आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के गठन को 7 महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन केंद्रीय कर्मचारी अभी भी इस बात की स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं कि उनका वेतन संशोधन कब होगा और कब से उनके बैंक खातों में बढ़ी हुई सैलरी आएगी. तो बता दें कि अभी तक मोदी सरकार की ओर से न तो Salary Hike में बड़ा रोल निभाने वाले फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई घोषणा की है, न ही नए सैलरी स्ट्रक्चर के बारे में तस्वीर साफ की है. हालांकि, सरकार की ओर से इस बात के संकेत जरूर दे दिए गए हैं कि 8वां वेतन आयोग अपनी सिफारिशें कब प्रस्तुत कर सकता है.
3 नवंबर को गठन, कब पेश होगी रिपोर्ट?
सरकार की ओर से 8वां वेतन आयोग 3 नवंबर 2025 को गठित किया गया था, लेकिन इससे करीब 7 महीने से ज्यादा का समय बीत गया है, लेकिन सैलरी या फिटमेंट समेत अन्य चीजों पर तस्वीर साफ नहीं हो सकी है. राज्यसभा में एक प्रश्न का उत्तर में वित्त मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि आयोग को गठन की तारीख से 18 महीनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है. इसका मतलब है कि 8th Pay Commission मई 2027 के आसपास अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कर सकता है.
कर्मचारियों को कब मिलेगा Salary Hike?
केंद्र सरकार के कर्मचारियों को वेतन वृद्धि की उम्मीद कब तक की जानी चाहिए, इस सवाल का जबाव देते हुए वित्त मंत्रालय ने दोहराया है कि 8वां वेतन आयोग गठन के 18 महीनों के भीतर सिफारिशें पेश करेगा. हालांकि, कर्मचारियों को पता होना चाहिए कि रिपोर्ट के आधार पर Salary Hike ऑटोमैटिक नहीं होगा. आयोग की सिफारिशों के बाद, केंद्र सरकार उनकी जांच करेगी और फिर यह तय करेगी कि उन्हें पूरी तरह से स्वीकार किया जाए या संशोधनों के साथ मंजूरी दे जाए यानी सरकार की मंजूरी के बाद ही संशोधित वेतन मिलेगा.

सरकार ने कहा- 8th CPC स्वतंत्र है
वित्त मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि 8वें वेतन आयोग को अपनी प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से तैयार करने की अनुमति दी गई है. आयोग के कार्यक्षेत्र में यह अनिवार्य नहीं है कि वह सरकार को अपने काम की प्रगति, परामर्श या विचार-विमर्श के दौरान विचाराधीन सिफारिशों के बारे में अलर्ट करता रहे. मतलब सरकार ने कहा कि उसके पास आयोग की बैठकों या अब तक परामर्श किए गए कर्मचारी संघों के प्रस्तावों के बारे में कोई डिटेल नहीं है. हालांकि आयोग ने दिल्ली, चेन्नई और पुडुचेरी में हितधारकों के साथ परामर्श बैठकों के एक और दौर की घोषणा की है.
कर्मचारी संगठनों की मांगों में ये डिमांड बड़ी
कर्मचारी संगठनों ने 8th Pay Commission से न्यूनतम मूल वेतन, पेंशन, महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), अन्य भत्ते और सेवा शर्तों जैसे मुद्दों पर अपने विचार पेश किए हैं. उनकी मांगों में सबसे बड़ी और अहम डिमांड फिटमेंट फैक्टर 3.8 किए जाने की है. अगर सरकार इस मानती है, तो फिर केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बंपर उछाल देखने को मिलेगा.

यहां बता दें कि फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा आंकड़ा होता है, जिसका यूज केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा किसी कर्मचारी के पूर्व-संशोधित मूल वेतन (या पेंशन) को नए, संशोधित मूल वेतन संरचना में बदलने के लिए करता है. इसमें किसी भी तरह का परिवर्तन सीधे सैलरी, पेंशन और संबंधित बकाया राशि को प्रभावित करता है.
Fitment Factor का फॉर्मूला, सैलरी का गणित
फिटमेंट फैक्टर का फॉर्मूला देखें, तो ये 'नया मूल वेतन: वर्तमान मूल वेतन x FF' होता है. फिलहाल, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 7th Pay Commission के तहत 2.57 लागू है, जिसके चलते न्यूनतम मूल वेतन 6वें वेतन आयोग के 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 हुआ था. अब इसे बढ़ाकर अगर 3.83 किया जाता है, तो फिलहाल 18,000 रुपये का न्यूनतम बेसिक-पे (₹18000 x 3.83 = ₹68,940) हो जाएगा. इसी तरह अलग-अलग वेतनमान में सैलरी में बंपर बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.