गुरुग्राम का रियल एस्टेट मार्केट पिछले कुछ सालों में देश भर के लोगों की पसंदीदा डेस्टिनेशन बना हुआ है. जो शहर कभी दिल्ली के विकल्प के तौर पर देखा जाता था, आज वहां एक से बढ़कर एक लग्जरी प्रोजेक्ट लॉन्च हो रहे हैं और दुनिया भर के अमीर लोग यहां अपने लिए घर खरीद रहे हैं, लेकिन बढ़ती कीमतों और भीड़-भाड़ की वजह से कई खरीदार अब पारंपरिक हॉटस्पॉट से हटकर दूसरी जगहों पर भी ध्यान दे रहे हैं.
सोनीपत जैसे उभरते हुए इलाके अब कम शुरुआती लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर विकास की संभावनाओं के कारण लोगों को पसंद आ रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि निवेशकों को अपना पैसा कहां लगाना चाहिए? इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि वे लगातार होने वाली किराये की कमाई को ज़्यादा अहमियत देते हैं या लंबे समय में प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने को
एनारॉक (Anarock) के अनुसार, गुरुग्राम में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की औसत कीमत ₹10,000 से ₹18,000 प्रति वर्ग फ़ुट के बीच है, जबकि प्राइम माइक्रो-मार्केट में यह कीमत ₹20,000 प्रति वर्ग फ़ुट से भी ज़्यादा है, यह शहर नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) के सबसे महंगे हाउसिंग मार्केट में से एक बन गया है.
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वहीं सोनीपत में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी और प्लॉटेड डेवलपमेंट काफ़ी कम कीमत पर उपलब्ध हैं, जहां औसत दरें ₹3,500 से ₹6,000 प्रति वर्ग फ़ुट के बीच हैं. कीमतों में लगभग 50-70% के इस अंतर ने शहर को उन निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है जो कम कीमत पर निवेश शुरू करना चाहते हैं.
कीमत बढ़ने की संभावना
हालांकि गुरुग्राम एक मैच्योर मार्केट बन चुका है, लेकिन जानकारों का मानना है कि उभरते हुए टियर-II शहरों में लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिल सकता है. नाइट फ्रैंक इंडिया की रियल एस्टेट रिपोर्ट 2025 के अनुमान के मुताबिक, टियर-II मार्केट में सालाना कीमत में 8-12% की बढ़ोतरी हो रही है, जबकि टियर-I मार्केट में यह बढ़ोतरी 4-6% है. इससे उन निवेशकों के लिए सोनीपत में निवेश का तर्क और मजबूत हुआ है जो इसे लंबे समय के निवेश के तौर पर देख रहे हैं.
किराये से होने वाली कमाई
गुरुग्राम अपने मजबूत ऑफिस मार्केट और कॉर्पोरेट मौजूदगी की वजह से किराये से होने वाली कमाई के मामले में आगे बना हुआ है. शहर में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी से आमतौर पर 3-4% रेंटल यील्ड मिलती है, जबकि कमर्शियल प्रॉपर्टी से और भी ज्यादा रिटर्न मिल सकता है. वहीं दूसरी ओर, सोनीपत को अभी किराये से होने वाली कमाई वाले मार्केट के बजाय कीमत बढ़ने की संभावना वाले मार्केट के तौर पर ज़्यादा देखा जा रहा है.
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गुरुग्राम की सबसे बड़ी ताकतों में से एक कनेक्टिविटी रही है, जिसे NH-48, मेट्रो कनेक्टिविटी और दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से नज़दीकी का फ़ायदा मिला है. हालांकि, सोनीपत को इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहे नए निवेश का फ़ायदा मिल रहा है. कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे ने इलाके की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया है, जबकि प्रस्तावित मेट्रो विस्तार और आने वाले नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) से दिल्ली और सोनीपत के बीच यात्रा का समय 45 मिनट से कम होने की उम्मीद है.
NCR प्लानिंग बोर्ड और आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित कॉरिडोर मुख्य NCR बाज़ारों से आगे रियल एस्टेट ग्रोथ के अगले चरण को आगे बढ़ाएंगे. JLL इंडिया ने भी पिछले दो सालों में NCR के बाहरी इलाकों के बाज़ारों में निवेशकों की पूछताछ में 20-25% की बढ़ोतरी दर्ज की है, खासकर प्लॉटेड डेवलपमेंट और इंटीग्रेटेड टाउनशिप के लिए.
रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशंक वासन का मानना है कि सोनीपत अब सिर्फ एक सस्ते बाज़ार से कहीं आगे निकल चुका है.बेहतर सड़क संपर्क और आने वाली RRTS कनेक्टिविटी खरीदारों की दिलचस्पी बदल रही है. बाजार धीरे-धीरे मुख्य जगहों से ग्रोथ कॉरिडोर की ओर बढ़ रहा है, और सोनीपत उत्तर भारत में इस बदलाव का नेतृत्व कर रहा है.