भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है. फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब RBI ने ब्याज दरों में इजाफा किया है. बढ़ती महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच लिए गए इस फैसले का असर आम लोगों की जेब के साथ-साथ क्या रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ सकता है.
5 से 7 अक्टूबर तक चली तीन दिवसीय बैठक के बाद MPC ने सर्वसम्मति से रेपो रेट बढ़ाने का फैसला किया. इसके साथ ही RBI ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” कर दिया है, यानी फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश कम हो गई है.
रेपो रेट बढ़ने से बैंकों की उधारी लागत बढ़ सकती है, जिसका असर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन पर पड़ सकता है. ऐसे में मौजूदा होम लोन ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है या बैंक EMI को समान रखते हुए लोन की अवधि बढ़ा सकते हैं. रियल एस्टेट सेक्टर पर क्या पड़ेगा असर? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए हमने रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स से बात की.
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
बीपीटीपी के सीईओ और प्रेसिडेंट, मानिक मलिक कहते हैं- 'RBI का यह फैसला दिखाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है और महंगाई से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने की क्षमता रखती है. रियल एस्टेट सेक्टर के लिए लंबे समय में संभावनाएं अभी भी मजबूत हैं. बढ़ती आमदनी, तेजी से बढ़ता शहरीकरण, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और घर खरीदने की बढ़ती मांग से रियल एस्टेट को लगातार सहारा मिल रहा है. अगर महंगाई नियंत्रण में रहती है और अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनी रहती है, तो इससे लोगों का भरोसा और निवेश दोनों मजबूत होंगे, हम आवासीय रियल एस्टेट के भविष्य को लेकर सकारात्मक हैं. अच्छी लोकेशन और बेहतर गुणवत्ता वाली प्रॉपर्टी आगे भी घर खरीदारों और निवेशकों के लिए एक अहम निवेश विकल्प बनी रहेगी.
रूट्स डेवलपर्स के डायरेक्टर राजन याद कहते हैं 'इस बढ़ोतरी का रियल एस्टेट की मांग पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है. खासकर गुरुग्राम जैसे बाजार में, जहां मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, बड़ी कंपनियों की मौजूदगी और घर खरीदारों का भरोसा मांग को सहारा दे रहा है'.
उन्होंने कहा कि प्लॉटेड डेवलपमेंट ऐसे खरीदारों के बीच लोकप्रिय बने हुए हैं, जो लंबे समय के निवेश और बेहतर भविष्य की संभावनाओं को देखते हैं. इसी तरह प्रीमियम सुविधाओं वाले लग्जरी प्रोजेक्ट्स में भी अच्छी-खासी मांग बनी हुई है. ऐसे प्रोजेक्ट्स के खरीदारों पर EMI में मामूली बढ़ोतरी का असर अपेक्षाकृत कम पड़ता है.
कार्यन ग्रुप के डायरेक्टर वरुण गर्ग कहते हैं- 'रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी एक संतुलित फैसला है और इसका आवासीय रियल एस्टेट बाजार पर असर सीमित रहने की उम्मीद है. नोएडा और गाजियाबाद तेजी से विकसित हो रहे प्रमुख रियल एस्टेट बाजारों के तौर पर अपनी जगह मजबूत कर रहे हैं. बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे की आसान पहुंच और मजबूत सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर इन शहरों को घर खरीदारों के साथ-साथ निवेशकों के लिए भी आकर्षक बना रहे हैं.'
उन्होंने कहा कि बेहतर कीमत, बड़े घरों के विकल्प और भविष्य में प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने की संभावनाओं के चलते खरीदार इन बाजारों का रुख कर रहे हैं. ऐसे में EMI में मामूली बढ़ोतरी से उनके घर खरीदने के फैसले पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है. पूरे NCR में आवासीय रियल एस्टेट में अभी भी अच्छे अवसर मौजूद हैं और आने वाली तिमाहियों में भी आवासीय मांग मजबूत बने रहने की उम्मीद है.