वेस्ट एशिया में वॉर ने सिर्फ तेल और गैस को लेकर ही समस्या पैदा नहीं की है, बल्कि पूरी इंडस्ट्री पर दबाव डाला है. इससे आयात-निर्यात बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. अब खबर है कि कच्चे माल की कीमतों में इजाफा हो गया है, जिस कारण आपके घर का मंथली बजट बढ़ सकता है. दूध से लेकर शैंपू के दाम में बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है.
वहीं कई रोजमर्रा की चीजों में इजाफा हुआ है. कंपनियों द्वारा इनपुट लागत में असामान्य बढ़ोतरी का हवाल देते हुए, कई चीजों के दाम में इजाफा किया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नई इकोनॉमिक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 के पहले 19 दिनों में दालों और फूड आइटम्स जैसे आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी देखी जा चुकी है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि सूरजमुखी तेल और मूंगफली तेल के कारण तेलों के दाम में भी इजाफा हुआ है. वहीं तुअर/अरहर और मूंग दालों की कीमतों में भारी उछाल आई है. वहीं अब पैकेजिंग से लेकर कच्चे माल में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिस कारण घर का बजट बिगड़ने का खतरा मडरा रहा है.
पैकेजिंग लागत में बड़ा इजाफा
आवश्यक वसतुओं के अलावा, तेजी से बिकने वाले कंज्युमर सामान (FMCG) उद्योग में भी लागत में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है. इस महीने की शुरुआत में संघर्ष शुरू होने के बाद से पैकेंजिंग सामानों की लागत में भारी उछाल आई है. पॉलीइथिलीन और अन्य पॉलिमर, जो फूड आइटम्स की पैकिंग और दूध के डिब्बों से लेकर शैंपू की बोतलों तक हर चीज के लिए आवश्यक हैं, की लागत में 40-50% की वृद्धि हुई है. इसे लेकर एक्सपर्ट्स ये अंदाजा लगा रहे हैं कि कंपनियां पैकेजिंग वाली चीजों की कीमतों में इजाफा हो सकता है.
मुंबई में बढ़ी थेपला की कीमत
उदाहरण- मुंबई में, पांच थेपला का एक पैकेट, जिसकी कीमत पिछले सप्ताह तक 50 रुपये थी, अब 75 रुपये में मिल रहा है. इनकी आपूर्ति करने वाले रेस्टोरेंट का कहना है कि खाना पकाने की गैस की अत्यधिक कीमतों के कारण उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ी हैं. इस महीने की शुरुआत में खाना पकाने की गैस की कीमतों में प्रति सिलेंडर 60 रुपये की वृद्धि की गई थी, लेकिन आपूर्ति में कमी और आगे भी कमी बने रहने की आशंकाओं के साथ-साथ जमाखोरी के कारण, कीमतें आधिकारिक 60 रुपये की वृद्धि से कहीं अधिक बढ़ गई हैं.
क्रिसिल रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर अनुज सेठी ने बताया कि कच्चे तेल से जुड़े इनपुट पूरे एफएमसी क्षेत्र का लगभग 25-35% हिस्सा हैं. कच्चे तेल से बने उत्पाद पैकेजिंग के साथ-साथ साबुन, डिटर्जेंट, हेयर ऑयल और शैंपू जैसे कुछ घरेलू उत्पादों में भी उपयोग किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि वॉर के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से एफएमसी कंपनियों के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ने की आशंका है. कंपनियां कच्चे माल, पैकेजिंग और माल ढुलाई की बढ़ी हुई लागत के प्रभाव को कम करने के लिए कीमतों में मामूली वृद्धि या वजन में कमी कर सकती है.