातें सुन रहा है. इन बैठकों में फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने और पेंशन बराबरी जैसे गंभीर मुद्दे पर ज्ञापन पेश किया गया है. आयोग अपनी रिपोर्ट मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को दे सकता है.
रिपोर्ट पेश करने के बाद सरकार द्वारा सिफारिशें मंजूर होने पर इसे लागू किया जाएगा. इसके बाद यह तय होगा कि क्या सरकार पेंशन में तीन गुना बढ़ोतरी करेगी और ओपीएस की मांग मानेगी. 2027 में आने वाली फाइनल रिपोर्ट यह तय करेगी कि 2004 के बाद भर्ती हुए लाखों कर्मचारियों को OPS का लाभ मिलेगा या नहीं.