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अमेरिका को उल्टा पड़ा ये दांव, चीन में सिमटने लगा Nvidia का कारोबार... केवल ये एक कारण

Nvidia की चीन में AI चिप बिक्री तेजी से घट रही है, जबकि घरेलू कंपनी Huawei ने इस मौके का फायदा उठाकर अपनी मौजूदगी और बाजार हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाई है.

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चीन में तेजी से घट रहा है एनवीडिया का कारोबार. (Photo- ITG)
चीन में तेजी से घट रहा है एनवीडिया का कारोबार. (Photo- ITG)

कभी 95% हिस्सेदारी, अब सिंगल डिजिट में सिमटने का अनुमान. चीन में Nvidia की पकड़ कमजोर पड़ रही है, जबकि Huawei तेजी से AI चिप बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही है. अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद चीन के AI बाजार में ताकत का संतुलन तेजी से बदलता नजर आ रहा है.

दुनिया की सबसे बड़ी AI चिप कंपनी Nvidia को चीन में बड़ा झटका लगा है. कभी चीन के AI चिप बाजार पर लगभग एकछत्र राज करने वाली Nvidia अब अपने सबसे अहम विदेशी बाजार में जमीन खोती नजर आ रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह है अमेरिका की तरफ से लगाए गए निर्यात प्रतिबंध, जिनका मकसद चीन की AI और चिप क्षमताओं को सीमित करना था. लेकिन इन्हीं प्रतिबंधों ने तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया है.
 
दरअसल, Nvidia की चीन में AI चिप बिक्री तेजी से घट रही है, जबकि घरेलू कंपनी Huawei ने इस मौके का फायदा उठाकर अपनी मौजूदगी और बाजार हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाई है. रिसर्च फर्म Bernstein का अनुमान है कि 2026 में Huawei चीन के AI चिप बाजार का करीब 50 फीसदी हिस्सा अपने नाम कर सकती है, जबकि Nvidia की हिस्सेदारी घटकर महज 8 फीसदी तक सिमट सकती है.

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अमेरिका ने रोका रास्ता, Huawei ने पकड़ी रफ्तार!
अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए चीन को Nvidia के सबसे एडवांस AI चिप्स बेचने पर कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं. इन प्रतिबंधों के चलते Nvidia के H200 जैसे हाई-एंड चिप्स की बिक्री लंबे समय तक अटकी रही. इसी दौरान चीन ने घरेलू टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने की रणनीति तेज कर दी और Huawei जैसी कंपनियों को बड़ा मौका मिल गया. Huawei के Ascend सीरीज AI चिप्स अब Nvidia के विकल्प के तौर पर तेजी से जगह बना रहे हैं. ByteDance, Alibaba समेत कई बड़ी चीनी टेक कंपनियां इन चिप्स को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.

क्या उल्टा पड़ा अमेरिका का दांव?
जानकारों का मानना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों का मकसद चीन की AI प्रगति को धीमा करना था. लेकिन इन कदमों ने चीन को आत्मनिर्भर बनने के लिए ज्यादा ही प्रेरित कर दिया. नतीजा ये हुआ कि Huawei और दूसरी घरेलू कंपनियों को तेजी से बाजार मिला और चीन में विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की कोशिशें तेज हो गईं. हालांकि इसका मतलब ये भी नहीं है कि Nvidia पूरी तरह बाहर हो गई है. AI मॉडल ट्रेनिंग और अत्याधुनिक रिसर्च के लिए चीन अभी भी Nvidia की तकनीक पर काफी हद तक निर्भर माना जाता है. Huawei के चिप्स ने बड़ी तरक्की जरूर की है. लेकिन तकनीकी क्षमता के मामले में Nvidia अभी भी कई क्षेत्रों में आगे है.

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दुनिया के लिए क्यों अहम है ये मुकाबला?
ये सिर्फ दो कंपनियों की लड़ाई नहीं है. AI आने वाले बरसों में स्मार्टफोन, बैंकिंग, हेल्थकेयर, ऑटोमोबाइल, शिक्षा और रोजमर्रा की डिजिटल सेवाओं की दिशा तय करेगा. जो देश और कंपनियां AI चिप्स में बढ़त हासिल करेंगी, वो भविष्य की टेक्नोलॉजी अर्थव्यवस्था में भी मजबूत स्थिति में होंगी. चीन में Nvidia की कमजोर होती पकड़ और Huawei का उभार इस बात का संकेत है कि AI की वैश्विक दौड़ अब सिर्फ अमेरिकी कंपनियों के भरोसे नहीं चलने वाली. आने वाले समय में ये मुकाबला ज्यादा तेज होने वाला है, जिसका असर दुनिया भर की टेक कंपनियों, निवेशकों और ग्राहकों पर पड़ सकता है.

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