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तेल के खेल से परेशान दुनिया, अब फिर बजी खतरे की घंटी, संकट में रिजर्व!

वेस्‍ट एशिया में तनाव के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिस कारण कई देश अपने रिजर्व का इस्‍तेमाल ज्‍यादा कर रहे हैं. इस बीच, एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर तक बड़ा संकट आ सकता है.

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 कच्‍चे तेल के चक्‍कर में परेशान दुनिया. (Photo: Representative/ITG)
कच्‍चे तेल के चक्‍कर में परेशान दुनिया. (Photo: Representative/ITG)

अमेरिका-ईरान जंग और होर्मुज पर ब्‍लॉकेज होने की वजह से दुनिया में तेल संकट बढ़ रहा है. खासकर पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश जैसे छोटे देशों को ज्‍यादा एनर्जी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है. इस बीच, एक रिपोर्ट ने तेल को लेकर बड़े खतरे की घंटी बजा दी है. इसका कहना है कि अगर ऐसे ही चलता रहा तो तेल को लेकर दुनिया नए खतरे में पड़ जाएगी. 

एएनजेड रिसर्च के नवीनतम ग्लोबल ऑयल मार्केट ट्रैकर के अनुसार, फारस की खाड़ी से तेल प्रवाह में लगातार रुकावट के कारण सितंबर तक विश्‍व में कच्चे तेल का भंडार गंभीर रूप से निम्न स्तर पर पहुंच सकता है और ईंधन की आपूर्ति में भारी कमी आ सकती है. 

अगर आपूर्ति में कमी आई तो ईंधन का संकट बढ़ सकता है. दुनियाभर में महंगाई चरम पर पहुंच सकती है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आपूर्ति में लंबे समय तक होने वाली कमी वैश्विक भंडार को लगातार कम कर रही है, जबकि मांग मजबूत बनी हुई है, जिससे कच्चे तेल के बाजारों में निरंतर अस्थिरता का खतरा बढ़ रहा है. 

सिर्फ 20 दिनों का बचेगा रिजर्व
ANZ का अनुमान है कि अगर फारस की खाड़ी से कच्चे तेल का नुकसान लगभग 10.5 मिलियन बैरल हर दिन बना रहता है, तो ग्‍लोबल कच्चे तेल के भंडार में गिरावट जारी रह सकती है. इस नजरिए से तेल रिजर्व सितंबर 2026 तक अपनी प्रभावी निचली सीमा के करीब पहुंच सकता है. साथ ही तेल उत्‍पादों का रिजर्व इससे भी पहले, संभवत: अगस्‍त तक गंभीर स्‍तर पर पहुंच सकता है. इससे बाजार में सिर्फ 20 दिनों का ही रिजर्व बचेगा. 

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मिडिल ईस्‍ट से तेल आपूर्ति में भारी कमी 
होर्मुज बंद होने के कारण तेल रिजर्व में भारी कमी आई है. रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्‍ट से कच्चे तेल की आपूर्ति में आई भारी गिरावट पर फोकस भी किया जा रहा है. यह मई में लगभग 6.8 मिलियन बैरल प्रति दिन कम हो गई. लाल सागर के रास्ते सऊदी अरब के निर्यात में भी कमी आई है, जिससे उपलब्ध आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. एएनजेड ने बताया कि फारस की खाड़ी में रुकावट के कारण पाइपलाइन के मार्ग परिवर्तन और आपातकालीन भंडार से तेल निकालने को ध्यान में रखते हुए लगभग 9.1 मिलियन बैरल प्रति दिन का शुद्ध तेल घाटा हुआ है. 

आपूर्ति में झटका
रिपोर्ट में फिजिकल मार्केट पर दबाव कम करने में चीन की भूमिका पर भी दबाव डाला गया. तनाव बढ़ने से पहले चीन का कच्‍चे तेल का आयात करीब 12.5 मिलियन बैरल हर दिन था, जो अब कम होकर करीब 2.5 मिलियन बैरल हर दिन रह गया है. 

इस कारण, फरवरी के अंत से अब तक 60 मिलियन बैरल से अधिक कच्चे तेल की बचत हुई है, जिससे वैश्विक आपूर्ति में आई बाधाओं को कुछ हद तक कम करने में मदद मिली है. एएनजेड ने कहा कि कमजोर मैन्‍युफैक्‍चरिंग गतिविधि, इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में बढ़ोतरी, घरेलू उड़ानों में कमी और धीमी रिफाइनिंग प्रॉसेस के कारण पिछले महीने चीन की तेल मांग में करीब 1 मिलियन बैरल प्रति दिन की कमी आने की संभावना है. हालांकि, बैंक ने चेतावनी दी कि यह स्थायी नहीं हो सकती है. आवागमन और टेक्‍नोलॉजी गतिविधयों में सुधार से चीनी आयात में वृद्धि हो सकती है, जिससे बाजार और अधिक तंग हो सकता है. 

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काफी ऊंची हैं कीमतें
ब्रेंट क्रूड की कीमतें हाल के उच्च स्तर से नीचे आ गई हैं, लेकिन फिर भी 90 डॉलर प्रति बैरल के मध्य स्तर पर बनी हुई हैं. कच्चे तेल और रिफाइन उत्पादों का फिजिकल रिजर्व घटते रिजर्व और गर्मियों में मजबूत मांग की उम्मीदों के कारण लगातार कम होता जा रहा है. 

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