शेयर बाजार में पैसे लगाने का फिलहाल एक मौका मिल रहा है, लेकिन अधिकतर लोग इससे सहमत नहीं होंगे, क्योंकि युद्ध थमा नहीं है, कच्चे तेल में उबाल जारी है, फिर क्या गारंटी है कि बाजार में अभी पैसे लगाने के बाद नुकसान नहीं होगा, या फिर बाजार यहां से अब और नहीं गिरेगा? ये सवाल आम है, और मौके के हिसाब से सही भी. लेकिन बाजार में जब-जब बड़ी गिरावट आती है, तो उसे एक मौके के तौर पर भी देखा जाता है. अधिकतर बड़े निवेशक इसी फॉर्मूले से बाजार में निवेश करते हैं, और अच्छा रिटर्न बनाते हैं.
दरअसल, सोमवार को भारी गिरावट के साथ मार्केट की ओपनिंग हुई. कारोबार के दौरान बाजार ने कई बार संभलने की कोशिश की. लेकिन दबाव बढ़ता गया, और आखिर में सेंसेक्स 719 अंक गिरकर बंद हुआ. निफ्टी 243 अंक गिरकर 23,123 पर बंद हुआ, एक समय निफ्टी फिसलकर 23,070 तक पहुंच गया था. इस तरह की गिरावट के दौरान निवेशकों के मन में डर और अवसर दोनों एक साथ दस्तक देते हैं. क्योंकि मौजूदा समय में निफ्टी अपने लाइफटाइम हाई से करीब 15% टूट चुका है.
वहीं दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ महीनों में वैश्विक बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार में कुछ अधिक ही करेक्शन देखने को मिल चुका है, जिसे लंबी अवधि के निवेशक एक मौके के तौर पर भी देख रहे हैं.
टेक्निकल पैरामीटर के तौर पर एक्सपर्ट्स का मानना है कि 23,000 का स्तर निफ्टी के लिए एक बेहद मजबूत सपोर्ट है. ऐसे में अगर आपका नजरिया लंबी अवधि, कम से कम 3 से 5 साल के लिए है, तो बाजार में धीरे-धीरे एंट्री करने का यह बिल्कुल सही समय साबित हो सकता है. क्योंकि जब बाजार में चौतरफा डर का माहौल हो, तो आंख बंद करके पैसा लगाने के बजाय एक सोची-समझी रणनीति के तहत आगे बढ़ना चाहिए.
निवेश की शुरुआत कितने पैसे से कर सकते हैं?
नए निवेशकों में अक्सर यह भ्रम होता है कि शेयर बाजार में उतरने के लिए लाखों रुपये की जरूरत होती है, लेकिन ऐसा नहीं है. अगर आपको इक्विटी मार्केट के बारे में जानकारी नहीं है तो फिर म्यूचुअल फंड के रास्ते बाजार में निवेश कर सकते हैं. म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में आप महज 100 रुपये या 500 रुपये महीने की सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) से शुरुआत कर सकते हैं. यह गिरते बाजार का लाभ उठाने का सबसे सुरक्षित तरीका है.
इस गिरावट में निवेश की सही रणनीति
वहीं अगर सीधे शेयर बाजार में पैसे लगाना चाहते हैं तो खास रणनीति से मौके का फायदा उठा सकते हैं. गिरावट के समय पेनी स्टॉक्स या ज्यादा कर्ज वाली कंपनियों से दूरी बनाकर रखें. अपना पैसा केवल लार्जकैप और मजबूत फंडामेंटल वाली दिग्गज कंपनियों में लगाएं, जिनका बिजनेस मॉडल साफ हो, जिन पर कर्ज न हो और जिनका ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत हो. यानी संकट खत्म होने पर सबसे पहले यही स्टॉक्स बाउंस बैक करते हैं.
भले ही निफ्टी के लिए 23,000 अंक एक मजबूत सपोर्ट है. लेकिन जिस तरह का वैश्विक माहौल है, ऐसे बाजार में उतार-चढ़ाव आम बात है. थोड़ा और तनाव बढ़ने की स्थिति में कच्चे तेल पर भाव और उछल सकता है, जिससे निफ्टी 23 हजार से नीचे भी फिसल सकता है. इसलिए अपना सारा पैसा एक बार में न लगाएं. 'बाय ऑन डिप्स' की नीति अपनाएं, यानी हर गिरावट पर किस्तों में खरीदारी करें.
एक उदाहरण से समझते हैं... अगर आप बाजार में 1 लाख रुपये का निवेश करना चाहते हैं, तो मौजूदा उतार-चढ़ाव को देखते हुए 4 किश्तों की रणनीति सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा कदम होगा. पहली किश्त बिना झिझक अभी लगा सकते हैं. क्योंकि निफ्टी 23,000 अंक के मजबूत सपोर्ट के पास है, और आप कुल निवेश की 25% राशि यानी 25 हजार रुपये अच्छे फंडामेंटल वाले लार्जकैप शेयर्स में लगाएं.
बाकी 75 हजार रुपये तीन किस्तों में लगाने के लिए रखें. अगर बाजार यहां से भी नीचे फिसलता है तो दूसरी किस्त यानी 25 हजार रुपये लगा दें. अगर बाजार यहीं से यू-टर्न ले लेता है तो अगले तीन महीने के दौरान जब-जब करेक्शन आए, उस दिन लगा दें. यह रणनीति आपके निवेश की औसत लागत को कम करेगी और आपको अचानक होने वाले बड़े नुकसान से बचाएगी.
लंबी अवधि का नजरिया हो
अगर आप शेयर बाजार में निवेश कर तुरंत अमीर बनना चाहते हैं, तो पहले इस सोच को मन से निकाल दें. न तो वैसा बाजार है, न ही वो समय. मौजूदा वैश्विक हालातों के कारण अगले कुछ महीनों तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. लेकिन अगर आप 3 से 5 साल के विजन के साथ आ रहे हैं, तो भारत की आर्थिक ग्रोथ स्टोरी मजबूत है और यह गिरावट आपके लिए एक मौका साबित हो सकता है.
भारतीय बाजार क्यों आकर्षक?
पिछले हफ्ते जीडीपी के आंकड़े सामने आए, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था 7.7 फीसदी की गति से बढ़ी है. जबकि दुनियाभर की इकोनॉमी दबाव में है. चीन, जापान हो या अमेरिका, इन देशों की जीडीपी ग्रोथ भारत के मुकाबले काफी कम रही है.
अगर शेयर बाजार के पैरामीटर से देखें तो पिछले एक साल में भारतीय बाजार यानी निफ्टी में करीब 9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. जबकि इस दौरान अमेरिकी मार्केट डाउ जोंस में करीब 20 फीसदी की तेजी, दक्षिण कोरिया के बाजार में दमदार 162 फीसदी और जापान के बाजार निक्कई में करीब 70 फीसदी का रिटर्न मिला है. यानी पिछले एक साल से दुनियाभर के बाजार गुलजार रहे. लेकिन जब गिरावट की बात होगी तो इन बाजारों पर ज्यादा दबाव देखने को मिल सकते हैं. क्योंकि इन्हीं मार्केट में दमदार रैली देखने को मिली है, जबकि भारतीय बाजार ने निगेटिव रिटर्न दिया है.
ऐसे में यहां से भारतीय बाजार में बहुत ज्यादा करेक्शन की संभावना बहुत कम है. इसी का नतीजा है कि शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट देखी गई. खासतौर पर टेक-हैवी इंडेक्स नेस्डैक 4.18% टूटकर बंद हुआ. दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 6 फीसदी से ज्यादा क्रैश हो गया. वहीं जापान का निक्केई 225 भी 4.14% तक गोता लगा गया. लेकिन भारतीय बाजार महज एक फीसदी तक ही फिसला.
शेयर बाजार में एक नियम चलता है- दूसरों के डर के समय लालची बनें. फिलहाल भारतीय बाजार 15% करेक्ट हो चुका है. कुछ मजबूत शेयर्स सही भाव पर मिल रहे हैं. निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता को समझें, वित्तीय सलाहकार की मदद लें और छोटे अमाउंट से निवेश की शुरुआत करें.
(नोट: शेयर बाजार में निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें)