दिल्ली में पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों से आने वाले लाखों छात्रों के लिए बेहतर PG की तलाश सबसे बड़ा सिरदर्द होता है. किराए की मनमानी, सिक्योरिटी डिपॉजिट, सुरक्षा इंतजाम और शिकायतों के समाधान को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. अब इन समस्याओं को दूर करने के लिए दिल्ली के PG आवासों को एक तय नियमों के दायरे में लाने की तैयारी है. प्रस्तावित “पेइंग गेस्ट एकॉमोडेशन रेगुलेशन एंड वेलफेयर बिल” के तहत PG के पंजीकरण से लेकर किराया, सुरक्षा और शिकायत निवारण तक के लिए नए नियम बनाने का प्रस्ताव है.
मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर, राजेंद्र नगर और नॉर्थ कैंपस जैसे प्रमुख शिक्षा केंद्रों में चल रहे PG इस प्रस्तावित व्यवस्था के दायरे में आएंगे, इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को सुरक्षित और पारदर्शी आवास उपलब्ध कराना है.
हर PG का होगा अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
प्रस्तावित विधेयक के तहत दिल्ली में संचालित हर PG का पंजीकरण अनिवार्य करने की तैयारी है. PG संचालकों को 90 दिनों के भीतर जोन अथॉरिटी से ऑपरेटिंग लाइसेंस लेना होगा. इसके लिए पुलिस, नगर निगम और स्थानीय प्रशासन से जरूरी NOC लेने का प्रावधान प्रस्तावित है.
पंजीकरण के बाद हर PG को एक यूनिक PG रजिस्ट्रेशन नंबर (PGRN) दिया जाएगा, इससे अधिकारियों और छात्रों के लिए किसी PG की पहचान और उसकी वैधता जांचना आसान होगा.
एक पोर्टल पर मिलेगी PG की पूरी जानकारी
प्रस्ताव में GovPG पोर्टल बनाने की बात कही गई है. इस पोर्टल पर सत्यापित PG की सूची के साथ वहां मिलने वाली सुविधाएं, किराया और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है. छात्र इस पोर्टल के जरिए PG के खिलाफ गुमनाम शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे. इसके अलावा प्रत्येक PG की अनुपालन रेटिंग भी पोर्टल पर दिखाने का प्रस्ताव है, इससे छात्र PG चुनने से पहले उसकी स्थिति और रिकॉर्ड की जानकारी ले सकेंगे.
किराए की मनमानी पर भी लगेगी लगाम
PG में रहने वाले छात्रों के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट है. प्रस्तावित विधेयक में अलग-अलग इलाकों के हिसाब से किराया बैंड तय करने के लिए रेंट रेगुलेशन कमेटी बनाने का सुझाव दिया गया है. नए नियमों के तहत PG संचालक अधिकतम तीन महीने की सिक्योरिटी डिपॉजिट और तीन महीने से ज्यादा का एडवांस नहीं ले सकेंगे. PG छोड़ने या खाली कराने के लिए भी 30 दिन का नोटिस अनिवार्य करने का प्रस्ताव है.
इसके अलावा लिंग, जाति, धर्म या मूल राज्य के आधार पर अलग-अलग या भेदभावपूर्ण किराया वसूलने पर रोक लगाने का भी प्रस्ताव है.
CCTV और सुरक्षा गार्ड होंगे जरूरी
छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए PG के सभी प्रवेश द्वारों और कॉमन एरिया में CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव है. कैमरों की फुटेज कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी. जिन PG में 15 या उससे ज्यादा छात्र रहते हैं, वहां रात के समय सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था करनी होगी, इसके अलावा विजिटर रजिस्टर रखने और PG से 500 मीटर के दायरे में वार्डन की उपलब्धता का भी प्रस्ताव है.
प्रस्तावित व्यवस्था में कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों की भूमिका भी तय करने की बात कही गई है। इसके लिए Institutional Accommodation Committee (IAC) बनाने का प्रस्ताव है. इस समिति में फैकल्टी, छात्र प्रतिनिधि, पुलिस और नगर निकाय के प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सकता है. समितियां हर तिमाही PG का निरीक्षण करेंगी. PG से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए 15 कार्यदिवस की समयसीमा तय करने का भी प्रस्ताव है.
अच्छे PG संचालकों को मिल सकता है इनाम
नियमों का लगातार पालन करने वाले PG संचालकों को प्रोत्साहित करने का भी प्रस्ताव है. लगातार दो साल तक संतोषजनक अनुपालन करने वाले संचालकों को प्रॉपर्टी टैक्स में छूट, आसान लोन और “Certified Student-Friendly PG” बैज दिया जा सकता है. इसके अलावा PG सेक्टर को GST राहत देने के लिए GST काउंसिल से मांग करने का सुझाव भी दिया गया है.
पुराने हादसों और शिकायतों के बाद बढ़ी जरूरत
प्रस्तावित विधेयक में दिल्ली के मौजूदा PG सिस्टम की कई कमियों का भी जिक्र किया गया है. दस्तावेज में पुराने राजेंद्र नगर में 2024 के बेसमेंट हादसे, मुखर्जी नगर में PG में आग और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामलों को छात्रों के लिए सुरक्षित आवास व्यवस्था की जरूरत से जोड़ा गया है. इसके अलावा यौन उत्पीड़न, छिपे कैमरे और मनमाने बिजली बिल जैसी शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है. ऐसे मामलों को देखते हुए PG में सुरक्षा और जवाबदेही के लिए एक स्पष्ट व्यवस्था बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया है.
लागू करने में आएंगी कुछ चुनौतियां
हालांकि, इस प्रस्तावित व्यवस्था को लागू करना आसान नहीं होगा, बड़ी संख्या में छोटे और अनौपचारिक PG का पंजीकरण, अलग-अलग एजेंसियों से NOC लेना, पोर्टल का संचालन और क्षेत्र के हिसाब से किराया तय करना बड़ी चुनौतियां हो सकती हैं।
इनसे निपटने के लिए सिंगल-विंडो क्लियरेंस, चरणबद्ध कार्रवाई और समर्पित समन्वयक जैसे उपाय सुझाए गए हैं.कुल मिलाकर, प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य दिल्ली के PG सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है. अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो छात्रों को PG चुनने से पहले उसकी सुरक्षा, किराया और सुविधाओं की जानकारी मिल सकेगी और शिकायतों के समाधान के लिए भी एक औपचारिक तंत्र तैयार होगा.
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