बिहार की राजधानी पटना में गुरुवार को विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आक्रोश मार्च निकाला. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अगुवाई में नेता राजभवन की ओर बढ़े, तभी पुलिस ने तेजस्वी, VIP प्रमुख मुकेश सहनी और RJD सांसद मीसा भारती समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया.
विपक्ष की मांग है कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर सवालों का जवाब मिले और बिहार में दोबारा चुनाव कराए जाएं. तेजस्वी के हिरासत में जाने के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है.
मार्च से पहले तेजस्वी यादव विधानसभा गोलंबर पहुंचे थे. वहां उन्होंने कहा कि विपक्ष आज राजभवन तक मार्च कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वोट चोरी के जरिए देश के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया है. तेजस्वी का कहना था कि चुनाव में कथित धांधली करके ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी के सत्ता में आने का रास्ता बनाया.
तेजस्वी ने यह भी कहा कि जब इन मामलों की सच्चाई सामने आई, तब विपक्षी दल लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट हो गए. उन्होंने निष्पक्ष चुनाव की मांग की और कहा कि सभी राजनीतिक दलों को बराबर मौका मिलना चाहिए, जिसे लेवल प्लेइंग फील्ड कहा जाता है.
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इससे पहले बुधवार को भी बिहार में INDIA ब्लॉक ने 'ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ' अभियान के तहत आक्रोश मार्च और प्रदर्शन किया था. राज्य के सभी 534 प्रखंडों में प्रदर्शन और पुतला दहन का कार्यक्रम रखा गया था. इसके बाद गुरुवार को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और पटना में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजभवन मार्च का ऐलान किया गया था.
विपक्ष का यह आंदोलन दो बातों पर टिका है. पहली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाना. दूसरी, बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठ रहे सवाल. विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और बिहार में दोबारा चुनाव कराने की मांग भी कर रहे हैं.
गुरुवार के मार्च को देखते हुए पटना में पुलिस की भारी तैनाती की गई थी.