वेस्ट एशिया संकट और कच्चे तेल के दाम में उछाल के बीच, भारतीय करेंसी रुपया सिर्फ डॉलर के मुकाबले ही नहीं टूटा है, बल्कि चीन की करेंसी युआन की तुलना में भी गिरा है. ये गिरावट देश के लोगों को गहरे संकट की ओर ले जा रही है, क्योंकि चीन से आयात होने वाले चीजों के दाम बढ़ रहे हैं और हम चाहकर भी उससे आयात बंद नहीं कर सकते हैं, जिस कारण महंगाई का खतरा बढ़ रहा है. वहीं चीन को इसका लाभ मिल रहा है.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिस तरह से डॉलर की तुलना में रुपये में गिरावट चिंता की बात है. ठीक वैसे ही चीन की करेंसी की तुलना में गिरावट भी भारत के लिए दिक्कत वाली बात है, क्योंकि इससे चीन से भारत आने वाले समानों की कीमतें बढ़ सकती हैं. भारत अरबों डॉलर का चीन से सामान आयात करता है, जबकि निर्यात काफी कम है. ऐसे में रुपये का गिरना दिक्कत वाली बात है.
जनवरी से लेकर अभी तक देखें तो रुपया, युआन की तुलना में 6 से 8 फीसदी तक गिर चुका है. जनवरी में 1 युआन बराबर ₹12.8-13 था, लेकिन अब इसमें गिरावट के बाद 1 चीनी करेंसी बराबर ₹14-14.2 हो गया है. इससे साफ है कि अब भारत को सामान खरीदने के लिए 8 से 10 फीसदी रुपया ज्यादा चुकाना पड़ेगा, जिस कारण चीनी वस्तुओं की कीमत बढ़ जाएगी.
आइए समझते हैं भारत चीन से क्या-क्या आयात करता है और कितना सामान हर साल मंगाता है? साथ ही यह भी जानने की कोशिश की जाएगी कि रुपये में गिरावट से भारत को चीनी सामान मंगाना कितना महंगा पड़ रहा है...
चीन से भारत कौन-कौन सी चीजें आती हैं?
साल 2024 के आंकड़े को देंखे तो भारत ने चीन से बड़े स्तर पर आयात किया था, जो 100 अरब डॉलर से ज्यादा का रहा. वहीं साल 2025 में कारोबार का आंकड़ा बढ़कर 155 अरब डॉलर हो गया, जिसमें कुल आयात 115 से 120 अरब डॉलर का रहा.

2026 में कितना आयात होने का अनुमान?
अभी तक चीन से आयात के आंकड़े को देखें तो, 2025 की तुलना में आयात ज्यादा होने का अनुमान दिखाई दे रहा है. इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर इक्विपमेंट और मशीनरी इम्पोर्ट तेजी से बढ़े हैं. अगर ऐसा ही इम्पोर्ट होता रहा तो 2026 में चीन से इम्पोर्ट 125 से 135 अरब डॉलर हो सकता है.
कितना अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है?
मान लीजिए साल 2025 में चीन इम्पोर्ट करीब 120 अरब डॉलर था और युआन के मुकाबले रुपया 7 फीसदी कमजोर हुआ तो भारत पर अतिरिक्त बोझ 8.4 अरब डॉलर पड़ा. अगर इसे रुपये में देखें तो यह करीब 70,000 से 75,000 करोड़ रुपये एक्स्ट्रा लागत होगा.

चीन को भारत का एक्सपोर्ट्स
वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों को देखें तो भारत ने चीन को करीब 14.5 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया है. वहीं वित्त वर्ष 2026 में ये आंकड़ा और बढ़ने का अनुमान लगाया है. जिन चीजों का एक्सपोर्ट भारत ने किया है, उसमें पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, आयरन, इलेक्ट्रॉनिक्स और जरूरी एलिमेंट्स शामिल हैं. ऐसे में देखा जाए तो भारत चीन से बड़े स्तर पर इम्पोर्ट करता है, जिससे भारत का कारोबार घाटा भी बढ़ा है.
भारत और चीन के बीच ट्रेड डेफिसिट
ट्रेड डेफिसिट का मतलब दो देशों के बीच खरीद-बेचने के बीच के अंतर को ट्रेड डेफिसिट कहा जाता है. भारत और चीन के बीच ट्रेड डेफिसिट पिछले पांच साल के दौरान तेजी से बढ़ा है. सबसे ज्यादा उछाल कोविड के बाद 2021-22 के बीच हुआ.

क्यों गिर रहा रुपया?
रुपये को बचाने के लिए RBI क्या कर रहा?