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India's Inflation Risk: भारत में महंगाई का खतरा... वजह US-ईरान तनाव नहीं, तो फिर क्या?

India's New Inflation Risk: भारत में महंगाई बढ़ने का जोखिम है. एक्सपर्ट ने आशंका जताई है कि देश की महंगाई दर RBI के तय दायरे से ऊपर निकलकर 5 फीसदी का स्तर पार कर सकती है.

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आरबीआई के दायरे से काफी ऊपर जा सकती है भारत में महंगाई. (File Photo: ITG)
आरबीआई के दायरे से काफी ऊपर जा सकती है भारत में महंगाई. (File Photo: ITG)

अमेरिका-ईरान युद्ध की आग में दुनिया के तमाम देश झुलते, कुछ अटैक का शिकार हुआ, तो इस जंग से सप्लाई चेन बाधित होने से कई देशों में महंगाई का बम फूटा. भारत में भी तेल-एलपीजी की किल्लत देखने को मिली, लेकिन महंगाई बढ़ने जैसी कोई मार नहीं पड़ी. वहीं अब एक रिपोर्ट आई है, जिसमें कहा जा रहा है कि भारत में महंगाई बढ़ सकती है. खास बात ये है कि Inflation Attack अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से नहीं, बल्कि गर्मी और हीटवेव इसका कारण बनने वाला है. गर्मी के कड़े तेवर देश में दिखने शुरू हो गए हैं और अप्रैल में ही भारत के कई राज्य 'आग की भट्टी' बने नजर आए हैं. 

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को इस वर्ष हीटवेव और सामान्य से कम वर्षा के कारण महंगाई के खतरे का सामना करना पड़ सकता है. ये दोहरा अटैक पहले से एनर्जी की बढ़ती लागत के संकट के बीच नया आर्थिक दबाव पैदा कर रहा है. इस सप्ताह उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस (117 डिग्री फारेनहाइट) तक पहुंच गया है और घरों में ठंडक पाने के लिए एयर कंडीशनर और पंखे का यूज बढ़ने से देश में एनर्जी डिमांड रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई है. 

India's Inflation Risk Heatwave

कम बारिश से बढ़ेगी मुसीबत
सरकार ने भी जून से सितंबर के मानसून के मौसम के दौरान सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जाहिर किया है, जो एग्रीकल्चर एक्टिविटीज के लिए जरूरी है. ऑस्ट्रेलिया एंड न्यूजीलैंड बैंकिंग ग्रुप के इकोनॉमिस्ट धीरज निम का कहना है कि लगातार जारी भीषण गर्मी और अनियमित मानसून से खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ गया है, जो अब तक स्थिर बनी हुई नजर आ रही है. बारिश के पूर्वानुमान, Energy Price Hike, एग्रीकल्चर इनपुट कॉस्ट के साथ मिलकर आने वाले समय में फूड प्राइस में बढ़ोतरी के साथ गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं. 

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5% के पार पहुंचेगी महंगाई!
लू, कमजोर मानसून और तेल की कीमतों में उछाल से भारत में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई गई है. धीरज निम का कहना है कि 1 अप्रैल से शुरू हुए इस वित्तीय वर्ष में महंगाई दर औसतन 5 फीसदी (India Inflation) के करीब रहेगी, जो कि भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के 4.6 फीसदी के अनुमान से ज्यादा है. 

बीते साल के ज्यादातर समय भारत में महंगाई रिज़र्व बैंक के तय दायरे 4 फीसदी से नीचे रही और इसकी प्रमुख वजह सब्जियों की कीमतों में गिरावट रही थी. इकोनॉमिस्ट का कहना है कि इस बार प्रतिकूल मौसम स्थितियों के चलते ये बढ़ सकती है. 

India's Inflation Risk Heatwave

इकोनॉमी के लिए बड़ा संकट 
गौरतलब है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में फूड प्रोडक्ट्स का हिस्सा 37 फीसदी है और महंगाई की कैटेगरी में ये बड़ा अहम रोल निभाता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय जनसंख्या का 60 फीसदी से अधिक हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है और अपनी आजीविका के लिए सीधे तौर पर कृषि और उससे संबंधित कामों पर निर्भर है. खराब फसल से आय प्रभावित हो सकती है, ग्रामीण क्षेत्रों में डिमांड कम हो सकती है और इकोनॉमिक ग्रोथ (India's Economic Growth) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

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रिपोर्ट में ये अलर्ट भी किया गया है कि Food Price Hike और  ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के  झटके से आरबीआई की मौद्रिक नीति जटिल हो जाएगी. बता दें कि केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने इस महीने की शुरुआत में संकेत दिया था कि आरबीआई महंगाई और ग्रोथ के जोखिमों का आकलन करने के लिए कुछ समय तक यथास्थिति बनाए रखेगा. अनुमान जाहिर किया गया था कि इस वित्तीय वर्ष में इंडियन इकोनॉमी 6.9 फीसदी की रफ्तार से भागेगी. 

Crude Oil Price Surge

US-ईरान युद्ध, क्रूड ने बढ़ाई टेंशन
ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता का अनुमान है कि अगर मानसून की बारिश सामान्य से कम रही, तो इस वित्तीय वर्ष में महंगाई दर 5.8 फीसदी तक पहुंच सकती है. उन्होंने साल 2023 का समय याद करते हुए कहा कि उस समय जब बारिश सामान्य से 5.4 फीसदी कम हुई थी, तब फसल उत्पादन में 3.5 फीसदी की गिरावट आई थी, जबकि औसत खाद्य महंगाई बढ़कर 8 फीसदी पर पहुंच गई थी. 

उन्होंने कहा कि कम बारिश की वजह से किसानों को अपनी जमीनों की सिंचाई के लिए डीजल से चलने वाली सिंचाई सिस्टम का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. ये कृषि की लागत को बढ़ाने वाला साबित होगा. जबकि अमेरिका और ईरान में जारी युद्ध (US-Iran War) के कारण कच्चे तेल की कीमत (Crude Oil Price) पहले से ही 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है. 

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