सरकारी नौकरी में सैलरी बढ़ने की उम्मीद के बीच अक्सर सबसे ज्यादा चर्चा बेसिक पे (Basic Pay) और भत्तों (Allowances) की होती है. लेकिन रेलवे कर्मचारियों के लिए मामला सिर्फ इतनी बात तक सीमित नहीं है. अगर ड्यूटी के घंटे तय सीमा से ज्यादा हो जाएं, ओवरटाइम का पैसा समय पर न मिले और काम का बोझ भी बढ़ता जाए, तो बढ़ी हुई सैलरी का सवाल भी पीछे छूट जाता है. रेलवे बोर्ड की हालिया बैठक में रेलवे के कर्मचारी संगठनों ने ऐसे ही कई मुद्दे उठाए हैं, जिनका सीधा असर कर्मचारियों की रोज की नौकरी पर पड़ता है.
ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) ने 8वें वेतन आयोग बैठक में लोको पायलट्स (Loco Pilots) की लंबी ड्यूटी का मुद्दा उठाया. संगठन के प्रतिनिधियों का सवाल था कि जब 9 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं लेने का लिखित प्रावधान है, तो लोको पायलट्स से इससे ज्यादा काम क्यों कराया जा रहा है. AIRF ने कहा कि जरूरत के नाम पर लोको पायलट्स से 14, 16 और यहां तक कि 17 घंटे तक ट्रेन चलवाना सही नहीं है. कर्मचारी संगठन ने इसे सिर्फ कर्मचारियों की परेशानी नहीं, बल्कि ट्रेन ऑपरेशन की सुरक्षा से जुड़ा मामला भी बताया है.
TA और OT का पैसा समय पर क्यों नहीं?
बैठक में कर्मचारियों के ट्रैवल अलाउंस (Travel Allowance) और ओवर टाइम (Overtime) भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया गया. AIRF के मुताबिक, रेलवे बोर्ड ने बताया कि करीब ₹2.90 लाख करोड़ के रेलवे बजट का लगभग 95 फीसदी हिस्सा खर्च हो चुका है. इस पर कर्मचारी संगठन ने सवाल उठाया कि जब कर्मचारी लगातार अपनी ड्यूटी कर रहे हैं, तो उनके वैध TA और OT का भुगतान समय पर क्यों नहीं हो रहा. कर्मचारियों के लिए वास्तविक कमाई सिर्फ बेसिक सैलरी से तय नहीं होती. भत्ते और ओवरटाइम का पैसा भी उनकी आय का अहम हिस्सा है.
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ट्रैकमैन के लिए 12 किलोमीटर की मांग
8वें वेतन आयोग की बैठक में रेलवे के ट्रैकमैन की वर्किंग कंडीशन भी बैठक में चर्चा में रही. रेलवे कर्मचारियों के संगठन 'ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन' की मांग है कि ट्रैकमैन से 12 किलोमीटर से ज्यादा का काम नहीं लिया जाना चाहिए. वहीं, पीवी मैनुअल में अधिकतम 20 किलोमीटर की सीमा का प्रावधान बताया गया है. AIRF के मुताबिक, कर्मचारी संगठन ने रेलवे बोर्ड के सामने 12 किलोमीटर की सीमा तय करने की मांग रखी है. संगठन का दावा है कि कुछ जगहों पर कर्मचारियों के संघर्ष के बाद ऐसी व्यवस्था लागू भी की गई है.
रनिंग स्टाफ से 11-12 घंटे तक काम
बैठक में रनिंग स्टाफ की ड्यूटी का मुद्दा भी सामने आया. AIRF के मुताबिक, रेलवे के एक आदेश के तहत जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों से 11 घंटे तक लगातार काम लिया जा सकता है. कुछ परिस्थितियों में यह अवधि 12 घंटे तक हो सकती है. हालांकि, कर्मचारी संगठन का दावा है कि कुछ जगहों पर कर्मचारियों से 17-17 घंटे तक लगातार ड्यूटी कराई जा रही है. संगठन ने लंबे ड्यूटी आवर्स को कर्मचारियों की परेशानी के साथ-साथ रेल संचालन की सुरक्षा से जोड़कर देखा है.
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अब आगे क्या होगा?
8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों की नजर सिर्फ बेसिक सैलरी बढ़ने पर नहीं है. रेलवे कर्मचारियों के लिए यह बहस काम के घंटे, ओवरटाइम, TA-OT के भुगतान और सुरक्षित वर्किंग कंडीशन से भी जुड़ी है. यानी किसी कर्मचारी की वास्तविक आय और नौकरी की स्थिति समझने के लिए सिर्फ यह देखना काफी नहीं होगा कि बेसिक पे कितना बढ़ता है. समय पर मिलने वाले भत्ते, ओवरटाइम का भुगतान और ड्यूटी के घंटों का पालन भी उतना ही जरूरी है.
रेलवे बोर्ड की बैठक में ये मुद्दे रेलवे के एक कर्मचारी संगठन की तरफ से उठाए गए हैं. अब देखना होगा कि रेलवे बोर्ड इन मांगों पर क्या कदम उठाता है. 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ रेलवे कर्मचारियों के लिए यह देखना भी अहम होगा कि चर्चा सिर्फ वेतन और भत्तों तक रहती है या काम के घंटे और वर्किंग कंडीशन जैसे मुद्दों पर भी ठोस बदलाव होता है.