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कोरोना संकट की वजह से देश की GDP में आ सकती है आजादी के बाद की सबसे बड़ी गिरावट: नारायणमूर्ति

एन.आर. नारायणूर्ति ने आशंका जताई की कोरोना वायरस के चलते इस वित्त वर्ष में देश की आर्थिक गति आजादी के बाद सबसे खराब स्थिति में होगी. इसके पहले तमाम रेटिंग एजेंसियों ने आशंका जताई है कि कोरोना संकट के कारण भारत की जीडीपी में 3 से 9 फीसदी तक की गिरावट आएगी.

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इन्फोसिस के को-फाउंडर नारायणमूर्ति ने दी चेतावनी
इन्फोसिस के को-फाउंडर नारायणमूर्ति ने दी चेतावनी

 

 

  • इन्फोसिस के को-फाउंडर नारायणमूर्ति ने दी चेतावनी
  • कोरोना संकट की वजह से अर्थव्यवस्था की हालत खराब
  • इसके पहले कई रेटिंग एजेंसियां ऐसी चेतावनी दे चुकी हैं

इन्फोसिस के को-फाउंडर एन.आर. नारायणमूर्ति ने आशंका जाहिर की है कि कोरोना की वजह से इस साल भारत की जीडीपी में आजादी के बाद की सबसे बड़ी गिरावट देखी जा सकती है.

गौरतलब है कि इसके पहले तमाम रेटिंग एजेंसियों ने आशंका जताई है कि कोरोना संकट के कारण भारत की जीडीपी में 3 से 9 फीसदी तक की गिरावट आएगी. रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने कहा है कि कोरोना की वजह से वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में पांच फीसदी की गिरावट आएगी.

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दूसरी तरफ, रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि भारत में आजादी के बाद चौथी मंदी आने वाली है और यह अब तक की सबसे भयानक मंदी होगी. खुद भारतीय रिजर्व बैंक ने इस बात को स्वीकार किया है कि इस साल जीडीपी भारी गिरावट आएगी.

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क्या कहा नारायणमूर्ति ने

नारायणमूर्ति ने मंगलवार को आशंका जताई की कोरोना वायरस के चलते इस वित्त वर्ष में देश की आर्थिक गति आजादी के बाद सबसे खराब स्थिति में होगी. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, 'अर्थव्यवस्था को जल्द से जल्द पटरी पर लाया जाना चाहिए. इस बार सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में आजादी के बाद के सबसे बड़ी गिरावट दिख सकती है.'

नारायण मूर्ति ने ऐसी एक नई प्रणाली विकसित करने पर भी जोर दिया जिसमें देश की अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में प्रत्येक कारोबारी को पूरी क्षमता के साथ काम करने की अनुमति हो. उन्होंने कहा, 'भारत की GDP में कम से कम पांच फीसदी गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है. ऐसी आशंका है कि हम 1947 की आजादी के बाद की सबसे बुरी GDP वृद्धि (नेगेटिव) देख सकते हैं.'

वैश्विक व्यापार डूब रहा है

नारायण मूर्ति ने कहा, 'वैश्विक GDP नीचे गई है. वैश्विक व्यापार डूब रहा है, वैश्विक यात्रा करीब करीब ठप हो चुकी है. ऐसे में वैश्विक GDP में पांच से 10 फीसदी तक गिरावट होने का अनुमान है.' मूर्ति ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन लगने के पहले दिन से ही उनका यही विचार रहा है कि लोगों को कोरोना वायरस के साथ ही जीवन जीने के लिये तैयार होना होगा. इसके लिये तीन वजह हैं- इसकी कोई दवा नहीं है, कोरोना वायरस का कोई इलाज नहीं है और अर्थव्यवस्था को रोका नहीं जा सकता.

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टीका लगाने की तैयारी शुरू हो

मूर्ति ने कहा, 'यदि हम प्रतिदिन एक करोड़ लोगों को भी टीका लगाते हैं तब भी सभी भारतीयों को टीका लगाने में 140 दिन लग जाएंगे. यह इस बीमारों को फैलने से रोकने में लंबी अवधि है. ऐसी स्थिति में हम अर्थव्यवस्था को बंद नहीं कर सकते हैं. टीका तैयार हो जाने की स्थिति में हर व्यक्ति को टीका लगाने के लिये स्वास्थ्य ढांचा खड़ा किया जाना चाहिए. इसके साथ ही नये वायरस की इलाज की दिशा में भी काम होना चाहिए.'

 

 

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